भाभी को चोदा– पड़ोसन अनिता भाभी की पहली चुदाई की सच्ची कहानी
Bhabhi Ko Choda – Padosan Anita Bhabhi Ki Pehli Chudai Ki Sachi Kahani
मालिश के बहाने लखनऊ की सेक्सी पड़ोसन अनिता भाभी को चोदा। मोटा 7 इंच लंड से भाभी की प्यास बुझाई, ब्लोजॉब से लेकर चूत फाड़ने तक की पूरी देसी सेक्स स्टोरी। भाभी की गीली चूत और जोरदार चुदाई की हॉट कहानी पढ़िए।
ये कहानी करीब दो साल पुरानी है। मेरा नाम सत्यम विज है, मैं लखनऊ, इंडिया से हूँ। हमारे सामने वाले घर में अनिता आंटी रहती थीं – सब उन्हें अनिता भाभी कहते थे, क्योंकि उनकी शादी को दस साल हो चुके थे। उनके पति गवर्नमेंट ऑफिस में नौकरी करते थे और रात को बहुत देर से घर लौटते थे। हमारा उनके घर बहुत घनिष्ठ संबंध था – मैं उन्हें कभी आंटी, कभी दीदी, तो कभी भाभी बुलाता था।
वो करीब 35 साल की थीं, गोरी-चिट्टी, भरावदार बदन वाली, हमेशा सूट-सलवार या साड़ी में बेहद आकर्षक लगती थीं। उनकी मुस्कान में कुछ ऐसा था जो दिल को छू जाता था, और उनकी आँखों में एक छुपी हुई प्यास नजर आती थी।
एक दिन मेरे घर में अचानक मेहमान आ गए, और मेरे एग्जाम नजदीक थे। घर में शोरगुल इतना था कि पढ़ाई मुश्किल हो रही थी। मैंने सोचा क्यों न अनिता भाभी के घर जाकर पढ़ लूँ। मैं उनके घर गया और बोला, “भाभी, घर में मेहमान हैं, पढ़ नहीं पा रहा। क्या मैं यहाँ आपके एक कमरे में बैठकर पढ़ाई कर लूँ?”
वो मुस्कुराईं और बोलीं, “बिल्कुल बेटा, आ जाओ। आज तो मैं भी अकेली हूँ, तुम्हारा भैया देर रात आएँगे।”
मैं एक कमरे में बैठकर पढ़ने लगा। वो दूसरे कमरे में थीं। काफी देर तक कोई आवाज नहीं आई। मुझे लगा शायद वो आराम कर रही हैं। मैं उठकर उनके कमरे में गया और धीरे से पूछा, “भाभी, सब ठीक है न? तबीयत तो ठीक है?”
वो बेड पर लेटी थीं, चेहरा थोड़ा उदास सा। बोलीं, “पूरा बदन दर्द कर रहा है सत्यम। आज घर के सारे काम अकेले किए, थक गई हूँ।”
मैंने सहानुभूति से कहा, “ओह, तो दबा दूँ भाभी? थोड़ी मालिश से आराम आ जाएगा।”
वो हल्के से मुस्कुराईं और बोलीं, “नहीं बेटा, तुम अपनी पढ़ाई करो। तुम्हारे एग्जाम हैं, नुकसान हो जाएगा।”
मैंने हँसते हुए कहा, “अरे भाभी, दस-पंद्रह मिनट में क्या हो जाएगा? बताओ, दर्द कहाँ ज्यादा है?”
वो थोड़ा झिझकते हुए बोलीं, “टांगों में ज्यादा… पैरों से लेकर जाँघों तक।”
वो बेड पर लेटी थीं, गुलाबी सूट-सलवार पहने। मैं उनके पैरों की तरफ बैठ गया। धीरे से उनकी एक टांग अपनी गोद में रखी और पैरों से दबाना शुरू किया। उनकी त्वचा मुलायम थी, गर्माहट महसूस हो रही थी। जैसे-जैसे मैं ऊपर की तरफ दबा रहा था, मेरे बदन में एक अजीब सी उत्तेजना फैलने लगी। मेरा लंड धीरे-धीरे शॉर्ट्स के अंदर खड़ा होने लगा। जल्द ही वो पूरा सात इंच का टाइट हो गया, शॉर्ट्स में तंबू सा बन गया।
मैंने जानबूझकर उनका पैर अपने लंड की तरफ सरकाया। पहले तो वो अनजान बनी रहीं, लेकिन जब उनका पैर मेरे खड़े लंड से टकराया, तो वो सिहर गईं। नीचे देखा – मेरी शॉर्ट्स में मेरा लंड साफ़ नजर आ रहा था। वो अपना पैर हटाने की कोशिश करने लगीं, लेकिन मैंने उनका पैर पकड़कर फिर से अपने लंड पर रख दिया और दबाते हुए रगड़ने लगा।
पहले तो वो थोड़ा विरोध करती रहीं – “सत्यम… ये क्या कर रहे हो… छोड़ो…” लेकिन उनकी आवाज में विरोध ज्यादा नहीं था। थोड़ी देर बाद वो चुप हो गईं, अपना पैर ढीला छोड़ दिया। फिर खुद धीरे-धीरे हिलाने लगीं। उनके पैर की उँगलियाँ मेरे लंड को सहला रही थीं, कभी दबा रही थीं। वो अब पूरी तरह खेल रही थीं मेरे लंड से। मेरी साँसें तेज हो गईं।
मेरी हिम्मत बढ़ी। मैंने कहा, “भाभी, सिर्फ दबाने से पूरा आराम नहीं आएगा। अच्छी मालिश कर दूँ? तेल लगाकर?”
वो खुशी से बोलीं, “हाँ बेटा! तेल की शीशी बाथरूम में रखी है।”
मैं उठकर तेल लेने गया। पीछे से उनकी आवाज आई, “सत्यम, दरवाजा बंद कर देना।”
मैं मन ही मन मुस्कुराया – अब खेल शुरू होने वाला था। मैंने मुख्य दरवाजा लॉक किया और कमरे में लौटा। वो अब उल्टी लेटी थीं। मैंने कहा, “भाभी, सूट में मालिश कैसे होगी? सारा तेल कपड़ों पर लग जाएगा।”
वो शरमाते हुए बोलीं, “हाँ, तुम ठीक कह रहे हो।”
मैंने हिम्मत करके कहा, “तो सलवार उतार दो न भाभी। मैं जल्दी मालिश कर देता हूँ, पूरा आराम आ जाएगा।”
पहले तो वो मना करती रहीं, लेकिन जब मैंने जिद की कि ऐसे आराम नहीं आएगा, तो वो मुस्कुराईं और धीरे से अपनी सलवार उतार दी। नीचे ब्लैक कलर की टाइट पैंटी थी – उनकी गोल-मटोल जाँघें और गांठ साफ़ नजर आ रही थी। मेरा लंड तो और जोर से उछलने लगा। उन्होंने भी मेरी शॉर्ट्स की तरफ देखा, जहाँ मेरा लंड साफ़ उभरा हुआ था, लेकिन कुछ बोलीं नहीं।
मैंने तेल हाथ में लिया और उनकी टांगों की मालिश शुरू की। पहले पैरों से, फिर पिंडलियों से ऊपर जाँघों की तरफ। उनकी साँसें तेज होने लगीं। जब मेरे हाथ उनकी पैंटी के किनारे तक पहुँचे, तो वो बोलीं, “ऊपर नहीं सत्यम… सिर्फ नीचे…”
लेकिन मैं कहाँ मानने वाला था। मैंने और जोर से हाथ चलाए, जाँघों के अंदरूनी हिस्से को सहलाने लगा। वो अब विरोध नहीं कर रही थीं – आँखें बंद कर लीं, होंठ काटने लगीं। मैंने हिम्मत करके एक उंगली पैंटी के किनारे से अंदर सरका दी। उनकी चूत पूरी तरह गीली थी, गर्म और मुलायम। वो सिहर उठीं, कमर ऊपर उठा दी।
फिर वो बोलीं, “तेरी शॉर्ट्स पर तेल लग जाएगा बेटा…”
मैं समझ गया इशारा। फटाक से अपनी शॉर्ट्स उतार दी। अब सिर्फ अंडरवियर में था, लंड तड़प रहा था। वो मेरे लंड को घूरने लगीं। मैंने कहा, “भाभी, अंडरवियर भी गंदा हो जाएगा… इसे भी उतार दूँ?”
उन्होंने कुछ बोलने से पहले ही मैंने अंडरवियर खींचकर फेंक दिया। अब मैं पूरी तरह नंगा था – मेरा सात इंच का मोटा लंड सीधा खड़ा, सुपारा लाल हो रहा था।
उन्हें देखते ही भाभी पागलों की तरह उठीं। तेल की शीशी मेरे हाथ से छीनकर साइड फेंकी और मेरे लंड को दोनों हाथों से पकड़ लिया। पहले हाथ से सहलाने लगीं, फिर झुककर मुँह में ले लिया। वो पागलों की तरह चूस रही थीं – जीभ से चाट रही थीं, गले तक ले जा रही थीं। उनकी गर्म साँसें मेरे लंड पर लग रही थीं।
मैंने उनके बाल पकड़े और पूछा, “भाभी, इतनी भूख लगी है?”
वो चूसते हुए बोलीं, “तेरे भैया अब बिल्कुल ध्यान नहीं देते। बाहर औरतें देखकर मुठ मारते हैं, मुझे छूते भी नहीं ठीक से। सालों से मेरी प्यास नहीं बुझी…”
मैंने कहा, “अब मैं बुझा दूँगा भाभी, रोज़ बुझाया करूँगा।”
वो और जोर-जोर से चूसने लगीं। उनकी लार मेरे लंड पर टपक रही थी। करीब बीस मिनट बाद मैं झड़ने वाला था। मैंने बताया, तो वो और गले तक ले गईं। मैं उनकी मुँह में ही झड़ गया – सारा माल उन्होंने पी लिया, एक बूंद भी बाहर नहीं गिरने दी।
लेकिन मेरा लंड फिर से तैयार हो गया। मैंने उनकी पैंटी एक झटके में फाड़ दी। उनकी चूत साफ़ थी, गुलाबी और पूरी तरह गीली। मैंने अपना लंड उनके चूत पर रगड़ा, फिर एक जोरदार धक्के में पूरा अंदर घुसेड़ दिया।
वो चीख उठीं, “आह्ह्ह… सत्यम… फाड़ डालो आज मेरी चूत को! इतना मोटा… कितने दिनों बाद… पूरी तरह भर दो मुझे!”
मैंने पूरी ताकत से चोदना शुरू किया। पहले धीरे-धीरे, फिर तेज-तेज धक्के। उनका भरावदार बदन मेरे नीचे लहरा रहा था। वो अपनी कमर ऊपर उठाकर साथ दे रही थीं। “और जोर से… हाँ वैसे ही… आह्ह्ह…” की आवाजें कमरे में गूँज रही थीं।
आधे घंटे तक मैंने उन्हें लगातार चोदा। इस दौरान वो तीन बार झड़ीं – हर बार उनकी चूत सिकुड़कर मेरे लंड को निचोड़ रही थी। आखिर में मैं भी उनकी चूत के अंदर गहराई तक झड़ गया। हम दोनों पसीने से तर, साँसें तेज, एक-दूसरे से चिपककर लेटे रहे।
उस दिन के बाद हमारी वो गुप्त मुलाकातें शुरू हुईं जो आज भी याद करके लंड खड़ा हो जाता है…
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