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भाभी की सहेली ने करवाया डबल चुदाई का मजा

Garam Raat Ki Sachi XXX Story – Bhabhi Ki Saheli Ne Karwaya Double Chudai

कानपुर की 32 साल की हॉट भाभी माया सिंह, पति के विदेश रहने से तन की आग से परेशान। सहेली रीना के घर गई तो दो हट्टे-कट्टे मर्द राज और विक्की ने मिलकर उसकी सारी प्यास बुझाई। डबल चुदाई, चूत और गांड दोनों में एक साथ लण्ड, जोरदार ठुकाई, चीखें, झड़ना और गर्म वीर्य की बौछारें। पूरी रात की सच्ची हॉट देसी थ्रीसम कहानी।

हाय दोस्तों, मेरा नाम माया सिंह है। उम्र 32 साल, मैं एक शादीशुदा औरत हूँ और कानपुर में रहती हूँ। मेरा फिगर 34-30-34 है – भरावदार सीने, पतली कमर और गोल-मटोल हिप्स जो मेरी टाइट ड्रेस में और भी उभर कर आते हैं। मेरी त्वचा गोरी-चिट्टी है, लंबे घने काले बाल कंधों तक लहराते हैं, और मेरी आँखें ऐसी हैं कि एक नज़र में मर्दों को मदहोश कर देती हैं। ये मेरी सच्ची कहानी है, पहली बार किसी के साथ शेयर कर रही हूँ – दिल की गहराई से।

मेरे पति विदेश में नौकरी करते हैं, साल में मुश्किल से एक बार आते हैं। घर में सिर्फ मैं और मेरा 5 साल का बेटा। दिन भर घर के काम, बच्चे की देखभाल, लेकिन रातें… रातें बहुत लंबी, बहुत अकेली और तन की आग से भरी होती हैं। नींद नहीं आती, बदन में एक अजीब सी बेचैनी रहती है। चादर के नीचे हाथ खुद-ब-खुद नीचे सरक जाता है, लेकिन वो सुकून कहाँ जो एक मर्द का गरम बदन दे सकता है।

गर्मियों की छुट्टियाँ थीं, तो मैंने सोचा अपनी पुरानी सहेली रीना के घर चली जाऊँ। रीना भी मेरी तरह ही है – पति विदेश में, अकेली बच्चे और कभी-कभी सास के साथ। उसकी सास उस समय तीर्थ यात्रा पर गई थीं, तो घर में सिर्फ वो और उसका बेटा।

हम कॉलेज के दिनों से बेस्ट फ्रेंड्स हैं – वो दिन याद आते हैं तो हँसी छूट जाती है। शादी के बाद मुलाकातें कम हो गईं, लेकिन दिल से आज भी हम एक-दूसरे की सबसे करीब हैं। मैंने अपना छोटा सा बैग पैक किया और बस पकड़ ली।

बस में भयंकर भीड़ थी। मैंने टाइट गुलाबी कुर्ती और सफेद सलवार पहनी थी, जो मेरे कर्व्स को अच्छे से हाइलाइट कर रही थी। मर्दों की नज़रें मेरे सीने पर, कमर पर, गांड पर टिकी हुई थीं। पीछे से एक अनजान आदमी बार-बार मुझे छू रहा था। उसका गरम बदन मेरी गांड से सटा हुआ था, और मुझे उसके लंड की हल्की-हल्की हरकत महसूस हो रही थी – वो धीरे-धीरे सख्त होता जा रहा था।

पहले तो मैं शर्मा गई, दूर हटने की कोशिश की, लेकिन फिर… अंदर से एक मीठी सी सिहरन दौड़ गई। कितने महीनों बाद किसी मर्द का स्पर्श महसूस कर रही थी। मैंने खुद को थोड़ा पीछे सरकाया, उसका लंड अब और साफ मेरी गांड की दरार में दब गया। मेरी साँसें तेज हो गईं, चूत में हल्की सी नमी महसूस हुई।

मैंने रोका नहीं, आँखें बंद करके उस पल को जी लिया – बस की झूलती हरकत के साथ उसका लंड मेरी गांड पर रगड़ खा रहा था। जब मेरा स्टॉप आया तो मन किया और देर तक खड़ी रहूँ, लेकिन उतर गई।

रीना के घर पहुँची तो शाम के सात बज रहे थे। उसने मुझे गले लगाया, दोनों खुश हो गए। बच्चों को खिलाया-पिलाया, खेलाया और फिर सुला दिया। अब सिर्फ हम दोनों। देर रात तक बातें करती रहीं – कॉलेज के दिन, पुरानी शरारतें, हँसी-मजाक। फिर बातें गहरी हो गईं। मैंने उससे कहा, “रीना, सच बता… कितने महीनों से कुछ हुआ ही नहीं। तन जल रहा है हर रात। नींद नहीं आती, बस बेचैनी रहती है।”

वो हँस पड़ी और बोली, “पागल, मैं भी तो ठीक वैसी ही हूँ! लेकिन मैंने तो इसका रास्ता निकाल लिया है।” उसने धीरे-धीरे मुझे बताया कि उसे दो बहुत अच्छे, भरोसेमंद मर्द पता हैं – राज और विक्की। दोनों हट्टे-कट्टे, जिम जाते हैं, बॉडी कमाल की, और लंड… वो तो ऐसे हैं कि एक बार लेने के बाद भूल नहीं सकतीं। “मेरे रेगुलर हैं, कभी कोई प्रॉब्लम नहीं हुई। सेफ, क्लीन, और बहुत स्टैमिना। अगर तू चाहे तो आज ही बुला लूँ। दोनों साथ आएँगे, तेरी सारी प्यास बुझा देंगे।”

मैं पहले तो हिचकिचाई। पराए मर्दों के साथ? लेकिन अंदर से तन मचल रहा था। चूत में एक अजीब सी खुजली सी हो रही थी। मैंने शर्मा कर पूछा, “सेफ तो होंगे ना? कंडोम वगैरह?” रीना ने मेरी आँखों में देखा, मेरे हाथ को अपने हाथ में लिया और बोली, “माया, मुझ पर पूरा भरोसा रख। मैं भी तो साथ हूँ ना। तू बस हाँ कर दे।” मैंने सोचा – इतने दिन हो गए, अब और नहीं सहन होता। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैंने मुस्कुरा कर सिर हिला दिया और धीरे से कहा, “ठीक है… बुला ले।”

रीना की आँखें चमक उठीं। उसने फोन निकाला और कॉल कर दी। “आ जाओ दोनों, आज स्पेशल ट्रीट है।” रात के दस बज रहे थे। हमने जल्दी से डिनर किया। बाहर ऑटो की आवाज़ आई। दरवाज़ा खोला तो दो साँड जैसे मर्द अंदर आए। राज 30-32 का, चौड़ा सीना, मजबूत बाजू, गहरा रंग, लेकिन चेहरा बहुत हैंडसम। विक्की 34-35 का, लंबा कद, मसल्स फट रही थीं, हल्की दाढ़ी, आँखों में शरारत। दोनों ने आते ही मुझे ऊपर से नीचे तक स्कैन किया – आँखों में साफ भूख दिख रही थी।

हम चारों लिविंग रूम में सोफे पर बैठे। पहले तो नॉर्मल बातें – मौसम, ट्रैफिक, लेकिन जल्दी ही माहौल गरम हो गया। राज और विक्की आपस में धीरे-धीरे बात कर रहे थे, मुझे सुनाई दे रहा था – “यार, क्या माल है रे… ये बूब्स तो दबा-दबा कर लाल कर दूँगा। गांड तो फाड़ के रख देंगे।” रीना तो उनकी पुरानी थी, लेकिन मुझे देख कर दोनों पागल से हो रहे थे।

राज मेरे ठीक बगल में आकर बैठ गया। उसका गरम हाथ मेरी जांघ पर रखा, धीरे-धीरे ऊपर सरकाने लगा। मैंने रोका नहीं, बस आँखें नीची करके मुस्कुरा दी। विक्की ने रीना को गोद में उठा लिया और उसके होंठों पर किस करने लगा। राज ने मेरे कान में फुसफुसाया, “भाभी, तुम तो आग हो। आज तुम्हें स्वर्ग का मज़ा देंगे।”

मैंने कुछ नहीं कहा, बस उसकी चौड़ी छाती पर हाथ फेर दिया। उसने मेरे होंठ अपने होंठों से दबा लिए। किस इतना गहरा, इतना जुनूनी कि मेरी साँसें रुक सी गईं। मैंने भी पूरा जवाब दिया – अपनी जीभ उसके मुंह में डाल दी, दोनों की जीभें लड़ने लगीं। उसका हाथ मेरी कुर्ती के अंदर घुस गया, ब्रा के ऊपर से मेरे बूब्स दबाने लगा – इतनी जोर से कि मीठा दर्द हुआ।

फिर सब कुछ बहुत तेज़ी से हुआ। मैंने खुद अपनी कुर्ती ऊपर उठाई, राज ने पीछे से हुक खोल कर ब्रा उतार दी। मेरे गुलाबी निप्पल्स बाहर आ गए – पहले से ही टाइट और सख्त। विक्की ने मेरी सलवार का नाड़ा खींचा, पैंटी नीचे सरका दी। मेरी चूत पूरी तरह गीली थी, हल्के-हल्के बाल थे जो इसे और भी सेक्सी बनाते थे। राज मेरे बूब्स चूसने लगा – एक निप्पल मुंह में लेकर जोर-जोर से चूस रहा था, दूसरा उंगलियों से मसल रहा था।

विक्की नीचे बैठ गया, मेरी टांगें चौड़ी कीं और चूत चाटने लगा। उसकी जीभ क्लिट पर घूम रही थी, कभी अंदर तक घुसा रहा था। पुछ-पुछ, चप-चप की आवाज़ें पूरे कमरे में गूँज रही थीं। मेरी आहें निकल रही थीं – “आह्ह्ह… उमम्म्म… हाँ… और अंदर…”

मैंने राज का पैंट खोला और लंड बाहर निकाला – 8 इंच का मोटा, नसें फूली हुईं, सुपारा गुलाबी। मैंने खुद मुंह में लिया और चूसने लगी – गले तक, लार टपक रही थी। वो दोनों मेरे जिस्म पर पागल हो रहे थे, लेकिन मैं भी पूरी तरह उनके साथ थी – कमर ऊपर उठा कर चूत विक्की के मुंह से और सटा रही थी।

राज ने मुझे गोद में उठाया, अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ा। मैंने खुद उसका लंड पकड़ा और छेद पर सेट कर दिया। “डालो ना… अब और नहीं सहन होता,” मैंने धीरे से कहा। वो धीरे-धीरे अंदर घुसा – पूरा 8 इंच। “आह्ह्ह… कितना मोटा है…” मैं चीखी। विक्की पीछे से आया, मेरी गांड पर थूक लगाई, पहले एक उंगली, फिर दो। पहले थोड़ा दर्द हुआ, लेकिन मैंने खुद कमर पीछे की और बोली, “धीरे से… लेकिन डालो।” उसका लंड – 7.5 इंच लेकिन और भी मोटा – धीरे-धीरे गांड में घुस गया।

अब मैं बीच में थी – आगे चूत में राज का लंड, पीछे गांड में विक्की का। दोनों ने रिदम पकड़ा, पहले धीरे-धीरे फिर तेज़ स्पीड। थप-थप, चप-चप की आवाज़ें, मेरी मदहोश चीखें – “आह्ह्ह… और ज़ोर से… फाड़ दो मुझे… हाँ… दोनों साथ…” कभी मुझे घोड़ी बना कर चोदते, मेरे बाल पकड़ कर पीछे से धक्के मारते। कभी दीवार से सटा कर, मेरी एक टांग ऊपर उठा कर। कभी गोद में उछाल-उछाल कर।

मेरे बूब्स लाल हो गए थे इतने मसलने-चूसने से, निप्पल्स सूज गए थे, लेकिन मज़ा अलग लेवल का था। मैं तीन बार झड़ चुकी थी – पूरा बदन काँप रहा था, चूत से पानी की फव्वारे छूट रहे थे।

आखिर करीब 35 मिनट बाद विक्की ने मेरी गांड में गर्म वीर्य की धार छोड़ी – इतना गरम कि मुझे फिर से ऑर्गेज़म आ गया। फिर राज ने चूत में सारा माल उड़ेल दिया। हम तीनों पसीने से तर, एक-दूसरे से चिपक कर सोफे पर गिर पड़े। थोड़ी देर बाद मैंने खुद दोनों के लंड फिर मुंह में लिए, चूसे और हाथ से मुठ मारी। फिर उन्होंने रीना को भी खूब चोदा – वो तो एक्सपर्ट थी, अलग-अलग पोज़ में ले रही थी।

वो लोग करीब ढाई घंटे रुके, फिर चले गए। सुबह तक मैं बिस्तर पर पड़ी रही – चूत और गांड में मीठा-मीठा दर्द, लेकिन दिल और तन दोनों पूरी तरह तृप्त। कितने दिनों बाद ऐसा सुकून मिला था।

दोस्तों, कैसी लगी मेरी ये हॉट स्टोरी? सच बताना। अगर पसंद आई तो बताना, अगली स्टोरी और भी गरम होगी।

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