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घर खाली था तो देवर ने भाभी को घोड़ी बनाकर पेला

Ghar Khali Tha To Devar Ne Bhabhi Ko Doggy Style Me Choda

राहुल की कामुक भाभी प्रिया का गुप्त संबंध – नंगी भाभी को देखकर शुरू हुई देवर की हवस, वियाग्रा देकर घंटों चुदाई, बड़े लंड से भाभी की चूत फाड़ दी। पूरी हॉट देसी भाभी-देवर सेक्स कहानी हिंदी में, बड़े बूब्स, मोटी गांड और रसीली चूत की पूरी डिटेल के साथ।

दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर में रहता हूँ। उम्र 24 साल, कद 5 फुट 7 इंच, और जिम से बनी हुई मजबूत बॉडी। मुझे सेक्स का बहुत शौक है – अब तक कई लड़कियों और औरतों के साथ intimae moments बिताए हैं। मेरा लंड 7.2 इंच लंबा और 2.5 इंच मोटा है। जब पूरी तरह खड़ा होता है, तो नसें उभर आती हैं, जो औरतों को देखते ही पागल कर देती हैं।

मेरी भाभी का नाम प्रिया है। उम्र 26 साल, और भैया से शादी को दो साल हो चुके थे। उनका फिगर कमाल का था – 38-32-39। बड़े-बड़े टाइट ब्रेस्ट, पतली कमर, और वो मोटी-गोल गांड जो चलते वक्त हिलती थीं, तो किसी का भी मन डोल जाता। हाइट 5 फुट 6 इंच, रंग दूध जैसा गोरा, लंबे घने काले बाल, गुलाबी मोटे होंठ। घर में अकेले रहतीं तो बहुत कम कपड़े पहनतीं – कभी ब्रा-पैंटी में, कभी पतली नाइटी में घूमतीं, जो उनके कर्व्स को और हाइलाइट करती थी।

शादी से पहले से ही मैं उन पर फिदा था। उनकी मुस्कान, हंसी, चलने का अंदाज – सब कुछ मुझे आकर्षित करता था। लेकिन कभी गलत नहीं सोचा। फिर एक दिन किस्मत ने मौका दे दिया।

एक दोपहर मैं ऑफिस से जल्दी घर लौटा। पता था भाभी अकेली हैं। दूसरी चाबी से चुपके से दरवाजा खोला और अंदर घुस गया, बिना आवाज किए। बाथरूम से पानी की आवाज आ रही थी। थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला और भाभी बाहर निकलीं – पूरी तरह नंगी! ताजे नहाए बदन पर पानी की बूंदें चमक रही थीं। उनके 38 साइज के भारी ब्रेस्ट हल्के-हल्के हिल रहे थे, गुलाबी निप्पल्स तने हुए।

पतली कमर से नीचे चौड़ी hips, और वो गोल-मोटी गांड जो हर कदम पर लहराती हुई कमरे की तरफ जा रही थी। मैं दीवार के पीछे छुपकर देखता रह गया। मेरा लंड पैंट में ही सख्त होकर तड़पने लगा। अचानक वो मुझे देखकर चौंकीं, शर्मा कर हाथों से ब्रेस्ट छुपाती हुईं कमरे में भाग गईं। लेकिन वो हिलती गांड का नजारा मेरे दिमाग में छप गया – रात भर नींद नहीं आई।

उस दिन के बाद मैंने धीरे-धीरे बातें बढ़ानी शुरू कीं। पहले सामान्य बातें, फिर हल्का फ्लर्ट। वो भी मुस्कुराने लगीं, आंखों में शरारत आने लगी। एक रात मैंने उन्हें रोमांटिक मैसेज भेजा। वो खुल गईं – बताया कि भैया का लंड सिर्फ 6.5 इंच का है और वो जल्दी झड़ जाते हैं, कभी पूरा मजा नहीं देते। बोलीं, “मुझे बड़ा, मोटा लंड ट्राई करना है… कभी-कभी तुम्हारे बारे में सोचती हूँ।” मैंने वो मैसेज सेव कर लिए, दिल खुश हो गया।

फिर मैंने उन्हें एक होटल में बुलाया। वो आईं, लेकिन मुझे देखकर चौंक गईं। “तुम?? वो मैसेज तुम भेजते थे?” मैंने हां कहा तो वो गुस्सा होकर चली गईं। घर आकर कुछ दिन बात नहीं कीं। लेकिन मैं हार नहीं माना।

एक शाम वो किचन में थीं। मैं चुपके से पीछे गया, कमर में हाथ डालकर उन्हें पकड़ लिया। वो चौंकीं, “राहुल, क्या कर रहे हो?” लेकिन विरोध सिर्फ जुबानी था – बदन में कोई ताकत नहीं। मैंने उनकी गर्दन पर हल्का किस किया, गर्म सांसें उनके कानों में छोड़ीं। उनका बदन कांप उठा, सांसें तेज हो गईं।

वो थोड़ा पीछे हटीं, लेकिन फिर खुद ही मेरे सीने से चिपक गईं। मैंने महसूस किया – वो भी उतनी ही गर्म हो रही थीं जितना मैं। मैंने उन्हें छोड़ दिया, लेकिन अब तय था कि उन्हें पूरी तरह अपना बनाकर रहूंगा।

फिर वो परफेक्ट दिन आया। घरवाले एक शादी में गए थे। मैं और भाभी बहाने से जल्दी लौट आए। घर पूरी तरह खाली। मैं बाहर से कोल्ड ड्रिंक लाया, आधी खुद पी और बाकी में तीन वियाग्रा की गोलियां घोल दीं। घर आकर भाभी को दी। वो मुस्कुराकर बोलीं, “तुम भी पीयो ना।” मैंने थोड़ा पीकर बाकी उन्हें पिला दिया।

आधे घंटे बाद असर शुरू हुआ। भाभी का चेहरा लाल हो गया, आंखें कामुक और चमकदार। वो बेचैन सी सोफे पर बैठी थीं, पैर बदल रही थीं। मैं पास बैठ गया, रोमांटिक बातें करने लगा – उनकी तारीफ की, आंखों में देखकर कहा कितनी खूबसूरत हैं।

पहले वो शर्मा रही थीं, फिर धीरे-धीरे खुल गईं। मैंने उनका हाथ पकड़ा, उंगलियों से सहलाया। वो मना नहीं कर रही थीं – उल्टा हाथ दबाकर रखा। हिम्मत बढ़ाकर मैंने जांघों पर हाथ फेरा। उनका बदन सिहर उठा, सांसें भारी हो गईं। वो बोलीं, “राहुल… ये गलत है…” लेकिन आवाज में कमजोरी थी, जैसे खुद भी चाह रही हों।

मैंने उनके गाल पर किस किया। उनके चेहरे पर सेक्सी मुस्कान आ गई। फिर होंठों पर – पहले हल्का, फिर गहरा। वो भी साथ देने लगीं। हम लंबा, गहरा स्मूच करने लगे – उनकी जीभ मेरे मुंह में घुस रही थी, मेरी उनकी। स्मूच के साथ मैंने उनके बड़े ब्रेस्ट दबाने शुरू कर दिए। कितने टाइट और मुलायम थे! निप्पल्स पत्थर जैसे सख्त हो गए। उनके मुंह से दबी-दबी आहें निकल रही थीं – “उम्म्म… आह्ह…”

मैंने उनका सूट ऊपर किया। ब्लैक ब्रा में गोरा बदन कमाल लग रहा था। ब्रा उतारी तो ब्रेस्ट बाहर आए – भारी, गोल, गुलाबी निप्पल्स चमक रहे। मैंने एक को मुंह में लिया, जोर से चूसा, दूसरे को हाथ से मसला। भाभी की आहें तेज हो गईं, “आह्ह… धीरे राहुल… कितना अच्छा लग रहा है… मैं भागी थोड़ी जा रही हूँ… यहीं हूँ ना…” और खुद मेरे लंड को पैंट के ऊपर से सहलाने लगीं। उनका स्पर्श महसूस कर मेरा लंड और सख्त हो गया।

फिर हम दोनों जल्दी से नंगे हो गए। मेरे मोटे लंड को देखकर वो चौंक गईं। “नहीं राहुल… इतना बड़ा-मोटा… मैं नहीं सह पाऊंगी… भैया का तो छोटा है…” लेकिन आंखें लालच से चमक रही थीं। मैंने उनका हाथ लंड पर रखा। वो सहलाने लगीं – ऊपर-नीचे, टोपा दबाकर।

मैं उनके ब्रेस्ट चूस रहा था, दबा रहा था। फिर हाथ नीचे ले जाकर चूत पर रखा। गर्म, गीली, रस से भरी हुई। जैसे करंट लगा, वो जोर से आह भरकर मुझसे लिपट गईं। मैंने चूत सहलानी शुरू की, क्लिट पर उंगली घुमाई। वो तड़पने लगीं, “जोर से… और जोर से करो… आह्ह्ह्ह… राहुल… मार डालो मुझे…”

एक उंगली अंदर डाली। चूत टाइट थी, गर्म और रसीली। अंदर-बाहर करने लगा। वो मेरे होंठ चूसने लगीं, जैसे सालों से भूखी हों। फिर खुद मुझे खींचने लगीं, ब्रेस्ट मेरे मुंह में ठूंस रही थीं। मैंने कहा, “भाभी, मेरा लंड चूसो ना।” पहले मना किया, फिर टोपा मुंह में लिया। उनका गर्म, गीला मुंह – स्वर्ग जैसा लगा! वो जोर-जोर से चूसने लगीं, जीभ से चाटने लगीं। मैं आहें भर रहा था, बाल पकड़कर गाइड कर रहा था।

फिर मैंने उन्हें घोड़ी बना दिया। पीछे से वो मोटी गांड देखकर पागल हो गया। लंड चूत पर रगड़ा – रस से लंड चिकना हो गया। वो तड़प उठीं, “प्लीज राहुल… अब मत तड़पाओ… डाल दो अंदर… मर जाऊंगी नहीं तो… चोदो मुझे जोर से…” मैंने रगड़ता रहा, वो और जोर से चिल्लाने लगीं, गांड उछालने लगीं।

फिर धीरे से धक्का दिया। मोटाई की वजह से मुश्किल से टोपा अंदर गया। जोर से एक झटका – आधी लंबाई अंदर। भाभी की जोरदार चीख – “आआआह्ह्ह्ह मार गईईई! दर्द हो रहा है…” मैं रुका, उनकी कमर सहलाया, ब्रेस्ट दबाया। फिर धीरे-धीरे पूरा अंदर किया। वो दर्द से रोने लगीं, “निकालो… फट जाएगी चूत… प्लीज…” लेकिन मैंने कमर मजबूत पकड़ रखी थी।

धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। पहले दर्द, फिर धीरे-धीरे मजा आने लगा। भाभी की आहें बदल गईं – “आह्ह… उफ्फ्फ… राहुल… कितना गहरा जा रहा है… कभी नहीं लगा ऐसा…” कमरा थप-थप की आवाजों, आह्ह-उह्ह और चुदाई की चिकनी आवाजों से भर गया।

भाभी खुद गांड उछालकर साथ देने लगीं, “जोर से… और जोर से चोदो… फाड़ दो आज…” 45 मिनट तक चला – वो तीन बार झड़ीं, हर बार चूत सिकुड़कर लंड को जोर से दबा रही थी, रस बह रहा था। आखिर में मैंने कहा, “भाभी, झड़ने वाला हूँ।” वो बोलीं, “अंदर ही निकालो जानू… इतना मजा दिया है, माल बेकार मत जाने दो… भर दो मेरी चूत… बना दो मुझे अपनी…”

मैं जोर से झड़ा – गर्म वीर्य से उनकी चूत पूरी भर गई। हम दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे से लिपटे सोफे पर लेटे रहे, सांसें सामान्य होने का इंतजार करते हुए।

उस रात हमने चार राउंड और मारे। भाभी की चूत सूज गई थी, लाल हो गई थी, लेकिन वो खुद मांग रही थीं – “और दो… नहीं रुकना आज…” सुबह उठकर भी एक क्विक राउंड। उसके बाद जब भी मौका मिलता – किचन में पीछे से, बाथरूम में नहाते वक्त, रात को चुपके से – हम चुदाई करते। एक दिन चुदाई करते हुए उनकी छोटी बहन ने हमें देख लिया। फिर वो भी शामिल हो गई – वो कहानी अगली बार।

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