कजिन दीदी की प्रेग्नेंसी में जीजाजी के साथ हॉट सेक्स स्टोरी
इस हिंदी सेक्स स्टोरी में पढ़ें कैसे एक लड़की अपनी प्रेग्नेंट कजिन दीदी की मदद के लिए जीजाजी के साथ रात बिताती है। शुरू में मजबूरी से शुरू हुई ये कहानी धीरे-धीरे आनंद और नए अनुभवों में बदल जाती है, जिसमें वर्जिनिटी लॉस, थ्रीसम और रोजाना की हॉट पोजीशन्स शामिल हैं। वयस्क पाठकों के लिए रोमांचक और उत्तेजक कंटेंट।
आज मैं आपको अपनी एक और अनोखी और गुप्त कहानी सुनाने जा रही हूँ। ये बात पिछले साल दिवाली के आसपास की है, जब मैं अपनी कजिन सिस्टर के पास कुछ दिनों के लिए गई थी। मेरी दीदी, जिन्हें मैं प्यार से दीदी ही बुलाती हूँ, वो प्रेग्नेंट थीं और उनका नौवाँ महीना चल रहा था। घर में पहले से ही उनकी एक तीन साल की प्यारी-सी बेटी थी, जिसका नाम रिया था।
दीदी ने मुझे फोन करके बुलाया था, क्योंकि उन्हें घर संभालने में मदद चाहिए थी – खाना बनाना, रिया की देखभाल करना, और घर के छोटे-मोटे काम। मैं खुशी-खुशी राज़ी हो गई, क्योंकि दीदी मुझे हमेशा से बहुत प्यार करती थीं। वो स्वभाव से बेहद दयालु और केयरिंग थीं, लेकिन उनके पति, यानी मेरे जीजाजी, एक अलग ही किस्म के इंसान थे। वो नेक दिल के तो थे, पर उनकी एक बुरी आदत थी – हर शाम दारू पीना। कभी-कभी तो इतना ज्यादा पी लेते कि घर का माहौल खराब हो जाता।
मैं उनके घर पहुँची तो दीदी ने गले लगाकर स्वागत किया। “राखी, तू आ गई! अब मुझे चिंता नहीं,” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा। घर बड़ा और आरामदायक था, लेकिन दीदी की हालत देखकर मुझे दुख हुआ। उनका पेट काफी बड़ा हो चुका था, और वो थकान महसूस कर रही थीं। पहले दिन सब ठीक रहा। मैं रिया के साथ खेलती, उसे खाना खिलाती, और दीदी को आराम करने देती। जीजाजी दिन भर काम पर रहते, शाम को लौटते, और फिर अपनी दारू की बोतल के साथ बैठ जाते। वो मुझे कभी-कभी घूरते, लेकिन मैं ज्यादा ध्यान नहीं देती।
एक दोपहर की बात है। मैं किचन में रिया को खाना खिला रही थी, तभी दीदी के बेडरूम से जोरदार चिल्लाहट की आवाज़ आई। “नहीं… छोड़ो मुझे!” दीदी की आवाज़ थी। मैं दौड़कर गई तो दरवाजा खुला था। अंदर का नजारा देखकर मेरी साँसें थम गईं – जीजाजी दीदी को थप्पड़ मार रहे थे, और दीदी रोते हुए उन्हें रोकने की कोशिश कर रही थीं। जीजाजी का चेहरा गुस्से से लाल था, और वो दारू की महक से भरे हुए लग रहे थे। मैं फौरन बीच में कूद पड़ी। “जीजाजी, क्या कर रहे हो? दीदी को मत मारो!” मैंने उनका हाथ पकड़ लिया। जीजाजी ने मुझे धक्का दिया, लेकिन मैं डटी रही। किसी तरह दीदी को उनके कमरे से निकालकर अपने कमरे में ले आई। दीदी रो रही थीं, उनका चेहरा सूजा हुआ था।
“दीदी, क्या हुआ? बताओ ना,” मैंने पूछा, उन्हें पानी पिलाते हुए। दीदी ने सिसकते हुए कहा, “कुछ नहीं राखी, ये रोज़ की बात है। अब मुझे सहन करना पड़ता है।” मैंने ज़ोर देकर पूछा, “नहीं, बताओ। जीजाजी ऐसा क्यों करते हैं?” दीदी रोते हुए बोलीं, “तेरे जीजाजी को… सेक्स करने की चाहत उठी है। लेकिन मैं अब वो दर्द नहीं झेल सकती। प्रेग्नेंसी की वजह से डॉक्टर ने मना किया है। वो गुस्से में आ जाते हैं और… मारने लगते हैं।”
मेरे होश उड़ गए। मैंने कभी सोचा नहीं था कि घर में ऐसा कुछ चल रहा है। दीदी ने मुझसे कहा, “राखी, तू मेरा एक काम करोगी? प्लीज़… मेरे लिए।” मैं बोली, “हाँ दीदी, बताओ। कुछ भी करूँगी।” दीदी ने हिचकिचाते हुए कहा, “अगर तू मेरा भला चाहती है, तो आज एक रात के लिए तू जीजाजी के पास ही रह जा। नहीं तो वो गुस्से में बाहर चले जाएँगे, और पता नहीं क्या कर बैठें। कुछ नहीं होगा, बस एक रात… प्लीज़।” मैं स्तब्ध रह गई। ये क्या कह रही हैं दीदी? लेकिन उनकी आँखों में वो दर्द देखकर मैं मना नहीं कर पाई। मैंने सोचा, दीदी की मदद करनी चाहिए, और हिचकिचाते हुए राज़ी हो गई। “ठीक है दीदी, लेकिन सिर्फ आज।”
शाम हुई। जीजाजी अपने रूम में टीवी देख रहे थे, बोतल हाथ में लिए। उनका मूड अभी भी खराब था। मैं धीरे से अंदर गई और बोली, “जीजाजी, शांत हो जाओ ना।” वो घूरकर बोले, “तुम चुप बैठो। इसमें बच्ची का क्या काम?” मैं गुस्सा हो गई। “मैं अब बच्ची नहीं हूँ जीजाजी। बड़ी हो गई हूँ, समझे? 20 साल की हूँ मैं।”
जीजाजी ने व्यंग्य से हँसते हुए कहा, “ऐसा है? तो जो मैं तुम्हारी दीदी से चाहता हूँ, वो तू मुझे दे सकती है? बोल, क्या हुआ?” मैंने बहुत सोचा। दिल तेज़ धड़क रहा था, लेकिन दीदी की खातिर मैं बोली, “ओके जीजाजी, चलेगा। लेकिन आप दीदी को कभी नहीं मारेंगे। प्रॉमिस?” जीजाजी की आँखों में चमक आ गई। “नहीं मारूँगा, अगर मेरा काम हो जाता है तो मुझे क्या फर्क पड़ता है।”
जीजाजी उठे और मुझे बेड की तरफ ले गए। कमरे की लाइट डिम थी, और बाहर से दिवाली की लाइट्स की चमक आ रही थी। वो बोले, “चलो अब दिखाओ कि तू बड़ी हो गई है। अपने पूरे कपड़े उतारो।” मैं शरम से लाल हो गई। मेरे हाथ काँप रहे थे, लेकिन मैंने धीरे-धीरे अपनी टी-शर्ट उतारी, फिर जींस, और आखिर में ब्रा और पैंटी भी। अब मैं उनके सामने पूरी तरह नंगी खड़ी थी। मेरा शरीर गोरा और कोमल था, मेरे स्तन भरे हुए और गोल, कमर पतली, और नीचे की तरफ बालों वाली जगह अभी तक अछूती।
जीजाजी की आँखें फटी की फटी रह गईं। वो एकदम से खड़े हो गए और बोले, “वाह, क्या बात है! तू तो एक हसीना है, कोमल कली जैसी। तेरे बूब्स तो तेरी दीदी से भी बड़े और सख्त हैं। क्या कभी पहले किसी के साथ सेक्स किया है?” मैंने शरमाते हुए सिर हिलाया, “नहीं जीजाजी, अब तक किसी मर्द ने मुझे नहीं छुआ। मैं अभी तक वर्जिन हूँ, कच्ची कली। अब आप क्या करने वाले हैं?”
जीजाजी ने जल्दी से अपने कपड़े उतारे। उनका शरीर मजबूत था, छाती चौड़ी, और नीचे उनका लिंग… ओह, वो इतना बड़ा और कड़ा लग रहा था। मैंने कभी ऐसा नहीं देखा था। मैंने पूछा, “जीजाजी, ये क्या है?” वो हँसते हुए बोले, “ये तो सारी फसत की जड़ है। इसे सेक्स की भूख लगी है। अब चल, इसे बुझा।” कहकर वो मेरे पास आ गए।
पहले उन्होंने मुझे अपनी बाहों में दबाया, मेरे होंठों पर चुम्बन किया। उनकी दाढ़ी चुभ रही थी, लेकिन एक अजीब-सी उत्तेजना भी हो रही थी। फिर उन्होंने मेरे स्तनों को जोर से दबाया, निप्पल्स को मसलने लगे। दर्द हुआ, लेकिन साथ में एक मीठा-सा एहसास भी। उनकी उंगली नीचे मेरी योनि में घुसी। मैं जोर से चीखी, “आह… जीजाजी!” मेरी चीख सुनकर दीदी कमरे में आ गईं। “प्लीज़, राखी पर रहम खाइए। वो अभी बच्ची है,” दीदी ने कहा। लेकिन मैं बोली, “नहीं दीदी, जो करना है वो करने दो। उनके अंदर का सेक्स निकल जाने दो। बस आप मेरी मदद करो।”
जीजाजी बोले, “चल, तू इसे बताती चल कि मुझे किस तरह का सेक्स पसंद है। और इसकी मदद कर।” दीदी भी अब राज़ी हो गईं, शायद उन्हें भी कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। दीदी ने मुझे कहा, “पहले तू जीजाजी का लंड हाथ में लेकर मसल। धीरे-धीरे ऊपर-नीचे कर।” मैंने डरते-डरते किया। पहले वो 6 इंच का था, लेकिन मसलते ही वो फूलकर 11 इंच का हो गया, मोटा और गर्म।
दीदी बोली, “देखो राखी, अब सोचो, इतना बड़ा लंड तेरी चूत, मुँह और गांड में डालेगा। दर्द होगा लेकिन बाद में अच्छा लगेगा। मैं भी पहले डरती थी, लेकिन अब एंजॉय करती हूँ।” मुझे अब उत्सुकता हो रही थी। क्या ये सच में अच्छा लगता है?
जीजाजी ने मुझे बेड पर लिटाया। पहले उन्होंने मेरी गांड पर थोड़ा तेल लगाया और धीरे से अपना लिंग अंदर डाला। दर्द इतना तेज़ था कि मैं चीख उठी, आँसू आ गए। लेकिन वो नहीं रुके, धक्के मारते रहे। फिर उन्होंने मुझे चोदा – योनि में प्रवेश किया। खून निकला, क्योंकि मैं वर्जिन थी।
मैं रोने लगी, “आह… दीदी!” दीदी ने मेरा हाथ पकड़ा, “पागल, ये तो पहली बार होता है। आज तू बच्ची से औरत बन गई है, समझी? अब मजा आएगा।” फिर जीजाजी ने मेरे मुँह में अपना लिंग डाला। मैंने चूसना शुरू किया, जैसे दीदी ने बताया। वो इतना गर्म था, जैसे आग लगी हो। मैंने जीभ से चाटा, मुँह में लिया। धीरे-धीरे मुझे भी अच्छा लगने लगा। हम तीनों ने मिलकर रात गुजारी – कभी जीजाजी मुझे चोदते, कभी दीदी निर्देश देतीं। मैंने उन्हें पूरी तरह संतुष्ट किया, और वो खुश होकर सो गए।
सुबह उठी तो शरीर दर्द कर रहा था, लेकिन एक नई ऊर्जा भी थी। दीदी ने नाश्ता बनाया – पराठे, चाय। हम टेबल पर बैठे। नाश्ता करने के बाद मैंने दीदी से कहा, “दीदी, मुझे और भूख लगी है, प्लीज़ कुछ और दो।” जीजाजी हँसे और बोले, “ठहरो, मैं देता हूँ।” वो मेरे पास आए, अपनी पैंट से लिंग निकाला और मेरे मुँह में डाल दिया। “चल साली, इसे चूसो। मज़ा भी आएगा और तुझे मलाई भी मिलेगी।” मैंने खुशी से चूसा, उनका वीर्य पी लिया। वो नमकीन और गर्म था, लेकिन अब मुझे आदत पड़ने लगी थी।
इस तरह दो महीने बीत गए। दीदी की डिलीवरी हो गई – एक प्यारा-सा बेटा हुआ। लेकिन मैं रोज़ जीजाजी से मिलती रही। हर रात नई-नई पोज़िशन ट्राई करते – कभी डॉगी स्टाइल, कभी 69, कभी दीदी भी साथ में शामिल हो जातीं। वो हमें देखतीं, कभी-कभी खुद भी थोड़ा छूतीं। मुझे लगता था कि ये सब मेरी अपनी मर्ज़ी से हो रहा है। शुरू में तो डर था, लेकिन अब मैं इसे एंजॉय करने लगी थी।
जीजाजी का वो बड़ा लंड मुझे हर बार नया सुख देता – कभी दर्द, कभी आनंद। मैं उनकी आधी घरवाली बन गई थी, और घर में अब शांति थी। दीदी खुश थीं, क्योंकि जीजाजी अब उन्हें नहीं मारते थे। लेकिन ये राज़ सिर्फ हम तीनों का था, और रहेगा।
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