Uncategorized

संजना की टाइट चूत और गाण्ड की पूरी कहानी

Bhai ne Pehli Baar Choda – Sanjana ki Tight Choot aur Gaand ki Poori Kahani

18 साल की जवान बहन संजना को भाई राहुल ने कार में गोद में बिठाकर पहली बार चोदा। टाइट चूत फाड़ी, खूब चूसा और अंत में क्रीमपाई किया। पूरी सच्ची-जैसी गंदी इनसेस्ट सेक्स स्टोरी हिंदी में पढ़ें।

हाय, मेरा नाम राहुल है। मैं बी.कॉम फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट हूँ। हमारे छोटे-से परिवार में अब सिर्फ़ तीन लोग बचे हैं—मैं, मेरी छोटी बहन संजना जो मुझसे एक साल छोटी है और अभी-अभी अठारह की हुई है, और पापा जो रेलवे में ड्राइवर हैं और महीने में मुश्किल से दस दिन घर आ पाते हैं। दो साल पहले मम्मी का हार्ट अटैक से अचानक देहांत हो गया था।

पापा उस सदमे से कभी उबर नहीं पाए। वो हमें रिश्तेदारों के पास भेजना चाहते थे, लेकिन हम दोनों की ज़िद के आगे हार मान ली। मैंने वादा किया था कि संजना का पूरा-पूरा ख़याल रखूँगा… हर तरह से।

संजना और मेरा रिश्ता हमेशा से कुछ ख़ास था। हम एक-दूसरे के सबसे करीब थे। वो जहाँ घूमना चाहे, मैं ले जाता। जो माँगे, देने की कोशिश करता। मेरी एक गर्लफ्रेंड भी थी, पर जून में ब्रेकअप हो गया। अब घर में सिर्फ़ हम दोनों। दिन-रात एक-दूसरे के साथ।

संजना… उफ़्फ़! अठारह साल की उम्र में वो किसी सपनों की परी से कम नहीं लगती। गेहुँआ रंग, लंबी तेज़ नाक, बोलती हुई काली आँखें, रसीले गुलाबी होंठ, मनमोहक मुस्कान और वो लंबे घने बाल जो नागिन की तरह उसकी गोल-मटोल भरी हुई गांड तक लहराते हैं। उसकी जवानी रस से भरी हुई थी—34D के भरे-भरे बोब्स, पतली कमर, चौड़ी कमरिया और वो चाल जिसे देखकर रास्ते के सारे मर्द घूरते रहते।

पिछले एक साल में उसके स्तन नारंगी से छोटे-छोटे तरबूज बन गए थे। कॉलेज के लड़के से लेकर मोहल्ले के बुड्ढे तक उसकी जवानी में डूब जाना चाहते थे। संजना ये सब जानती थी, इसलिए बाहर बहुत संभलकर रहती थी, पर घर में मेरे सामने बिल्कुल बेपरवाह।

एक सितंबर की शाम हम कॉलेज से बहुत थके हुए लौटे। बिना कपड़े बदले ही बेड पर ढेर हो गए और पता नहीं कब गहरी नींद लग गई। मेरी नींद शाम सात बजकर चालीस मिनट पर टूटी। संजना मेरे बगल में सो रही थी। उसका डीप नेक टॉप की वजह से उसकी आधी छाती बाहर झांक रही थी—गोरे-गोरे भरे हुए बोब्स, गुलाबी निप्पल हल्के से दिख रहे थे।

पहली बार मैं उसे बहन की नज़र से नहीं, मर्द की नज़र से देख रहा था। लंड तुरंत तन गया। दिल कर रहा था कि उन्हें पकड़कर मसल दूँ, निप्पल मुंह में लेकर चूस लूँ।

दिमाग़ और धैर्य दोनों साथ छोड़ रहे थे। मैंने सोचा—बस एक बार छू ही लूँ। मैं वैसे ही लेटा रहा और सोते हुए का नाटक करते हुए अपना हाथ उसकी छाती पर रख दिया। उसने कोई हरकत नहीं की। हौसला बढ़ा। करवट बदलने के बहाने हल्के से दबाया। उसके मुंह से हल्की-सी “आह्ह…” निकली और वो उठ गई। उसने धीरे से मेरा हाथ हटाया, बाथरूम गई, फ्रेश होकर आई और बोली, “राहुल, खाना नहीं खायेगा?”

मैंने आँखें बंद रखीं, सोने का नाटक किया। वो फिर बोली, “राहुल उठो ना… मुझे बहुत भूख लगी है।”

रात के आठ बज चुके थे, घर में कुछ बनाने को नहीं था। मैंने अनसुना कर दिया। वो मुझे हिलाकर बोली, “घर में कुछ है ही नहीं… चलो बाहर चलते हैं।”

मैं उठकर बैठ गया। संजना ने ब्लैक कलर का टाइट सलवार-सूट पहना था—उसके भरे हुए कूल्हे और बोब्स साफ़ उभरे हुए थे। मुझे लगा आज कुछ मज़ा लिया जाए। उसे कार चलानी नहीं आती थी।

मैंने कहा, “बाइक से चलते हैं, कार का मन नहीं।”

वो बोली, “नहीं, आज मैं कार चलाऊँगी। थोड़ा-बहुत आता है।”

मैं हँसकर बोला, “तुमसे तो हुई नहीं जाएगी, रात का टाइम है, कहीं ट्रक से टकरा गए तो?”

वो मुस्कुराई, “ठीक है… लेकिन कल से सिखाओगे ना?”

हम बाइक पर निकले। मैं जान-बूझकर तेज़ चलाता और बार-बार अचानक ब्रेक मारता ताकि उसके मुलायम भरे हुए बोब्स मेरी पीठ से टकराएँ। हर बार टक्कर लगती, मेरे लंड में करंट-सा दौड़ जाता। रेस्टोरेंट में खाना खाया, घर लौटे और सो गए।

सुबह पाँच बजे संजना मुझे जगाने आई, “चलो कार सिखाओ!”

मैंने ट्रैक सूट पहना—अंडरवियर जान-बूझकर नहीं पहना। संजना भी ग्रे कलर का टाइट ट्रैक सूट पहने आई। उसकी गांड और बोब्स का शेप साफ़ दिख रहा था। मैंने उसे ड्राइविंग सीट पर बिठाया। कई बार गाड़ी बंद हुई। एक बार उसने क्लच की जगह एक्सीलरेटर दबा दिया, गाड़ी ज़ोर से झटका खाकर भागी। मैंने उसका हाथ पकड़कर हैंडब्रेक खींचा। वो डर गई। मैंने कहा, “एक मिनट, उठो।”

वो उठी, मैं ड्राइवर सीट पर बैठ गया और बोला, “आओ मेरी गोद में बैठो। तुम एक्सीलरेटर, गियर, स्टीयरिंग संभालो, मैं क्लच-ब्रेक देख लूँगा।”

वो हिचकिचाई, फिर शरमाते हुए मेरी गोद में बैठ गई। मेरा लंड बिना अंडरवियर के सीधा उसकी गांड की दरार में घुस गया। गाड़ी चली। थोड़ी देर में वो सहज हो गई। बीच-बीच में खुद को एडजस्ट करती तो मेरे लंड पर घर्षण होता, वो पत्थर-सा खड़ा हो गया। मेरी गर्म साँसें उसकी गर्दन पर पड़ रही थीं। मैं स्टीयरिंग के बहाने उसके बायें बोब को हल्के से छूने लगा। संजना ने कुछ नहीं कहा। उल्टा वो खुद अपनी गांड मेरे लंड पर दबाने लगी। मुझे हरी झंडी मिल गई।

मैंने हाथ फिसलाकर उसके दोनों बोब्स जोर से पकड़ लिए। वो सिहर गई, पर रोका नहीं। मैंने उसकी गर्दन पर किस किया। वो आह भरी और बोली, “राहुल… मत करो ना…” लेकिन आवाज़ में मना करने की बजाय न्योता था।

हम घर के गैरेज में पहुँच चुके थे। मैंने सीट पूरी पीछे कर दी। उसका ट्रैक पैंट नीचे सरका दिया। अब वो सिर्फ़ पिंक पैंटी और टॉप में थी। मैंने टॉप भी ऊपर उठाकर उतार दिया। उसके गुलाबी निप्पल्स पूरी तरह खड़े थे। मैंने झुककर एक निप्पल मुंह में लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। वो तड़प उठी, “उम्म्म… राहुल्ल्ल… आह्ह्ह… कितना अच्छा लग रहा है…”

मैंने उसकी पैंटी भी उतार दी। उसकी चूत एकदम चिकनी और गीली थी, रस टपक रहा था। मैंने अपनी ट्रैक पैंट नीचे की और अपना सात इंच का मोटा लंड बाहर निकाला। वो उसे देखकर डर भी गई और ललचा भी गई।

मैंने उसे कार से उतारकर घर के अंदर सोफे पर लिटाया। उसकी टांगें फैलाईं और चूत पर जीभ फेरते हुए चाटने लगा। वो पागलों की तरह तड़पने लगी, “आह्ह… राहुल… क्या कर रहे हो… ओह्ह गॉड… चूसो… और चूसो…” उसकी कमर ऊपर उठने लगी। मैंने उसका सारा रस पी गया। फिर लंड उसकी चूत पर रखा और धीरे-धीरे अंदर सरकाने लगा। वो पहली बार थी, बहुत टाइट थी। वो दर्द से चीखी, “आह्ह… राहुल धीरे… फट जाएगी… बहुत दर्द हो रहा है…”

मैं रुका नहीं। उसके होंठ चूसते हुए, बोब्स मसलते हुए एक ज़ोर का धक्का मारा—पूरा लंड अंदर चला गया। वो ज़ोर से चीखी, उसकी आँखों में आँसू आ गए, लेकिन उसने मुझे कसकर पकड़ रखा था। मैंने धीरे-धीरे हिलना शुरू किया। थोड़ी देर बाद दर्द कम हुआ और वो खुद कमर हिलाने लगी।

“राहुल… आह्ह… और ज़ोर से… फाड़ दो मुझे… fuck me harder राहुल… भर दो अपनी बहन की चूत…” वो अंग्रेजी में चिल्ला रही थी, आँखें बंद, मुँह से सिर्फ़ मदहोश आवाज़ें। मैंने स्पीड बढ़ा दी। चोप-चोप-चोप की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। वो मुझे कसकर जकड़ रही थी, नाख़ून मेरी पीठ में गड़ रहे थे।

“राहुल… मैं झड़ने वाली हूँ… आह्ह्ह्ह… आ रही हूँ…” उसकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया, वो झड़ गई। मैं भी नहीं रुका। दस-पंद्रह ज़ोर के धक्कों बाद मैंने कहा, “संजना… मैं भी आने वाला हूँ…”

वो कुछ नहीं बोली, बस मुझे और कसकर किस करने लगी और अपनी गांड ऊपर उठाकर हिलाने लगी। मैंने उसकी चूत के सबसे अंदर तक सारा गर्म वीर्य उड़ेल दिया। हम दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे की बाहों में लिपटकर हाँफते रहे।

उस दिन के बाद हमारा रिश्ता हमेशा के लिए बदल गया। अब हर सुबह, हर रात, खाना बनाने से पहले, नहाने के बाद, कभी भी, कहीं भी—हम एक-दूसरे के हो जाते हैं। जिस दिन ये कहानी लिख रहा हूँ, संजना के पीरियड्स चल रहे हैं… पर वो मुझे मना नहीं कर रही। बस शरमाते हुए बोली, “आज पीछे से डालो ना… गांड मारो मेरी…”

Share this Post :








Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button