Uncategorized

मेरी चुदाई का चक्रव्यूह – मेरी सील टूटी

Virgin Sex Story: यह कहानी द ट्रैप श्रृंखला का हिस्सा है।

कहानी की मुख्य पात्र वैष्णवी थी, जो 18 साल की एक आकर्षक युवती थी। उसका फिगर 34-26-34 था। वह देखने में बेहद आकर्षक थी, और स्कूल में जब भी स्कर्ट पहनकर जाती थी, तो लड़कों की नजरें उसकी गोरी चिकनी टांगों पर टिक जाती थीं।

वैष्णवी 11वीं कक्षा में पढ़ती थी। उसकी केवल एक दोस्त थी, शिविका, जिसके साथ वह अपनी हर बात साझा करती थी। वैसे शिविका भी बहुत खूबसूरत थी। उसकी लंबाई अच्छी होने के कारण उसकी टांगें भी बेहद आकर्षक लगती थीं। शिविका भी हमेशा छोटी स्कर्ट पहनती थी, जैसे वैष्णवी पहनती थी।

वैष्णवी बहुत सीधी-सादी लड़की थी और उसे सेक्स के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। शिविका और उसके बीच भी कभी ऐसी बातें नहीं होती थीं।

एक दिन, एक लड़के ने वैष्णवी को प्रपोज किया। वह लड़का अतुल नाम का था, जो उनकी ही कक्षा का था और एक गुंडा किस्म का था। वैष्णवी ने उसे साफ-साफ मना कर दिया।

इसके बाद अतुल उसका पीछा करने लगा। वैष्णवी ने गुस्से में आकर उसे थप्पड़ मार दिया। उसे नहीं पता था कि यह उसकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी गलती साबित होगी।

थप्पड़ खाने के बाद अतुल वहां से चला गया। उसी दिन छुट्टी के समय शिविका ने वैष्णवी को आकर कहा, “अतुल सुसाइड करने जा रहा है, अपने फार्महाउस पर।”

यह सुनकर वैष्णवी को झटका लगा। वह काफी देर तक सोचती रही कि अब उसे क्या करना चाहिए। तभी शिविका ने उससे कहा, “चल, अभी मेरे साथ स्कूटर पर।”

वैष्णवी को कुछ समझ नहीं आया, लेकिन उसने शिविका की बात मान ली। वह स्कूटर पर बैठ गई। स्कूटर पर हवा उसकी स्कर्ट को उड़ा रही थी, लेकिन उसका ध्यान केवल अतुल की तरफ था। शिविका ने उसके कान में कहा, “तेरी पैंटी दिख रही है।”

वैष्णवी ने उसकी बात सुनकर जल्दी से अपनी स्कर्ट ठीक कर ली।

वे दोनों शहर से काफी दूर अतुल के फार्महाउस पहुंच गईं। वहां आसपास कोई घर नहीं था। वे अंदर गईं, तो देखा कि अतुल के कमरे के बाहर उसके दोस्त खड़े थे और अतुल ने अंदर से दरवाजा बंद कर रखा था।

वैष्णवी ने दरवाजे के पास जाकर कहा, “अतुल, प्लीज बाहर आ जाओ।”

अतुल ने अंदर से जवाब दिया, “क्या करूं बाहर आकर?”

वैष्णवी के मुंह से अनजाने में निकल गया, “जो भी तुम कहोगे, मैं वो करने को तैयार हूं।”

यह उसकी ज़िंदगी की दूसरी सबसे बड़ी गलती थी।

अतुल यह सुनकर बाहर आया और बोला, “तुमने कहा कि तुम कुछ भी करोगी।”

वैष्णवी ने कहा, “हां, जो तुम कहोगे, वो करूंगी। लेकिन पहले तुम ये ज़हर की बोतल फेंक दो।”

अतुल ने कहा, “ठीक है, लेकिन फिर नंगी हो जाओ।”

वैष्णवी यह सुनकर चौंक गई और बोली, “क्या?”

अतुल ने दोहराया, “सुनाई नहीं देता क्या? नंगी हो जाओ।”

वैष्णवी ने कहा, “जो तुम कह रहे हो, वो मुझसे नहीं होगा।”

अतुल ने जवाब दिया, “ठीक है, फिर मैं ज़हर पी लेता हूं।”

उसके दोस्त और शिविका चुपचाप खड़े यह सब देख रहे थे। अतुल ने शिविका की तरफ देखा और कहा, “शिविका, मैंने कुछ गलत कहा क्या इसे?”

शिविका ने जवाब दिया, “नहीं, तुम अपनी जगह सही हो।”

शिविका के मुंह से यह सुनकर वैष्णवी को दोहरा झटका लगा। वह सोचने लगी कि शिविका ऐसा कैसे कह सकती है। उसने कहा, “अगर ऐसा है, तो तू इसे करके दिखा अतुल।”

अतुल बोला, “यह कौन सी बड़ी बात है? मैं अभी इसे नंगी कर देता हूं। चल, शिविका, तू नंगी हो जा।”

शिविका ने बिना कुछ कहे अपने कपड़े उतार दिए और सबके सामने नंगी हो गई। वैष्णवी को बहुत शर्म आई, लेकिन उसे यह भी महसूस हुआ कि शिविका को ज़रा भी शर्म नहीं आ रही थी। वह सोच रही थी कि शिविका इतनी आसानी से सबके सामने रंडी की तरह नंगी कैसे हो सकती है।

काफी कहने-सुनने के बाद वैष्णवी को भी लगने लगा कि उसे भी अब नंगी हो जाना चाहिए। उसने एक-एक करके अपने सारे कपड़े उतार दिए। पहले उसने अपनी शर्ट उतारी, फिर स्कर्ट, और फिर ब्रा और पैंटी। अब वह दस लड़कों के सामने पूरी तरह नंगी खड़ी थी।

वह बहुत शर्मिंदगी महसूस कर रही थी। तभी अतुल ने अपनी ज़िप खोली और अपना लंड बाहर निकालते हुए बोला, “चल, अब इसे चूस।”

वैष्णवी ने मना कर दिया, तो अतुल ने फिर से वही चाल चली, जैसे उसने शिविका के साथ की थी। उसने वैष्णवी को झुकने पर मजबूर कर दिया। वैष्णवी पहली बार लंड देख रही थी और उसे चूस रही थी। लंड का स्वाद उसे बेहद बुरा लग रहा था। उसे उल्टी जैसा महसूस होने लगा था।

लेकिन उसने खुद को किसी तरह संभाला। अतुल कभी-कभी अपना लंड और अंदर डाल देता, जिससे वह उसके गले तक पहुंच जाता। इस पर वैष्णवी को सचमुच उल्टी हो गई। अतुल ने उसे पानी दिया, लेकिन वह पानी नहीं था, उसमें उसने शराब मिलाई थी।

वैष्णवी को अजीब लगा, लेकिन उसने फिर भी पानी पी लिया। शराब का नशा धीरे-धीरे उस पर चढ़ने लगा। अतुल अब पूरी तरह नंगा हो गया और वैष्णवी को किस करने लगा। शराब के असर से वैष्णवी धीरे-धीरे मदहोश होने लगी थी।

इस दौरान, बाकी लड़के भी नंगे हो गए और वैष्णवी के पास आ गए। कोई उसके निप्पल चूस रहा था, कोई उसके स्तनों को मसल रहा था, तो कोई उसकी चूत और गांड में उंगलियां डाल रहा था।

थोड़ी ही देर में वैष्णवी की चूत ने भी अपना पानी निकालना शुरू कर दिया। उसे ऐसा मजा पहले कभी नहीं आया था। तभी अतुल ने उसे उठाया और टेबल पर लिटा दिया। उसने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और रगड़ने लगा। फिर एक ही झटके में उसने पूरा लंड अंदर डाल दिया।

Gangbang sex story

वैष्णवी के मुंह से दर्द से चीख निकल पड़ी। “आह्ह्ह… उफ्फ… उई मां!” वह चिल्लाते हुए बोली, “मम्मी, प्लीज़ इसे निकालो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है।”

यह सुनकर बाकी लड़के हंसने लगे और बोले, “साली, अभी तो तेरी सील ही तोड़ी है। अब देख, तुझे कितना मजा आएगा।”

जब अतुल ने लंड उसकी चूत से निकाला, तो उसकी चूत से खून निकल रहा था। वैष्णवी डर गई, लेकिन वहां उसकी सुनने वाला कोई नहीं था।

अतुल पीछे हट गया और उसकी जगह राहुल आया। उसने अपना लंड वैष्णवी की चूत में डाल दिया। शुरुआत में उसे दर्द हुआ, लेकिन जैसे-जैसे राहुल ने धक्के मारना शुरू किया, वैष्णवी को भी मजा आने लगा। अब वह खुद को संभाल नहीं पा रही थी।

उसने दोनों हाथों से दो लड़कों के लंड पकड़ लिए और उन्हें सहलाने लगी। फिर एक लंड को अपने मुंह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगी।

सब लड़के बारी-बारी से उसकी चूत मार रहे थे। तभी फिर से अतुल वापस आया। उसने अपने लंड पर तेल लगाया और वैष्णवी के पास आया। उसने कहा, “घोड़ी बन जा।”

जैसे ही वैष्णवी घोड़ी बनी, अतुल ने बिना उसकी परवाह किए अपना मोटा लंड एक ही झटके में उसकी गांड में डाल दिया।

वैष्णवी चीख पड़ी, “हाय राम, मैं मर गई! मम्मी, बचाओ मुझे! आह्ह… आह्ह… प्लीज, इसे निकालो मेरी गांड से।”

लेकिन उसकी चीख-पुकार का किसी पर कोई असर नहीं हुआ। वहां उसकी सुनने वाला कोई नहीं था।

इसी दौरान वैष्णवी ने देखा कि शिविका उसकी वीडियो बना रही थी। यह देखकर वैष्णवी को गुस्सा आया और उसने समझ लिया कि यह सब एक योजना थी उसे चोदने के लिए। उसने खड़े होकर शिविका को थप्पड़ मारने की कोशिश की, लेकिन तभी अतुल ने उसे पीछे से पकड़ लिया।

उसने फिर से अपना लंड उसकी गांड में डालते हुए कहा, “बहन की लोडी, वो मेरी रंडी है। अगर तूने उसकी तरफ आंख भी उठाई, तो मैं तेरा गला काट दूंगा।”

इसके बाद अतुल उसे खड़े-खड़े जोर-जोर से चोदने लगा।

अतुल जोर-जोर से वैष्णवी को खड़े-खड़े चोद रहा था। वैष्णवी, जो दर्द और गुस्से से भरी थी, अब धीरे-धीरे गांड चुदाई का भी मजा लेने लगी थी।

काफी देर तक ऐसे चुदाई के बाद सागर उसकी तरफ आया। उसने वैष्णवी को पकड़कर सोफे पर अपने ऊपर बैठा लिया। सागर उसके बूब्स को चूस रहा था और नीचे से उसने अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया।

तभी पीछे से राहुल आया और उसने वैष्णवी की गांड में अपना लंड डाल दिया। अब वैष्णवी की चूत और गांड, दोनों में लंड थे। दोनों मिलकर उसे चोद रहे थे।

वैष्णवी को अब खुद भी जोश आ गया था। वह चिल्लाई, “आह्ह… आह्ह… और जोर से चोड़ो! मेरी गांड और चूत दोनों फाड़ दो और मेरे हाथ में दे दो।”

इतने में अतुल वापस आया और उसने वैष्णवी के खाली मुंह को अपने लंड से भर दिया। अब वैष्णवी के तीनों होल—चूत, गांड, और मुंह—तीनों में लंड थे। वह तीनों होल से चुद रही थी।

उसी वक्त वैष्णवी की नजर शिविका पर पड़ी। उसने देखा कि शिविका खुद भी चार लड़कों से चुद रही थी।

करीब दो घंटे तक लगातार चुदाई के बाद उन सभी लड़कों के लंड का पानी वैष्णवी के पूरे शरीर पर फैला हुआ था। उसका चेहरा, बूब्स, चूत, और गांड—सब जगह लंड का पानी था। वह पूरी तरह थक चुकी थी और सो गई।

जब उसकी आंख खुली, तो उसने महसूस किया कि उसका चेहरा चिपचिपा हो रखा था। उसने उठने की कोशिश की, लेकिन उठ नहीं पाई।

शिविका ने उसे पकड़कर बाथरूम में ले गई। वहां उसने वैष्णवी को गर्म पानी से नहलाया। नहाने के बाद शिविका ने उसे कुछ कपड़े पहनने के लिए दिए, लेकिन वे कपड़े बहुत छोटे थे।

वैष्णवी ने शिविका से अपने कपड़ों के बारे में पूछा, तो शिविका ने कहा, “बहन, तेरे सारे कपड़े तो इन कुत्तों ने कब के फाड़ दिए हैं।”

वैष्णवी ने बिना ब्रा और पैंटी के केवल टी-शर्ट और स्कर्ट पहन ली और घर की तरफ निकल गई। रास्ते में सभी लोग उसके बूब्स और नंगी टांगों को घूर रहे थे।

घर पहुंचकर वैष्णवी ने दी गई दवाइयां खाईं और सो गई।

इस तरह, यह थी वैष्णवी के पहले सेक्स की कहानी। उसने अपनी आपबीती में बताया कि कैसे वह ब्लैकमेलिंग का शिकार हुई और अगली बार उसे पूरे स्कूल के सामने नंगा होना पड़ा।

The post मेरी चुदाई का चक्रव्यूह – मेरी सील टूटी appeared first on The Indian Sex Story.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button