छोटी साली प्रिया की पहली चुदाई – जीजू ने कुंवारी साली को खूब चोदा
Choti Saali Priya Ki Pahli Chudai – Jiju Ne Kunwari Saali Ko Khoob Choda
जीजू की नजर अपनी 18 साल की छोटी साली प्रिया पर पड़ते ही बिगड़ गई। कुंवारी, गोरी, 38 साइज के बड़े-बड़े बूब्स वाली प्रिया को जीजू ने पहले छुपकर देखा, फिर किस किया, चूसा और आखिर में उसकी टाइट चूत फाड़कर खूब चोदा। चार बार चुदाई, घोड़ी स्टाइल, पीछे से और ऊपर चढ़कर – पूरी रात मजे! सबसे हॉट हिंदी सालि-जीजू सेक्स स्टोरी।
हाय दोस्तों, मेरा नाम अनुज है। उम्र 30 साल, दिल्ली में रहता हूँ और एक अच्छी जॉब करता हूँ। मेरी शादी एक साल पहले कानपुर की रहने वाली शिप्रा से हुई थी। शिप्रा की दो बड़ी बहनें हैं – कंचन (32) और प्रीति (28), दो छोटी कुंवारी बहनें – कामिनी (20) और प्रिया (18), और एक छोटा भाई अरुण जो दिल्ली के हॉस्टल में पढ़ता है।
भगवान जब देते हैं तो छप्पर फाड़कर देते हैं – मुझे तीन साली मिलीं और वो भी एक से बढ़कर एक हॉट। शिप्रा की सभी बहनों में प्रिया सबसे ज्यादा सुंदर और सेक्सी लगती थी। उसकी फिगर 38-26-38, गोरी त्वचा, गोल-गोल बड़े boobs, और वो मासूम सी स्माइल… देखते ही मन डोल जाता था। शादी से पहले मैंने कभी किसी लड़की को छुआ तक नहीं था, लेकिन शादी के बाद तो जैसे स्वर्ग मिल गया।
कुछ महीने पहले की बात है। शिप्रा अपनी मम्मी से फोन पर बात कर रही थी। मम्मी ने कहा कि रिश्ते में एक जरूरी शादी है, लेकिन घर पर कोई नहीं है और शहर में चोरियां बहुत हो रही हैं, इसलिए शायद न जाएं। शिप्रा ने पूछा कि शादी कब है, तो पता चला कि चार दिन बाद, रविवार को। शिप्रा ने कहा, “मम्मी, अनुज की छुट्टी है शनिवार-रविवार की, हम लोग आ जाएंगे।” मम्मी ने मना किया कि तकलीफ होगी, लेकिन शिप्रा ने कहा, “कोई बात नहीं, हम आ रहे हैं।”
हम लोग शुक्रवार रात को कानपुर पहुंच गए। रात को ही सास-ससुर, कामिनी और अरुण को ट्रेन से शादी में जाना था। प्रिया नहीं जा रही थी। मैंने पूछा, “तुम क्यों नहीं जा रही?” वो शरमाते हुए बोली, “मन नहीं है जीजू… और वैसे भी आप लोगों की सेवा कौन करेगा?” वो मुस्कुराई और उसकी आंखों में कुछ शरारत सी झलक रही थी।
रात को एक बजे सब निकल गए। घर पर सिर्फ मैं, शिप्रा और प्रिया बचे। हम तीनों एक ही रूम में सोए। रात तीन बजे मेरी नींद खुली। टॉयलेट करके आया तो देखा – प्रिया का टॉप थोड़ा ऊपर हो गया था और उसके एक बड़े, गोल बोबे का आधे से ज्यादा हिस्सा दिख रहा था। गुलाबी निप्पल साफ झलक रहे थे। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। दोनों गहरी नींद में थीं। मैंने सोचा, बस हल्के से छूकर देखूं।
कांपते हाथ से मैंने उसके बोबे पर उंगली फेरी। इतने सॉफ्ट, इतने टाइट… एकदम परफेक्ट 38 साइज। वो हल्के से करवट बदली, लेकिन जागी नहीं। उसकी सांसें तेज हो रही थीं। मैंने धीरे से उसका टॉप ठीक किया और सोने की कोशिश की, लेकिन नींद कहां आ रही थी।
सुबह मैं देर से उठा। शिप्रा चाय लेकर आई। मैंने पूछा, “प्रिया कहां है?” वो बोली, “ऊपर छत वाले रूम में पढ़ रही होगी।” नहाकर मैं छत पर कपड़े सुखाने गया। प्रिया कंप्यूटर पर बैठी थी, इतनी मग्न कि मेरी आवाज भी नहीं सुन रही। जब मैं पास गया तो उसने जल्दी से विंडो बंद कर दी। मैं समझ गया – कुछ नॉटी देख रही थी। वो हड़बड़ाते हुए बोली, “जीजू… आप?”
मैं मुस्कुराया और उसके पास बैठ गया। बोली, “मुझे नहाना है।” लेकिन उसकी आंखों में शरारत थी। मैंने कहा, “थोड़ा रुक जाओ ना… क्या देख रही थी?” वो शरमा गई, गाल लाल हो गए। मैंने कंप्यूटर पर रीसेंट हिस्ट्री चेक की (वो गई थी नहाने) – पूरी पोर्न साइट्स और कुछ हॉट क्लिप्स। मैंने मुस्कुराते हुए सोचा, छोटी साली तो बहुत गरम माल है।
दोपहर में शिप्रा सो गई। प्रिया फिर ऊपर छत वाले रूम में चली गई। मैं चुपके से ऊपर गया और दरवाजा थोड़ा खोलकर देखा। वो पजामी नीचे करके अपनी चूत को सहला रही थी। उसकी उंगलियां गीली चूत पर फिर रही थीं, दूसरे हाथ से अपने बड़े बोब्स दबा रही थी। मुंह से हल्की-हल्की सिसकारियां निकल रही थीं – “उम्म्म… आह्ह्ह…”
मेरा लंड पैंट फाड़कर बाहर आने को बेकरार था। मैं धीरे से अंदर गया और उसके पीछे खड़ा हो गया। वो चौंकी, लेकिन डरने की बजाय शरमाते हुए मुस्कुराई। उसने पजामी ऊपर की, लेकिन आंखें नीची कर लीं। मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा और कान में फुसफुसाया, “प्रिया… इतना गरम माल अकेले में वेस्ट कर रही हो? मुझे भी तो शेयर करो…”
वो शरमाई, लेकिन बोली, “जीजू… आप देख रहे थे?” मैंने उसकी कमर में हाथ डाला और बोला, “देखा तो सही… कितनी हॉट है मेरी छोटी साली।” वो सांसें तेज लेने लगी। मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। वो पहले हिचकिचाई, फिर पूरा साथ देने लगी। उसकी जीभ मेरी जीभ से खेलने लगी। मेरा एक हाथ उसके बोब्स पर, दूसरा उसकी गांड पर फिरने लगा।
वो सिसकारी, “जीजू… दीदी जग गईं तो?” मैंने कहा, “सो रही हैं… बस थोड़ा मज़ा ले लें।” उसने सहमति में सिर हिलाया और मेरे सीने पर सिर रख दिया। मैंने उसका टॉप ऊपर किया और ब्रा के ऊपर से उसके बड़े, टाइट बोब्स दबाने लगा। निप्पल्स इतने हार्ड हो गए थे कि ब्रा से बाहर आने को थे।
धीरे से मैंने ब्रा खोली। वो शरम से आंखें बंद कर रही थी, लेकिन मुस्कुरा भी रही थी। उसके गोल, गुलाबी बोब्स देखकर मैं पागल हो गया। मैंने एक बोबा मुंह में लिया और चूसने लगा। वो सिसकारियां लेने लगी – “आह्ह्ह… जीजू… कितना अच्छा लग रहा है…” मैंने दोनों बोब्स को अच्छे से चाटा, चूसा, काटा। दस मिनट तक उसकी छाती से खेलता रहा।
फिर मैं नीचे आया। उसकी पजामी और पैंटी उतार दी। उसकी चूत पर हल्के-हल्के सिल्की बाल थे, एकदम गुलाबी और गीली। मैंने मुंह लगा दिया। वो चौंकी, लेकिन फिर कमर उठाकर मेरे मुंह पर चूत दबाने लगी। मेरी जीभ उसकी क्लिट पर खेल रही थी, अंदर-बाहर कर रही थी। वो पागल हो रही थी – “जीजू… आह्ह्ह… बहुत मज़ा आ रहा है… और जोर से…”
उसने मेरे सिर को अपनी जांघों से जकड़ लिया। उसकी चूत से रस की बूंदें निकल रही थीं, मैं सब पी गया। फिर मैं ऊपर आया और अपना लंड उसके मुंह के पास ले गया। वो शरमाई, लेकिन फिर उत्साह से चूसने लगी। उसकी गर्म जीभ मेरे लंड पर फिर रही थी। मैंने उससे कहा, “प्रिया… मुझे तुम्हारी टाइट कुंवारी चूत चाहिए।”
वो पहले डरी, बोली, “जीजू… दर्द होगा… मैं वर्जिन हूँ।” मैंने उसे प्यार से समझाया, “धीरे-धीरे करेंगे… तुम्हें बहुत मज़ा आएगा।” वो मुस्कुराई और बोली, “ठीक है जीजू… लेकिन आराम से… मैं तैयार हूँ।”
मैंने अपना मोटा लंड उसकी गीली चूत पर रखा और धीरे-धीरे अंदर किया। पहले सिर्फ टॉप गया, वो सिसकारी – “आह्ह्ह… दर्द… लेकिन अच्छा भी…” मैं रुका, फिर धीरे-धीरे पूरा अंदर कर दिया। उसकी सील टूटी, थोड़ा रस निकला, लेकिन वो अब मज़े में थी। वो कमर उठा-उठाकर मेरा साथ देने लगी।
“जीजू… जोर से… और तेज… आह्ह्ह… कितना अच्छा लग रहा है!” उसकी चूत इतनी टाइट थी कि हर धक्के में पच्छ-पच्छ की आवाज आ रही थी। हम दोनों पसीने से भीग गए। वो झड़ गई, मैं भी उसके अंदर झड़ गया।
उस रात मैंने उसे चार बार चोदा – एक बार घोड़ी बनाकर, एक बार वो ऊपर, एक बार पीछे से। उसकी गांड का दरवाजा भी खोल दिया। वो पूरी तरह मेरी हो गई थी। सुबह चार बजे तक हम जागते रहे, एक-दूसरे को किस करते, सहलाते।
अगले तीन दिन जब भी मौका मिला, शिप्रा से छुपाकर मैंने प्रिया को खूब चोदा। दिन में, रात में… वो अब खुद मुझसे चिपक जाती थी। तीन दिन बाद सब लौट आए और हम दिल्ली आ गए। लेकिन अब भी जब मौका मिलता है, प्रिया और मैं खूब मज़े लेते हैं।
कैसी लगी कहानी दोस्तों? कमेंट जरूर करना!
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