बाथरूम में मुठ मारते पकड़ा तो दीदी ने भाई से चुदवाई
Bathroom Mein Muth Marte Pakda To Didi Ne Bhai Se Chudayi Karwayi – Garma Garam Incest Sex Story
नेहा की सच्ची कहानी – मम्मी-पापा के बाहर जाने पर छोटा भाई संजय और दीदी अकेले घर में। एक हॉट मूवी सीन से शुरू हुई आग, बाथरूम में पकड़ा गया मुठ मारता भाई, फिर किस, चूसना, हनी-चॉकलेट वाली बॉडी वरशिप और पहली ज़ोरदार चुदाई। वर्जिन चूत फटी, खून निकला, लेकिन मज़ा इतना कि अब रोज़ चुदाई करते हैं। पूरी इनसेस्ट सेक्स स्टोरी हिंदी में।
हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम नेहा है। मैं जोधपुर में रहती हूँ। मैंने ढेर सारी सेक्स स्टोरीज़ पढ़ी हैं, और ब्रदर-सीस्टर वाली मुझे सबसे ज्यादा गरम कर देती हैं। उन्हें पढ़ते ही मेरी चूत गीली हो जाती है, उँगलियाँ अपने आप अंदर जाने को बेताब हो जाती हैं।
मैं आपको बताती हूँ – उम्र 20 साल, फिगर एकदम टाइट… बड़े-बड़े बूब्स, कमर पतली, और गांड ऐसी कि कोई भी देखे तो लंड खड़ा हो जाए। घर में मम्मी-पापा और मेरा छोटा भाई संजय (19 साल)। हम दोनों सुपर फ्रैंक हैं – सेक्स टॉक्स से लेकर पर्सनल फैंटसीज़ तक, सब शेयर करते हैं। कभी-कभी मजाक में एक-दूसरे को छू लेते हैं, लेकिन वो छूना अब तक बस खेल था… जब तक वो रात नहीं आई।
ये स्टोरी चार महीने पहले की है – पूरी तरह सच्ची।
पापा के फ्रेंड के बेटे की शादी थी दूसरे शहर में। मैं स्टडीज़ की वजह से नहीं जा सकी, तो संजय को भी मेरे साथ घर पर रोक लिया गया। मम्मी-पापा चले गए, तीन दिन अकेले हम दोनों।
अगले दिन हम लिविंग रूम में मूवी देख रहे थे। अचानक स्क्रीन पर हॉट सीन – हीरो-हीरोइन एक-दूसरे को पागलों की तरह किस कर रहे थे, कपड़े उतार रहे थे, बॉडीज़ रगड़ रही थीं। मेरी साँसें तेज़ हो गईं, चूत में सनसनी सी दौड़ गई।
मैं शर्मा कर चैनल बदलने लगी, लेकिन संजय ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोला, “दीदी, छोड़ो ना… मज़ा आ रहा है।” उसकी आँखों में वो चमक थी जो मैंने पहले कभी नहीं देखी। मैंने मुस्कुरा कर वही मूवी चला दी।
सीन देखते हुए मैंने महसूस किया कि संजय की नज़रें मुझ पर भी हैं – मेरे बूब्स पर, मेरी जाँघों पर। सीन खत्म होते ही वो उठा और चला गया, लेकिन मेरी हालत खराब थी। चूत इतनी गीली कि पैंटी तर हो चुकी थी। मैंने उंगली करने का सोचा, लेकिन संजय के आने का डर था तो रुक गई।
पाँच मिनट बीते, वो नहीं आया। मैं उसे बुलाने गई। बाथरूम से अजीब सी सिसकारियाँ आ रही थीं – “आह्ह… दीदी…” जैसे कोई मेरे नाम की मोअन ले रहा हो। दरवाज़ा हल्का सा खुला था।
मैंने झाँका और चौंक गई – संजय पूरा नंगा खड़ा था, उसका 8 इंच का मोटा, काला लंड हाथ में, ज़ोर-ज़ोर से हिला रहा था। नसें उभरी हुईं, सुपारा लाल और चमकदार। वो आँखें बंद करके मेरे बारे में सोच रहा था। मेरा दिल ज़ोर से धड़का, लेकिन गुस्सा नहीं… बल्कि एक अजीब सी आग लग गई। मैं अंदर घुस गई।
मैं (मुस्कुराते हुए): ये क्या कर रहा है, संजय?
संजय (घबरा कर, लेकिन लंड छुपाने की कोशिश नहीं की): दी… दीदी! आप? (उसका लंड अब भी तना हुआ मेरे सामने लहरा रहा था, जैसे मुझे सलाम कर रहा हो।)
मैं (उसके करीब जाकर, उसकी आँखों में देखते हुए): कपड़े क्यों उतारे हैं? और ये… इतना बड़ा और सख्त?
संजय (मेरे और करीब आते हुए, आवाज़ काँपती हुई लेकिन आँखों में चाह): दीदी, प्लीज़ किसी को मत बताना… मैं तुम्हारे लिए ही… वो सीन देखकर…
मैं (उसका लंड हाथ में लेकर, धीरे से सहलाते हुए): बताने की बात ही नहीं… अगर तू चाहता है तो मैं भी तो तेरे साथ ये सब करना चाहती हूँ। आज हम दोनों एक-दूसरे की आग बुझाएँगे… बोल, तैयार है?
संजय की आँखें चमक उठीं। वो मुस्कुराया और बोला, “दीदी… सच में? मैं तो सपने में भी यही चाहता था।” हम दोनों एक-दूसरे की बाहों में आ गए। उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रखे – पहले नरम, फिर जंगली किस। उसकी जीभ मेरे मुँह में, मेरी जीभ उसकी। उसका सख्त लंड मेरी जाँघों से रगड़ खा रहा था, मेरी चूत को छू रहा था। मैंने उसका लंड मज़बूती से पकड़ा, ऊपर-नीचे किया। वो मेरी गांड दबा रहा था, मेरे बूब्स मसल रहा था। हम दोनों की साँसें तेज़, बदन गरम।
मैंने अलग होकर कहा, “चल बेडरूम में… यहाँ नहीं।”
बेडरूम में पहुँचते ही संजय ने मुझे दीवार से सटा दिया। मेरे टॉप के ऊपर से ही मेरे बड़े-बड़े बूब्स दबाने लगा, निप्पल्स को मुँह से काटने लगा। मैं सिसकारियाँ ले रही थी – “आह्ह… संजय… मज़ा आ रहा है… और ज़ोर से…” उसने टॉप उतारा, ब्लैक ब्रा देखकर बोला, “दीदी, तेरे बूब्स तो कमाल हैं… इतने रसीले, इतने सॉफ्ट।” मैंने कहा, “तेरे लिए ही तो हैं… चूस इन्हें, काट… जैसे चाहे कर।”
उसने ब्रा खोल दी और मेरे गुलाबी निप्पल्स को मुँह में लिया। कभी चूसता, कभी जीभ से चाटता, कभी हल्का काटता। मेरी चूत से पानी की बाढ़ आ गई। मैं उसके बाल पकड़ कर उसके सिर को और दबा रही थी। फिर उसने मेरी स्कर्ट और पैंटी उतार दी।
मैं पूरी नंगी – मेरी शेव्ड, गुलाबी चूत उसके सामने। उसने कहा, “दीदी… कितनी सुंदर है तेरी चूत… गीली-गीली…” मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरा भाई मुझे इस तरह देखेगा, लेकिन अब मुझे सिर्फ़ उसका लंड चाहिए था।
अब हम दोनों नंगे। मैंने उसका लंड पकड़ा – इतना गरम, इतना मोटा कि हाथ में पूरा नहीं आ रहा था। मैं घुटनों पर बैठी और उसे मुँह में लिया। पहले सुपारे को चाटा, फिर पूरा अंदर… लॉलीपॉप की तरह चूसी। स्वाद नमकीन, मर्दाना।
संजय मोअन कर रहा था – “आह्ह दीदी… कितना मज़ा… तेरी जीभ जादू कर रही है…” फिर मैं किचन से हनी लेकर आई। उसके लंड पर हनी लगाया और चाट-चाट कर चूसी। हनी और प्रीकम का मिक्स – स्वर्ग जैसा। दस मिनट तक चूसते हुए वो झड़ने वाला था।
मैं बेड पर लेट गई, टाँगें फैलाईं और बोली, “अब मेरी बारी… मेरे बदन को चाट।” संजय ने हनी मेरे बूब्स, निप्पल्स, पेट, जाँघों और चूत पर लगाया। फिर चॉकलेट लाकर पूरी बॉडी पर फैला दी।
वो हर इंच चाटने लगा – मेरे निप्पल्स को काटता, नाभि में जीभ घुसाता, जाँघें चाटता, और फिर मेरी चूत… आह्ह! उसकी जीभ मेरी क्लिट पर, अंदर-बाहर… मैं तड़प रही थी, कमर उठा-उठा कर उसके मुँह पर चूत रगड़ रही थी। “संजय… और अंदर… चाट मुझे… मैं तेरी हूँ आज…”
मैंने बेताब होकर कहा, “अब नहीं सहा जाता… अपना लंड मेरी चूत में डाल… मुझे चोद।”
संजय ने मेरी टाँगें कंधों पर रखीं, अपना मोटा लंड मेरी गीली चूत के मुँह पर रगड़ा। पहले सिर्फ सुपारा अंदर… आह्ह दर्द और मज़ा दोनों। मैंने कहा, “धीरे… लेकिन रुक मत।” वो किस करता रहा, और धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर। पहले दर्द हुआ, जैसे फट रही हूँ, लेकिन फिर मज़ा… कमाल का मज़ा।
वो धीरे-धीरे ठोकने लगा, फिर स्पीड बढ़ाई। मैं चिल्ला रही थी – “हाँ संजय… ज़ोर से… चोद मुझे… तेरी दीदी की चूत फाड़ दे… आह्ह… fuck me hard… और गहरा…”
वो मेरे बूब्स दबा रहा था, गांड मसल रहा था, किस कर रहा था। मैंने उसे ऊपर किया और खुद राइडिंग शुरू की – उसके लंड पर उछल-उछल कर। हमारा पसीना मिल रहा था, बदन चिपक रहे थे। मैं झड़ी – पूरी बॉडी काँपी, चूत ने लंड को जकड़ लिया।
संजय बोला, “दीदी… मैं भी…” मैंने कहा, “मुँह में दे… सारा पीना है।” उसने लंड निकाला, मेरे मुँह में डाला और ज़ोर से झड़ा – गर्म, गाढ़ा माल… मैंने एक बूंद नहीं छोड़ी।
हम दोनों थक कर लेट गए। बेड पर खून के निशान – मेरी वर्जिनिटी उसके नाम। मैंने साफ किया और उसे गले लगाया।
उस दिन के बाद हम रोज़ चुदाई करते हैं – कभी किचन में, कभी बाथरूम में, कभी रात भर। संजय अब मेरा पति है – मेरी हर फैंटसी पूरी करता है, और मैं उसकी।
कैसी लगी स्टोरी? और चाहिए तो बताना…
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