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सहलज की ससुराल में चूदाई

चुदाई की सेक्स कहानियाँ हिंदी में पढ़ कर मजा आता है. और जब कहानी साली या भाभी की चुदाई की हो तो क्या कहने. यह कहानी है सलहज की चुदाई की जो भाभी और साली दोनों होती है.

दोस्तो, मेरा नाम वीर है।
मैं अलवर का रहने वाला हूँ, उम्र 30 साल, हाइट 6.4 फीट।
मेरा लंड 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है!

मेरी पत्नी का एक छोटा भाई है, जिसकी शादी मेरी शादी के तीन साल बाद हुई।

वो फौजी है, और उसकी बीवी के साथ मेरा हँसी-मजाक का रिश्ता है।
हम एक-दूसरे की खूब टांग खींचते हैं!

शुरुआत में मेरे मन में ऐसा कुछ नहीं था।
लेकिन धीरे-धीरे मैं अपनी सलहज, प्रीति के प्रति आकर्षित होने लगा।

उसका हँसमुख स्वभाव और चेहरे की अलग ही कशिश!
कोई भी उससे आकर्षित हो सकता है।

प्रीति 6 फीट लंबी है, गोरी नहीं, पर चेहरा ऐसा कि मन करता है, बस चूम लूँ!
उसकी पतली कमर, साइज 32-24-34, और गोल-मटोल गांड!

अब मैं अकेले में उसके नाम की मूठ मारने लगा।
फोन पर खूब बातें करने लगा, पर उसे चोदने की कोशिश में कामयाब कैसे होऊँ, समझ नहीं आ रहा था।

एक बार मेरी पत्नी पीहर गई थी।
मैं उसे लाने मैं गया और 4-5 दिन रुकने का प्लान बनाया ताकि प्रीति को चोदने का कोई मौका मिल जाए।

मेरा साला ड्यूटी पर था।
घर में सास, ससुर, प्रीति, और मेरी बीवी ही थे।

मैं मौका देखकर प्रीति की खूब तारीफ करता।

मेरी बीवी सुबह जल्दी उठकर चली जाती थी।
मैं देर तक सोता था।

एक सुबह मुझे पेशाब लगा और मेरा लंड तना हुआ था, पजामे में तंबू जैसा खड़ा था!

मैं उठने की सोच ही रहा था कि प्रीति झाड़ू लेकर रूम में आई।
मैंने जल्दी से आँखें बंद कर सोने का नाटक किया।

वो झाड़ू लगाने लगी।

तभी उसकी नजर मेरे लंड पर पड़ी।
वो उसे देखकर शरमा रही थी!

मैंने थोड़ी आँखें खोलकर देखा।
वो झाड़ू लगाकर चली गई।

मैं उठा, फ्रेश हुआ और बैठ गया।

प्रीति चाय लेकर आई, खूब हँस रही थी।
मैंने मौका देखकर कहा, “क्या बात है? आज मुझमें कोई सांड दिख रहा है जो हँस रही हो!”
वो शरमाकर भाग गई!

अगले दिन सुबह मैंने प्रीति के आने से पहले फोन का कैमरा ऑन किया, आँखें बंद कीं, और लेट गया।

प्रीति के बारे में सोचते ही मेरा लंड तन गया।

वो आई और पजामे में तंबू बना लंड देखने लगी।
आज वो शरमा नहीं रही थी, आराम से मेरे लंड को निहार रही थी!
फिर वह झाड़ू लगाकर चली गई।

उस दिन मेरी पत्नी और सास खरीदारी के लिए गए।

ससुर को रिश्तेदारी में किसी की मौत की खबर थी, वो भी शाम तक आने वाले थे।
घर में सिर्फ मैं और प्रीति थे।
प्रीति ने मुझे चाय दी और काम में लग गई।

मैं नहाकर आया, तब तक सब जा चुके थे।
प्रीति रसोई में थी।

मैंने सोचा, मौका अच्छा है!
तो मैंने पीछे से उसे पकड़ लिया, उसकी गांड पर लंड लगाया और उसके बूब्स दबाने लगा।

वो घबरा गई, छूटने की कोशिश करते हुए बोली, “ये क्या कर रहे हो, जीजू? छोड़ो मुझे!”
मैंने कहा, “प्रीति, तू मुझे बहुत अच्छी लगती है!”
वो बोली, “नहीं, ये गलत है!”
और छुड़ाने की कोशिश करने लगी।

मैंने कहा, “अच्छा, मेरे लंड को मजे से देख रही थी, तब तो सही था न!”
वो चौंककर मेरी तरफ देखने लगी।

मैंने उसे फोन में वीडियो दिखाया।
उसने शरमाकर आँखें झुका लीं।

मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा।

थोड़ी देर उसने नाटक किया, फिर मेरा साथ दिया।
हम दोनों एक-दूसरे को चूमने लगे।

Chudai Ki Sex Kahaniyan ऐसे ही तो बन जाती हैं.

मैंने उसे चूमते हुए उठाया और बेडरूम में लिटा दिया।
उसके कपड़े उतारे, अब वो सिर्फ चड्डी में थी।

मैं उसके बूब्स दबाने लगा, निप्पल मुँह में लेकर चूसने लगा और उसके शरीर को सहलाने लगा।

उसकी साँसें तेज हो गईं।

मैं चूमते हुए नीचे आया, उसकी चड्डी उतारी, और उसकी चूत चाटने लगा।

वो सिहर उठी, मेरे सिर को पकड़कर चूत पर दबाने लगी, “आह! उफ! आह!” की आवाजें निकालने लगी।
मैंने जीभ से चाटा, चूत में जीभ घुसाकर चोदा। उसे मजा आने लगा।

वो बोली, “हाँ, मेरे राजा, और करो!” मैं जोर-जोर से चूसने लगा।
वह टाँगें उठाकर चूत आगे-पीछे करने लगी।

“आह! उफ! हाँ, ऐसे ही करो, मेरी जान! कितना मजा आ रहा है! ओह! हाँ, चोदो मुझे!” बोलते हुए वो झड़ गई।

मैंने उसकी चूत का एक बूँद भी नहीं छोड़ा, सब चाटकर साफ कर दिया।
उसे सहलाते हुए मैं किस करने लगा।

मैंने कहा, “बहुत दिनों से चोदने का मौका ढूँढ रहा था। आज तू हाथ लगी है, तेरी चूत को कसके चोदूँगा!”

वो बोली, “ऐसा क्या है मुझ में? दीदी मुझसे ज्यादा सुंदर है!”
मैंने कहा, “मुझे शुरू से लंबी लड़की चोदने की इच्छा थी। तू दीपिका जैसी दिखती है। जब तेरा चेहरा देखता हूँ, मन करता है, अभी पटककर चोद दूँ! दीदी 5 मिनट भी नहीं टिकती, मैं प्यासा रह जाता हूँ। इसलिए दूसरी चूत चोदने के मौके देखता हूँ!”

वो बोली, “दोनों भाई-बहन एक जैसे हैं। वो भी जल्दी झड़ जाते हैं!”
मैंने कहा, “आज हम दोनों एक-दूसरे की प्यास बुझाएँगे!”

ये बातें करते-करते वो फिर गर्म हो गई।
प्रीति ने मेरे कपड़े उतारे और मेरा लंड हिलाने लगी, गौर से देखने लगी।

मैंने कहा, “क्या हुआ? मुँह में ले लो!”
उसने कहा, “नहीं, मुझे मुँह में लेना पसंद नहीं!”

मैंने जिद नहीं की।
उसे लिटाकर मैंने उसकी गांड के नीचे तकिया लगाया, उसकी टाँगें फैलाईं, और चूत पर लंड रगड़ने लगा।

वो बोली, “अब डाल दो, जान! आराम से डालना, पहली बार इतना बड़ा लंड ले रही हूँ!”
मैंने पूछा, “साले साहब का कितना है?”
वो बोली, “इसके आधा ही है!”

मैंने थूक लगाया, चूत पर लंड टिकाया और धक्का मारा।
थोड़ा सा लंड अंदर घुसा।
वो छटपटाने लगी।

मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड घुसा दिया।
वो छूटने के लिए छटपटाने लगी, उसकी आँखों में आँसू थे।

मैंने उसके बूब्स मसलते हुए धीरे-धीरे चोदना शुरू किया।
थोड़ी देर बाद वो भी मेरे साथ हो गई।

मैंने रफ्तार तेज की और चोदने लगा।
वो भी गांड उठाकर चुदवाने लगी।

मैं उसके होंठ चूमते हुए लंड अंदर-बाहर करने लगा।

वो बोली, “आह! ओह! हाँ, मजा आ रहा है! चोदो मुझे!”

फिर मैंने उसे घोड़ी बनाया, लंड घुसाया, और उसके बाल पकड़कर चोदने लगा।

थप-थप, आह, उफ, ऊंह की आवाजें गूंजने लगीं।
मैं प्रीति के ऊपर चढ़कर जोर-जोर से लंड उसकी चूत में पेलने लगा।

उसने पीछे मुड़कर देखा और बोली, “मेरे राजा, क्या मस्त चोद रहा है! फाड़ दे मेरी चूत अपने मोटे लंड से!”

मुझे जोश चढ़ा … मैंने उसके बाल पकड़े, होंठ चूमे, और जड़ तक लंड घुसाकर चोदने लगा।

हम दोनों पागल हो गए थे।

मैं बोला, “ले, बहन की लोड़ी! आज तेरी चूत न फाड़ी तो मेरा नाम नहीं!”
वो बोली, “हाँ, चोदो मुझे! फाड़ दे, मेरी जान! मेरी माँ की चूत, जोर से चोद!”

मैंने उसे कसकर पकड़ लिया, होंठ चूमते हुए पूरा दम लगाकर लंड उसकी चूत में अंदर-बाहर करने लगा।

वो चिल्ला रही थी, “हाँ, चोदो मुझे! मेरी चूत का भोसड़ा बना दिया! मस्त चोद रहा है, भेनचोद! क्या लंड है तेरा … वाह मेरे यार!”

हम दोनों झड़ने वाले थे।

उसने कहा, “अंदर ही झड़ जाओ! वो दस दिन की छुट्टी पर आने वाला है, कोई प्रॉब्लम नहीं होगी!”
मैं अंदर ही झड़ गया।

काफी देर तक हमने किस किया।
वो कपड़े पहनने लगी।

मैंने कहा, “प्रीति, मेरा सपना है लंबी लड़की को खड़े-खड़े चोदना! प्लीज, एक राउंड और!”
वो मुस्कुराई, बोली, “हाँ, मेरे राजा, कर ले अपने मन की!”

मैंने कहा, “लंड को मुँह में नहीं, तो चूम तो ले, जान!”
उसने लंड को किस किया।

मेरा लंड फिर खड़ा हो गया।

मैंने उसे दीवार से सटाकर लंड उसकी चूत में झटके से घुसा दिया और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
वो मचल उठी, “आह! उफ! ऊंह!” करने लगी।

मैं उसकी चूचियाँ दबाते हुए जबरदस्त टक्कर मार रहा था।
वो बोली, “सच में मेरी चूत फाड़ दी! क्या चोदा है! मस्त लंड है! दीदी की जगह मैं होती तो रोज चुदवाती!”

वो मेरी तरफ मुड़ी।
मैंने झट से उसके मुँह में अपनी जीभ डाल दी।
वो जीभ चूसने लगी।

मैंने उसकी कमर कसकर पकड़ी और तेज गति से लंड आधा बाहर निकालता, फिर झटके से घुसा देता।
थप की आवाज आती, जब मेरा लंड प्रीति के कूल्हों से टकराता।

थोड़ी देर बाद हम फिर झड़ गए।
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