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जीजा ने साली को पहली बार चोदा

Jija Ne Saali ko Pahli Bar Choda

जीजा की सालों पुरानी साली की चूत की प्यास आखिरकार बुझी। लिफ्ट में किस, टेरेस पर चूचियां दबाना और नए फ्लैट में घंटों चुदाई की पूरी सच्ची देसी सेक्स कहानी पढ़ें। हिंदी में सबसे गरम साली-जीजा वाली सेक्स स्टोरी।

हाय दोस्तों, ये कहानी उन सारे जीजाओं के नाम जो अपनी साली को सिर्फ़ बहन नहीं, औरत समझते हैं। जिनके दिल में सालों से एक आग सुलगती रहती है, जो कभी बुझती नहीं। मेरी बीवी की छोटी बहन मृदुला… उफ्फ, आज भी उसका नाम लेते ही बदन में आग लग जाती है। कॉलेज के दिनों से ही वो मेरे सपनों की रानी थी। लम्बी, गोरी, कजरारी आँखें, भरे-भरे होंठ, और वो कमसिन जिस्म 34-28-36 का फिगर जो साड़ी में भी सेक्सी लगता था और जीन्स में कातिल। मैं उस पर मरता था, लेकिन कभी हिम्मत नहीं हुई कि कह दूँ। शादी से पहले भी मौका मिला था, पर डर था कि कहीं रिश्ता न टूट जाए।

उसकी परीक्षा की वजह से वो मेरी शादी में नहीं आई। सच कहूँ तो मुझे राहत ही मिली थी – कम से कम उसे किसी और की दुल्हन बनते नहीं देखना पड़ा। चार-पाँच साल बाद उसकी भी शादी हो गई। मुंबई में सेटल हो गई पति, सास-ससुर के साथ। मैं गल्फ चला गया था अपनी बीवी-बच्चों के साथ। उसकी शादी में भी नहीं जा सका। टिकट पहले से बुक था, पर सच ये था कि किसी और को उसे अपनी बाहों में भरते देखने का दिल नहीं था।

समय बीता। उसने एक प्यारा सा बेटा पैदा किया। जब भी इंडिया आता, उसके घर ज़रूर जाता। महँगे गिफ्ट्स लाता – परफ्यूम, साड़ियाँ, ज्वेलरी। दूर से उसकी तारीफ़ करता, उसकी आँखों में झाँकता। वो शरमाकर मुस्कुराती, और मैं मन ही मन तड़पता। रात को अकेले में उसका ख्याल आता तो लंड अपने आप खड़ा हो जाता।

फिर बच्चों की पढ़ाई के लिए बीवी-बच्चों को इंडिया वापस भेज दिया। मैं अकेला गल्फ में। पर मृदुला को भूलना नामुमकिन था। हर रात वही सपने – उसकी गोरी जाँघें, उसकी भारी चूचियाँ, उसकी गीली चूत मेरे लंड के नीचे।

एक बार अकेले मुंबई आया बिजनेस के सिलसिले में। एयरपोर्ट से ही उसका नंबर मिलाया। उसकी आवाज़ सुनते ही लंड में हलचल हो गई।
“जीजा! कब आए? लंच पर आ जाओ ना, सब बहुत याद कर रहे हैं।”
मैं दोपहर एक बजे उसके घर पहुँच गया। बेटा स्कूल गया था, सास घर पर थीं। खुलकर बातें हुईं, पुराने दिन याद आए। फिर सास किचन में चली गईं लंच बनाने। मृदुला मुझे धोती देने बेडरूम में गई। मैं चुपके से पीछे-पीछे।

वो अलमारी से धोती निकाल रही थी। मैं दरवाज़ा बंद कर उसके पीछे खड़ा हो गया। उसने मुड़कर धोती दी तो हमारी नज़रें मिलीं। बस एक पल… मैंने उसे कमर से खींचकर अपनी बाहों में जकड़ लिया। उसकी गर्म साँसें मेरे गालों को छू रही थीं। मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले वो हड़बड़ाई, दोनों हाथों से अपनी छाती ढक ली और मुँह फेर लिया। पर मैंने उसे कसकर पकड़ रखा था। उसकी कमर मेरी छाती से सटी थी, मेरे लंड की उत्तेजना उसकी नरम पेट पर महसूस हो रही थी। आख़िरकार मैंने उसके माथे पर, गालों पर, गर्दन पर लंबे-लंबे किस किए और धीरे से छोड़ा। वो शरमाकर मुस्कुराई और भागकर किचन में चली गई।

मैं धोती पहनकर हॉल में बैठ गया। पीछे से उसे देख रहा था – वो चुपचाप काम कर रही थी, सास से भी कम बोल रही थी। मुझे पता था उसके बदन में भी वही आग लगी है जो मुझमें।

खाना परोसा गया। मैं खा ही रहा था कि दोनों मेरे सामने बैठ गईं। अब वो नॉर्मल लग रही थी, हँस-हँसकर बातें कर रही थी। रात की फ्लाइट थी मेरी, नींद आ रही थी। पहले से प्लान था कि मैं फ्लैट देखने जा रहा हूँ, वो साथ चलेगी। मैंने कहा, “चार बजे उठा देना।” और सो गया।

ठीक चार बजे उसने धीरे से कंधे पर हाथ रखकर जगाया। उसका हाथ गर्म था। चाय पिलाई। वो भी तैयार थी – गुलाबी सलवार-कमीज़ में कयामत ढा रही थी। सास को बाय बोलकर हम लिफ्ट में घुसे। पाँचवीं मंज़िल से नीचे। जैसे ही दरवाज़ा बंद हुआ, उसने मेरी तरफ़ देखकर शरमाई हुई मुस्कान दी। मैंने उसका हाथ पकड़ा, हल्के से दबाया। उसने भी जवाब में दबाया। बस फिर क्या था… मैंने उसे दीवार से सटा दिया और पागलों की तरह किस करने लगा। इस बार उसने बिल्कुल मना नहीं किया। उसके नरम, रसीले होंठ, उसकी गर्म साँसें, उसकी जीभ मेरे मुँह में… मैं जन्नत में था। मेरे हाथ उसकी कमर पर, फिर उसकी भारी गांड पर। वो भी मुझे कसकर पकड़े थी।

ग्राउंड फ्लोर आने वाला था, मैंने फुसफुसाकर कहा, “टेरेस चलें?”
उसने आँखों ही आँखों में हाँ कह दी। मैंने 20वीं मंज़िल का बटन दबा दिया। लिफ्ट ऊपर जाने लगी। मैंने फिर उसे बाहों में जकड़ लिया। इस बार वो भी पूरी तरह साथ दे रही थी। मेरी एक हाथ उसकी कमर पर, दूसरी ब्लाउज़ के ऊपर से उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों पर। उसने मेरे हाथ को और ज़ोर से अपनी चूचियों पर दबाया। मैंने मसलना शुरू किया – ब्रा के ऊपर से भी उसकी निप्पल्स एकदम टाइट महसूस हो रही थीं। वो सिसकारियाँ ले रही थी – “उम्म्म… जीजा…”

20वीं मंज़िल पर लिफ्ट रुकी। हाथ में हाथ डाले टेरेस पर पहुँचे। वहाँ सन्नाटा था। वो जानती थी कि ये फ्लोर दिन में खाली रहता है – कंपनी का गेस्ट हाउस था।

वहाँ पहुँचते ही मैंने उसे दीवार से सटा दिया। पीछे से उसकी कमर पकड़कर उसकी गर्दन पर किस करने लगा। मेरी छाती उसकी पीठ से सटी थी, मेरा 7 इंच का मोटा लंड उसकी भारी गांड के बीच में दबा हुआ था। मैंने उसके ब्लाउज़ के बटन खोलने शुरू किए। वो चुप रही, सिर्फ़ साँसें तेज़ होती गईं। ब्रा ऊपर की और उसकी गोरी, भरी-भरी चूचियाँ बाहर आ गईं। निप्पल्स गुलाबी और टाइट। मैंने एक को मुँह में लिया, जीभ से घुमाया, चूसा। वो मेरे सिर को अपनी चूचियों पर ज़ोर से दबाए जा रही थी – “आह… जीजा… कितना अच्छा लग रहा है…”

फिर मैंने उसकी सलवार के नाड़े खोले। पहले उसने हल्के से हाथ रोका, पर जब मैंने फिर कोशिश की तो उसने खुद मेरी उँगलियाँ अपनी पैंटी के ऊपर रख दीं। वो पूरी तरह भीग चुकी थी। मैंने पैंटी साइड की और दो उँगलियाँ उसकी गर्म, फिसलन भरी चूत में डाल दीं। वो काँप उठी। उसका हाथ अपने आप मेरी पैंट की ज़िप पर पहुँच गया। मैंने ज़िप खोली, अपना मोटा, तना हुआ लंड बाहर निकाला। वो उसे देखकर दंग रह गई – हाथ में पकड़ भी नहीं पा रही थी, फिसल रहा था।

हम दोनों पागल हो चुके थे। होंठ आपस में चिपके, एक हाथ उसकी चूची मसल रहा था, दूसरा उसकी चूत चोद रहा था, उसका हाथ मेरे लंड को ऊपर-नीचे सहला रहा था। उसकी चूत से पानी टपक रहा था। अचानक उसने कहा, “जीजा… कोई आ जाएगा…”
हम रुके। उसने जल्दी से कपड़े ठीक किए। लिफ्ट में नीचे आते वक़्त फिर किस, फिर चूचियाँ दबाना। मेरा लंड अब भी तना हुआ था।

फिर हम फ्लैट देखने निकले, लेकिन दोनों को पता था – ये आग अब नहीं बुझेगी।

अगली दो-तीन विज़िट में सास हमेशा रहती थीं, मौका नहीं मिला। पर दिसंबर में मैं नया फ्लैट लेने आया – विक्रोली में 10वीं मंज़िल पर। की लेते ही उसे फोन किया। वो बोली, “आ जाओ लंच पर।”
बारह बजकर तीस मिनट पर पहुँचा तो वो बस मेरा इंतज़ार कर रही थी। आँखों में चमक, गालों पर शरमा रही थी। सास भी थीं। मैंने दोनों को नया फ्लैट दिखाने बुलाया। सास ने मना कर दिया, “बेटी चली जाएगी तुम्हारे साथ।” हम दोनों अंदर ही अंदर खुश हो गए। उसने कहा, “पाँच-साढ़े पाँच तक वापस आ जाऊँगी मम्मी।”

दो बजे घर से निकले। लिफ्ट में घुसते ही फिर वही किस, चूचियाँ मसलना। वो डार्क ब्लू साड़ी में लग रही थी मानो सेक्स की देवी उतर आई हो। ब्रा ढीली बाँधी थी, हर कदम पर उसके भारी बूब्स उछल रहे थे। टैक्सी में भी मैंने उसका हाथ थामा और धीरे-धीरे उसकी नरम जाँघों पर हाथ फेरने लगा। वो सिर्फ़ मुस्कुरा रही थी।

विक्रोली पहुँचे। लिफ्ट में घुसते ही मैंने उसे दीवार से सटा दिया। दसवीं मंज़िल तक का सफर हम होंठों में होंठ डाले गुज़ारते रहे। फ्लैट खोला, अंदर गए, दरवाज़ा लॉक।

हॉल दिखाया, किचन दिखाया, फिर मास्टर बेडरूम में ले गया। वहाँ नया डबल बेड और गद्दा पहले से लगा था। बेडरूम में घुसते ही मैंने उसे बाहों में उठा लिया। आज कोई रोक-टोक नहीं थी। दोनों जानते थे – आज या कभी नहीं।

मैंने उसकी साड़ी खींची, पल्लू गिरा, ब्लाउज़ के बटन खोले। ब्रा उतारी। उसकी भारी, गोरी चूचियाँ आज़ाद हो गईं। मैंने उन्हें ऐसे चूसा जैसे भूखा शेर दूध पी रहा हो। वो मेरी शर्ट, बनियान उतार रही थी। मेरी बालों वाली चौड़ी छाती देखकर पागल हो गई। उसने मेरी छाती चाटी, निप्पल्स चूसे। फिर साड़ी, पेटीकोट, मेरी पैंट… बस दो अंतर्वस्त्र बाकी। मैंने उसे गोद में उठाया और बेड पर लिटाया।

मेरी प्यारी मृदुला पूरी नंगी मेरे सामने थी। उसकी गोरी जाँघें, पतली कमर, भारी बूब्स, और उसकी गुलाबी चूत – एकदम साफ़-सुथरी, हल्के बाल। मैं बस देखता रह गया। फिर ऊपर से नीचे तक किस किया – माथे से लेकर पैर की उँगलियों तक। निप्पल्स चूसे, पेट चाटा, फिर उसकी चूत पर किस किया। वो शरम से मुँह ढक रही थी। मैंने उसका हाथ हटाया, आँखों में आँखें डालीं। उसकी आँखें कह रही थीं – मुझे चोदो जीजा, आज पूरा हक़ है तुम्हारा।

उसने मेरी अंडरवियर उतारी। मेरा 7 इंच का मोटा, नसों वाला लंड देखकर सिहर गई। हाथ में लिया पर कंट्रोल नहीं हो रहा था। मैंने उसकी टाँगें चौड़ी कीं, चूत पर जीभ फेरी। उसका रस मीठा था। वो काँप रही थी – “जीजा… आह… बस… करो ना…”

फिर मैं उसके ऊपर चढ़ा। वो खुद मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत पर रख रही थी। उसकी चूत पूरी तरह गीली थी। मैंने धीरे-धीरे धक्का मारा। पहले सिर अंदर गया, फिर आधा। वो दर्द से कराह रही थी – “आह… धीरे जिजा… बहुत मोटा है…” पर मना नहीं कर रही थी। मैंने किस किया, उसके बूब्स चूसे। जब पूरा अंदर गया तो वो बोली, “जीजा… तुम हमेशा से मेरे थे… ग्रेजुएशन से ही तुम्हें चाहती थी… तुम्हारी ही थी मैं…”

दर्द कम हुआ तो वो खुद कमर उचकाने लगी। मैंने स्पीड बढ़ाई। हर धक्के के साथ उसकी चूचियाँ उछल रही थीं। कमरे में चरमराहट और चूत की चिपचिपी आवाज़ें गूँज रही थीं। वो दो बार झड़ चुकी थी – “जीजा… मैं मर जाऊँगी… आह… और ज़ोर से…” फिर हम दोनों एक साथ झड़े। मेरा गरम वीर्य उसकी चूत के सबसे अंदर तक छोड़ा। मैं उसके अंदर ही पड़ा रहा, वो मुझे कसकर पकड़े थी, नाखून मेरी पीठ में गड़ाए।

दो घंटे ऐसे ही गुज़र गए। कई बार चुदाई की। कभी मैं ऊपर, कभी वो ऊपर। उसकी चूत से हमारा रस टपक रहा था। फिर वो उठी, नहाई, कपड़े पहने। मैंने उसे घर छोड़ा। ठीक समय पर पहुँचे। सास खुश। वो शरमाते हुए मुस्कुराई।

तब से जब भी मौका मिलता है, हम पागलों की तरह एक-दूसरे को चोदते हैं। होटल में, मेरे फ्लैट में, कभी-कभी रिस्क लेकर उसके घर में भी। वो मेरी है… हमेशा के लिए मेरी।

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