मम्मी की नींद में बेटी ने पापा से गाँड मरवाई – हिंदी फैमिली सेक्स स्टोरी
Mummy ki neend mein beti ne papa se gaand marwayi – Hindi Family Sex Story
हाय दोस्तों… आप सबके इतने प्यारे-प्यारे मेल आए कि दिल सचमुच खिल उठा। पर जो लोग गंदी लेस्बियन फोटो या “तुझे अभी चोद दूँगा” जैसे मैसेज भेज रहे हैं, प्लीज़ ऐसा मत करो। मैं आपकी दोस्त हूँ, अपनी सच्ची कहानी एंजॉय करो, अपना एक्सपीरियंस शेयर करो, मुझे बहुत अच्छा लगेगा। बाकी बदतमीज़ी बिल्कुल नहीं चलने वाली। और हाँ, मैं बिल्कुल स्ट्रेट हूँ, लड़कों से ही प्यार करती हूँ। चलो, अब हिंदी फैमिली सेक्स स्टोरी आगे बढ़ाते हैं…
उस रात मैं पापा की गोद में बैठी उनका मोटा, गर्म लंड हाथ में लेकर सहला रही थी। टीवी पर कोई बोरिंग सी फिल्म चल रही थी, पर हम दोनों को उसकी परवाह कहाँ थी। मेरे छोटे-छोटे हाथ उनके लौड़े को ऊपर-नीचे कर रहे थे, टॉप पर से रगड़ रही थी, कभी अंडकोष को हल्के से मसल रही थी। पापा की गर्म साँसें मेरे गालों पर लग रही थीं।
मैंने उनकी पैंट की ज़िप धीरे से खोली थी और पूरा लंड बाहर निकाल लिया था। वो इतना सख्त और भारी था कि मेरी उँगलियाँ उसके चारों तरफ़ भी पूरा घेरा नहीं बना पा रही थीं। मैं सहलाते-सहलाते ही कब उनकी छाती से सिर टिकाकर सो गई, पता ही नहीं चला। पापा मुझे गोद में ही उठाकर बेड पर लिटाया और मेरे, मेरी स्कर्ट ऊपर तक चढ़ गई थी, पैंटी गीली हो चुकी थी। वो मुझे प्यार से चूमा और खुद भी सोने चले गए।
सुबह-सुबह मैं किचन में नाइट गाउन पहने खाना बना रही थी। गैस पर दाल चढ़ी थी, उसकी खुशबू पूरे घर में फैली थी। पापा बिना आवाज़ किए मेरे पीछे आए और खड़े हो गए। उनकी गर्म साँसें मेरी गर्दन पर लग रही थीं। मैंने जान-बूझकर थोड़ा पीछे खिसक गई… और अचानक उनका सुबह का सख्त लंड मेरी गाँड की नरम दरार में पूरी तरह फँस गया। सिर्फ़ पतली सी नाइट गाउन और उनकी पायजामा का कपड़ा हमारे बीच था।
मैं भोली बनकर बातें करती रही, “पापा, नमक चेक कर लें दाल में?” कहते हुए कभी झुककर सब्ज़ी काटने लगी, कभी प्लेटफॉर्म पर हाथ टिकाकर कमर आगे कर दी… जिससे मेरी मुलायम, गोल गाँड उनके लंड पर रगड़ खाती। उफ्फ्फ़… वो गर्माहट, वो सख्ती… मेरी चूत तुरंत गीली हो गई।
पापा भी मज़े ले रहे थे, मैं महसूस कर सकती थी कि उनका लंड पत्थर जैसा तना जा रहा था, मेरी गाँड को चीरने को बेताब। अचानक उन्होंने पीछे से मुझे ज़ोर से हग कर लिया, दोनों हाथ मेरी कमर पर कस लिए। उनका लंड मेरी गाँड में पूरी तरह धँस गया। मैंने मासूम आवाज़ में पूछा, “क्या हुआ पापा जी?”
वो मेरे कान में फुसफुसाए, “आज मेरी गुड़िया पर बहुत ज़्यादा प्यार आ रहा है रे… सुबह-सुबह तेरी ये टाइट गाँड देखकर तो लंड फटने को हो रहा है।”
मेरा दिल ज़ोर से धड़का, चूत में सिकुड़ गई। मैं शरमाकर मुस्कुरा दी। फिर पापा ने मेरी कमर पर हाथ फेरते हुए धीरे-धीरे नीचे सरकाया और नाइट गाउन के अंदर हाथ डाल दिया। उनकी उँगली मेरी पैंटी के ऊपर से चूत की दरार पर फिरने लगी। “बता ना मेरी नोनू… खुजली अब कहाँ-कहाँ हो रही है?”
मैंने शरमाते हुए कहा, “पापा… अब तो बहुत सारी जगह… गाँड में भी… चूत में भी…”
वो हँसे और बोले, “चल दिखा तो सही अपनी प्यारी सी चूत… पापा मलहम लगा देंगे।”
मैं कुछ कहती, तभी मम्मी की आवाज़ आई, “अरे तुम दोनों सुबह-सुबह किचन में क्या कर रहे हो?” पापा ने झट से उँगली निकाल ली जो मेरी गाँड में घुस चुकी थी। उफ्फ्फ़… बहुत तेज़ दर्द हुआ, मैं हड़बड़ा गई। गाँड सुन्न पड़ गई थी, ऐसा लग रहा था मानो अभी भी पापा की मोटी उँगली अंदर धँसी हुई है। हम दोनों घबराकर मम्मी के पास पहुँचे।
मम्मी बेड पर बैठी थीं, नहाकर फ्रेश, साड़ी पहनी हुई थीं, बहुत सुंदर लग रही थीं। मैंने पूछा, “हाउ आर यू मॉम?”
उन्होंने मुस्कुराकर कहा, “अब तो एकदम ठीक हूँ।” फिर बोलीं, “तुम लोग इतनी सुबह कैसे उठ गए? अभी तो सात ही बजे हैं।”
हमने कहा, “नींद खुल गई थी।”
मम्मी सुसु करने चली गईं। जैसे ही वो गईं, मैंने पापा को एकदम सेक्सी, शरारती स्माइल दी। पापा भी शरमाकर मुस्कुराए और मेरी गाँड पर हल्के से थप्पड़ मार दिया।
मम्मी वापस आईं तो बोलीं, “चलो अब जल्दी तैयार हो जाओ, देहरादून निकलना है।” मैं नहाने चली गई। नहाते वक्त मैंने अपनी चूत और गाँड अच्छे से साफ की, क्रीम लगाई, सोच रही थी कि आज पापा का मोटा लंड कहाँ-कहाँ घुसेगा। नहाकर मैंने छोटी सी फ्रॉक पहनी, अंदर सिर्फ़ ब्रा और पैंटी। ब्रेकफास्ट तैयार किया। हम तीनों तैयार हो गए। मैंने सारे बैग एक-एक करके नीचे ले जाकर कार में रखे।
हमारा ड्राइवर भूपिंदर अंकल थे, बहुत मज़ाकिया पंजाबी, मुझे हमेशा “ओये छोटी गुड़िया” कहकर छेड़ते थे।
पापा-मम्मी भी आ गए। हमारी स्कॉर्पियो बहुत बड़ी थी, लास्ट सीट खोल दो तो पूरा सोफा बन जाता है। मम्मी को रास्ते में उल्टी आती थी, इसलिए वो लास्ट वाली सीट पर लेट गईं। मैं और पापा मिडिल सीट पर। मम्मी ने कंबल ओढ़ लिया और बोलीं, “मुझे नींद आ रही है, तुम लोग आराम से बैठो।”
कार स्टार्ट हुई। पहले दस-पंद्रह मिनट हम चुप रहे। फिर देखा तो मम्मी गहरी नींद में थीं, मुँह पर कंबल तक खींच लिया था। ड्राइवर अंकल मस्त पंजाबी गाने बजा रहे थे। मैंने पापा की तरफ देखा, वो मुझे ही मुझे घूर रहे थे, आँखों में शरारत भरी हुई थी। मैं धीरे से उनकी तरफ खिसकी और उनका कंधा पकड़कर अपना सिर टिका दिया। पापा ने प्यार से मेरे बालों में हाथ फेरना शुरू किया, फिर धीरे-धीरे हाथ मेरी गर्दन, कंधे और फिर छाती पर आने लगा।
मैंने हल्की सी आह भरी। पापा ने कान में पूछा, “क्या हुआ मेरी जान?”
मैंने शरमाते हुए कहा, “पापा… फिर से खुजली हो रही है… बहुत तेज़…”
उन्होंने पीछे से मेरी गाँड पर हाथ रखा और दबाया, “यहाँ?”
मैंने उनका हाथ पकड़कर सीधे अपनी फ्रॉक के अंदर डाल दिया, पैंटी के ऊपर से चूत पर रख दिया। पापा की आँखें चमक उठीं। वो फुसफुसाए, “यहाँ कैसे खुजली करूँ बेटू… मम्मी जग गई तो?”
मैंने शरारत भरी मुस्कान दी और बोली, “जागी तो मैं संभाल लूँगी… आप बस शुरू करो…”
मैंने अपना शॉल निकाला और हम दोनों के ऊपर डाल लिया। एसी चालू था, ठंड का बहाना बन गया। पापा को ग्रीन सिग्नल मिल गया। वो बोले, “पहले कहाँ खुजली करूँ मेरी गुड़िया?”
मैंने उनके कान में फुसफुसाया, “पहले गाँड में पापा… आपकी उँगली से बहुत मज़ा आता है…”
पापा ने धीरे से कहा, “विंडो की तरफ मुँह करके बैठो, गाँड मेरी तरफ करो… और पैंटी उतार दो।”
मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। मैंने चुपके से फ्रॉक ऊपर उठाई, पैंटी नीचे सरकाकर पैर से निकाल ली और बैग में रख दी। फिर विंडो की तरफ झुक कर बैठ गई, दोनों घुटने सीट पर टेक लिए… मेरी नंगी, गोल, चिकनी गाँड पूरी तरह पापा की तरफ खुल गई।
पापा ने पहले मेरी गाँड को प्यार से सहलाया, दोनों हाथों से मसला, फिर मम्मी की मेकअप किट से कोल्ड क्रीम निकाली और अपनी मोटी उँगली पर खूब सारी लगा ली। फिर धीरे-धीरे उनकी उँगली मेरी टाइट गाँड के छेद पर रगड़ने लगी। मैं आँखें बंद करके मज़ा ले रही थी… फिर एक झटके में उँगली अंदर सरक गई। “आह्ह्ह…” मेरी मुँह से हल्की सी आवाज़ निकली। पापा ने दूसरी उँगली भी अंदर डाल दी। अब दो मोटी उँगलियाँ मेरी गाँड में अंदर-बाहर हो रही थीं। मेरी चूत से पानी टपक-टपक कर सीट पर गिर रहा था। मैं होंठ काटे, कमर हिला-हिलाकर मज़ा ले रही थी।
तभी ड्राइवर अंकल ने पीछे मुड़कर कहा, “साहब, यहाँ पास के ढाबे में मेरी चाची को भी देहरादून जाना है… अगर ऐतराज़ न हो तो ले लूँ?”
पापा की दोनों उँगलियाँ उस वक्त मेरी गाँड में पूरी तरह धँसी हुई थीं। वो बोले, “नहीं-नहीं भाई, कोई तरीका नहीं…”
मुझे दया आ गई, मैंने हल्के से कमर हिलाते हुए कहा, “कोई बात नहीं पापा… हम एडजस्ट कर लेंगे।”
पापा ने मेरी गाँड ज़ोर से दबाई और बोले, “ठीक है भाई, ले आओ।”
ड्राइवर अंकल फिर आगे देखने लगे… और पापा ने तीसरी उँगली भी मेरी गाँड में ठूँस दी। अब तीन उँगलियाँ ज़ोर-ज़ोर से अंदर-बाहर हो रही थीं। मैं होंठ काटे, सिसकारियाँ ले रही थी, चूत से पानी की बौछार छूट रही थी। शॉल के नीचे मेरी फ्रॉक पूरी गीली हो चुकी थी। मेरा शरीर काँप रहा था, मैं झड़ने वाली थी…
बाकी का मज़ा… अगले पार्ट में, जब आप ढेर सारे प्यार भरे मैसेज भेजोगे तब! 😘💦
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