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ट्यूशन के बहाने चुदाई – 18 साल की चिड़िया की कामुक देसी कहानी

Tuition Ke Bahane Chudai – 18 Saal Ki Chidiya Ki Hot Desi Sex Story

पड़ोस में आई 18 साल की मासूम चिड़िया की बारिश में भीगी बॉडी से शुरू हुआ कामुक सफर। अंकल की गोद में पहली छुअन, चुत की पहली चाट, और फिर पूरी रात की चुदाई। छोटी जवानी के रसीले उभार, टाइट चूत और पहली बार के मजे की ये देसी इरॉटिक स्टोरी पढ़कर आपका लंड खड़ा हो जाएगा। फुल हॉट हिंदी सेक्स कहानी।

वो थी मेरी प्यारी चिड़िया… पड़ोस में आई थी बस एक साल पहले, लेकिन ऐसा लगता था जैसे वो मेरी जिंदगी का हिस्सा हमेशा से रही हो। नाम था उसका रिया, लेकिन मैं उसे चिड़िया ही बुलाता था – छोटी, चुस्त, हर वक्त चहचहाती हुई।

अठारह साल की हुई थी वो, बिल्कुल ताज़ा जवानी की दहलीज पर। उसकी मासूमियत में एक अजीब सी कशिश थी, और उसकी बॉडी… ओह, वो पहले-पहले उभार, वो नरम-नरम कर्व्स, जो मुझे हर बार पागल बना देते थे।

उसकी माँ को देखकर पता चलता था कि ये हुस्न विरासत में मिला है – गोरी-चिट्टी स्किन, भारी भरकम सीने, और हमेशा घुटनों से ऊपर वाली फ्रॉक्स या स्कर्ट्स में घूमती। चिड़िया भी बिल्कुल वैसी ही थी, बस थोड़ी कच्ची, थोड़ी और रसीली, जैसे अभी-अभी पेड़ से टूटा आम।

पहली बार दिल में वो आग लगी उस बारिश वाले दिन। स्कूल से जल्दी छुट्टी हो गई थी, और वो पूरी तरह भीगकर हमारे घर चली आई। घरवाले बाहर गए थे, और मेरी बीवी उस दिन माइग्रेन से कराह रही थी, सो मैं ऑफिस नहीं गया।

दरवाज़ा खोला तो सामने खड़ी थी मेरी चिड़िया – सफ़ेद स्कूल यूनिफॉर्म उसके भरे हुए बदन से चिपकी हुई, पानी की बूँदें उसके गालों पर लुढ़क रही थीं। शर्ट इतनी गीली कि अंदर की ब्रा की रूपरेखा साफ़ दिख रही थी, और स्कर्ट से चड्डी की लाइन भी। उसके गोल-गोल, टाइट चूतड़ हिलते हुए जब वो अंदर आई, तो मेरे अंदर का जानवर जाग उठा। लंड लुंगी में सख्त होने लगा।

“अरे चिड़िया, पूरी भीग गई हो! जल्दी अंदर आओ, ठंड लग जाएगी।”

वो मुस्कुराते हुए अंदर आई, उसके गीले बालों से पानी टपक रहा था। मैंने पीछे से दरवाज़ा लॉक किया। घर में सिर्फ़ मैं और बीवी थी, वो भी दूसरे कमरे में सो रही थी।

“बेटा, आंटी की तबीयत ठीक नहीं है, चलो मैं ही तुम्हारे कपड़े बदल देता हूँ।”

वो बिना कुछ कहे मेरे साथ बेडरूम में चली आई। मैं बिस्तर पर बैठ गया, उसे पास बुलाया। टॉवल लिया और उसकी पीठ फेरकर ड्रेस की ज़िप धीरे से नीचे की। गीली ड्रेस फिसलकर नीचे गिर गई। अंदर सिर्फ़ सफ़ेद बनियान और छोटी सी पिंक चड्डी।

ब्रा तो उसकी माँ ने अभी शुरू भी नहीं करवाई थी। उसके छोटे-छोटे स्तन उभर रहे थे, गुलाबी निप्पल सख्त होकर बनियान से छिदे हुए से लग रहे थे।

“बेटा, बनियान भी पूरी गीली है, ये भी उतारनी पड़ेगी वरना सर्दी लग जाएगी।”

वो चुपचाप खड़ी रही, आँखें झुकी हुईं। मैंने बनियान ऊपर से खींचकर उतार दी। अब वो मेरे सामने टॉपलेस थी, सिर्फ़ वो छोटी चड्डी में। उसके नंगे स्तन, इतने नरम और ताज़ा, कि छूने को जी चाहा।

मैंने टॉवल से उसके बाल पोंछते हुए धीरे से उन पर हाथ फेरा। वो सिहर उठी, जैसे बिजली दौड़ गई हो उसके बदन में। फिर टॉवल नीचे ले जाकर कमर पोंछी, और हाथ उसके भारी चूतड़ों पर पहुँच। नरम, गोल, इतने रसीले कि मसलने को मन किया।

“चड्डी भी तो गीली है बेटा… उतार दो ना, नहीं तो खुजली होगी।”

वो शरम से लाल हो गई, “नहीं अंकल… रहने दीजिए ना।”

पर उसकी आँखों में शर्म के साथ एक चमक थी, एक नई उत्सुकता। मैंने हँसकर उसके गाल पर किस किया और कमरे से बाहर चला गया। जब वो बाहर आई, तो मैंने जो पुरानी फ्रॉक दी थी वो उसके लिए छोटी पड़ रही थी – जाँघें पूरी नंगी, स्तन उभरे हुए, और हर हरकत में फ्रॉक ऊपर सरकती। मेरा लंड लुंगी में तड़प रहा था।

किचन में मैंने उसे ज़मीन पर बिठाया चाय बनाने के बहाने। फ्रॉक और ऊपर सरक गई, और गीली चड्डी से उसकी नन्हीं चूत की शक्ल साफ़ दिख रही थी – गुलाबी, टाइट। मैं उसके पास बैठ गया, घुटने उसके घुटनों से सटे।

“देखो ना, चड्डी अभी भी गीली है… खुजली होगी बेटा।”

वो शरमाकर हँस दी। मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसे गोद में बिठा लिया। मेरा खड़ा लंड उसके गांड के नीचे दब गया, गर्म और सख्त। वो सिहर गई, लेकिन हटी नहीं। मैंने उसके गाल पर फिर किस किया, होंठों को चूसा। वो जल्दी-जल्दी खाना खाकर उठ गई, लेकिन उसकी आँखों में वो उत्सुकता और बढ़ गई थी।

उस शाम जब वो जाने लगी, तो मैं और बीवी बेडरूम में थे। बीवी का सर दर्द ठीक हो गया था, और मैंने उसे जोर-जोर से चोदा था – तेज़ धक्कों से, उसके चीखते हुए।

जैसे ही मैं झड़ा और उसके ऊपर से हटा, दरवाज़े पर खटखट हुई – “अंकल, मैं घर जा रही हूँ… पापा-मम्मी आ गए।” मुझे लगा शायद उसने दरवाज़े से झांककर सब देख लिया होगा। दिल ज़ोर से धड़का, लेकिन अंदर से एक अजीब सी खुशी हुई।

अगले दिन से उसकी मम्मी ने मुझे ट्यूशन पढ़ाने को कहा। शाम छह बजे फिक्स। मैं ऑफिस से जल्दी आया, नहाकर फ्रेश होकर बैठा। ठीक छह बजे चिड़िया आई – पिंक स्लीवलेस फ्रॉक में, गला गहरा, कंधे और बाजू नंगे।

जैसे ही वो टेबल पर झुककर सवाल पूछती, उसके छोटे स्तन झलक जाते – निप्पल साफ़ दिखते। मैंने उसकी नंगी जाँघ पर हाथ रखा। वो हँस दी, हाथ नहीं हटाया। धीरे-धीरे हाथ ऊपर सरका, चड्डी तक पहुँचा तो वो रुक गई, मुझे देखा और फुसफुसाई – “अभी नहीं अंकल…”

मैं दंग रह गया। ये मासूम सी लड़की सब समझती थी!

फिर धीरे-धीरे सब बढ़ता गया। कभी पीठ पर हाथ फेरना, कभी कमर दबाना, कभी गाल या होंठों पर किस। वो भी मज़ा लेने लगी, शरमाती तो थी लेकिन मना नहीं करती। एक दिन डाइनिंग टेबल पर मैं काम कर रहा था, वो पास आई और बोली, “ये सवाल आप भी नहीं कर सकते, इतना मुश्किल है।”

मैंने उसकी कमर में हाथ डालकर खींचा, “तुम्हें अभी पता नहीं मैं क्या-क्या कर सकता हूँ।”

वो शरमाई, “कब बताएँगे अंकल?”

मैंने उसकी गांड मसलते हुए कहा, “बोलो तो अभी बता दूँ… तैयार हो?”

वो चुप रही, लेकिन हटी नहीं। मैंने फ्रॉक के अंदर हाथ डाला, चड्डी के ऊपर से उसकी चूत सहलाने लगा – गर्म, नरम। वो सिसकारी, “अंकल… कोई देख लेगा।”

“कोई नहीं देखेगा… बस मज़ा लो।”

अगले दिन बीवी बच्चों को लेकर मायके चली गई एक हफ्ते के लिए। चिड़िया को पता नहीं था। शाम को वो आई – सफ़ेद ट्रांसपेरेंट फ्रॉक में, अंदर कुछ नहीं पहना। उसके निप्पल और चूत की शक्ल साफ़ दिख रही थी। मैंने दरवाज़ा अंदर से बंद किया।

“आंटी कहाँ हैं?”

“मायके गई हैं… पूरे एक हफ्ता। अब सिर्फ़ तुम और मैं।”

वो थोड़ा घबराई, फिर शरमाती हुई मुस्कुराई, “तो आज वो कल वाला सवाल अच्छे से समझा दोगे ना?”

मैंने उसे गोद में उठाया, बेडरूम में ले गया। वो हँसती हुई मेरी गोद में लिपट गई। मैंने लुंगी ऊपर की तो मेरा मोटा, सख्त लंड बाहर आ गया। वो हैरानी से देखती रही, आँखें बड़ी-बड़ी।

“अंकल, ये हमेशा ऐसे क्यों हो जाता है मेरे सामने?”

“क्योंकि तुम बहुत हॉट हो चिड़िया… आओ, छूकर देखो।”

पहले तो शरमाई, फिर उसके छोटे हाथ ने उसे पकड़ लिया। नरमी से दबाने लगी, ऊपर-नीचे करने लगी। मैंने उसकी फ्रॉक उतार दी। आज ब्रा भी नहीं। सिर्फ़ लाल चड्डी। उसके नंगे स्तन चूसने शुरू किए – जीभ से निप्पल चाटा, काटा। वो पहली बार ज़ोर से “आह्ह… अंकल…” कहकर सिहर उठी।

“ये क्या कर रहे हो…”

“वही जो उस दिन आंटी के साथ कर रहा था… मज़ा आएगा, वादा है।”

मैंने उसके होंठ चूसे, जीभ अंदर डाली। गांड मसली, फिर चड्डी नीचे सरका दी। उसकी गुलाबी, बिल्कुल कच्ची चूत सामने थी – एक भी बाल नहीं, टाइट और गीली। मैंने टाँगें फैलाईं और जीभ से चाटना शुरू किया – क्लिट पर घुमाई, अंदर डाली। वो तड़प उठी, कमर ऊपर उठाने लगी, सिसकारियाँ भरने लगी।

“अंकल… आह्ह… क्या हो रहा है… बहुत अच्छा लग रहा है… मत रुको…”

मैंने अपना लंड उसके मुँह के पास किया। वो बिना कहे चूसने लगी – अनाड़ी तरीके से, लेकिन इतने प्यार से कि मैं पागल हो गया। फिर मैं उसके ऊपर चढ़ा। लंड का सुपाड़ा उसकी छोटी चूत पर रखा तो वो डर गई।

“अंकल… दर्द होगा… बहुत बड़ा है…”

“पहली बार थोड़ा होता है बेटा… फिर सिर्फ़ मज़ा… मैं धीरे करूँगा।”

मैंने धीरे-धीरे दबाया। वो इतनी टाइट थी कि लगा फट जाएगी। आधा सुपाड़ा अंदर गया तो वो चीखी, लेकिन मैंने होंठ चूसकर चुप कराया। फिर एक झटका… पूरा लंड अंदर। वो फफक कर रो पड़ी, आँसू निकल आए। लेकिन मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे चोदने लगा। दस-पंद्रह धक्कों में उसका दर्द मज़े में बदल गया। वो खुद कमर हिलाने लगी, नाखून मेरी पीठ पर गड़ाने लगी।

“अंकल… आह्ह… और ज़ोर से… तेज़… बहुत मज़ा आ रहा है…”

उस दिन मैंने उसे तीन बार चोदा। पहली बार उसकी चूत में गहराई तक धक्के मारकर झड़ा, गरम वीर्य से भर दिया। दूसरी बार उसकी गांड में उंगली करके, क्लिट सहलाते हुए।

तीसरी बार उसके मुँह में – वो निगल गई, मुस्कुराते हुए।

वो पूरी रात मेरे साथ नंगी सोई, मेरे सीने से चिपकी, मेरे लंड को हाथ में पकड़े। सुबह उठी तो फिर माँगने लगी – “अंकल, फिर से…”

उसके बाद तो हर शाम ट्यूशन नहीं, सच्ची जवानी की क्लास चलती। कभी किचन में झुकाकर पीछे से, कभी सोफे पर टाँगें कंधों पर उठाकर, कभी बाथरूम में नहाते हुए उसके स्तनों पर साबुन मलते हुए।

चिड़िया कली से फूल बन गई थी… पूरी खिली हुई, रसीली। और वो फूल को मैं रोज़ पानी देता था – अपने गरम, गाढ़े वीर्य से, उसकी चूत, गांड, मुँह, हर जगह।

वो छोटी जवानी का असली मज़ा… आज भी याद करके लंड खड़ा हो जाता है, और मन करता है फिर से वो दिन जी लूँ।

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