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मायके से लौटी हॉट बीवी के गोरे मम्मे और टाइट कमीज में चूत चाटना

Maayke Se Lauti Hot Biwi Ke Gore Mamme Aur Tight Kamiz Mein Chut Chatna

अमीर की खूबसूरत हॉट बीवी सोमी मायके से लौटी तो घर में आग लग गई! टाइट स्लवार कमीज में झांकते गोरे मम्मे, गर्म किसिंग, चूत चाटना और आम के जूस से भीगा नंगा बदन – ये हिंदी सेक्स स्टोरी है पति-पत्नी की जंगली रात की, जहां वासना की कोई सीमा नहीं। पढ़ें और उत्तेजित हो जाएं! #हिंदीएरोटिक #बीवीचुदाई

अमीर, २५ साल का जवान और अमीर लड़का, जिसकी जिंदगी में सब कुछ था – बड़ा सा घर, लग्जरी कारें, और वो खूबसूरत बीवी सोमी, जो उसकी जान थी। लेकिन पिछले हफ्ते सोमी मायके चली गई थी, अपनी मां के बीमार होने की वजह से। घर सूना पड़ गया था। रातें कट रही थीं, लेकिन अमीर का लंड बेचैन हो रहा था। वो बिस्तर पर लेटा लेटा सोमी की यादों में खो जाता – उसकी वो नाजुक कमर, गोरी चिकनी त्वचा, जो छूने पर रेशमी लगती थी, और वो आग लगाने वाली स्माइल, जो बस एक नजर में उसके होश उड़ा देती।

पिछली बार “नीलू की फुद्दी” वाली स्टोरी में तो नीलू को पटाया था, लेकिन गोरि चिकनी अपनी बीवी की तो बात ही अलग थी ना? सोमी का बदन जैसे जन्नत का टुकड़ा था – नरम, गर्म, और हमेशा तैयार। अमीर ने कई रातें खुद को संभालने की कोशिश की, लेकिन लंड को सुकून न मिला। वो फोन पर बातें करता, लेकिन आवाज से क्या होता है? उसे चाहिए था वो स्पर्श, वो गर्माहट, वो पागलपन जो सिर्फ सोमी ही दे सकती थी।

कल शाम को सोमी लौटने वाली थी। अमीर ने स्टेशन पर इंतजार किया, घड़ी की सुई पर सांस थामे। ट्रेन आई, भीड़ में से सोमी निकली – उफ्फ्फ! साड़ी नहीं पहनी थी, स्लवार कमीज में थी, लेकिन कैसी कमीज! टाइट फिटिंग वाली, जो उसके कर्व्स को हाईलाइट कर रही थी, और डीप नेक वाली, जिसमें से उसके गोरे-गोरे मम्मे झांक रहे थे।

रास्ते में ही उसने ऊपर के तीन बटन खोल दिए थे, शायद गर्मी की वजह से, लेकिन लग रहा था जैसे जानबूझकर अमीर को ललकार रही हो। उसके बाल खुले थे, हवा में लहरा रहे, और चेहरे पर वो थकी लेकिन शरारती मुस्कान। अमीर की आंखें फटी की फटी रह गईं। दिल की धड़कन तेज हो गई, लंड पैंट में हिलने लगा। सोमी ने उसे देखा, आंखों में चमक आई, और बोली, “क्या देख रहा है हारामी? इतनी जलन हो रही है क्या? घर चल, वहां पूरा देख लेना… सब कुछ तेरे लिए ही तो है।” उसकी आवाज में वो शरारत थी, वो बुलावा जो अमीर को पागल बना देता।

अमीर ने तुरंत सिर हिलाया, हाथ बढ़ाकर उसका बैग ले लिया, जैसे कह रहा हो – हां, बस तुझे ही तो देखना है, छूना है, अपना बनाना है। कार में बैठते ही सोमी ने अमीर का हाथ पकड़ा, उंगलियां आपस में उलझा लीं। “मिस किया ना?” उसने फुसफुसाया। अमीर ने मुस्कुराते हुए कहा, “कितना? तू ना हो तो घर जेल लगता है।”

घर पहुंचते ही अमीर ने दरवाजा बंद किया, कुंडी लगा दी। सोमी अभी जूते भी उतार नहीं पाई थी कि अमीर ने उसे दीवार से सटा लिया। उसका बदन अमीर के सीने से चिपक गया, गर्माहट महसूस हुई। “सोमी… कितना मिस किया तुझे,” अमीर ने फुसफुसाते हुए कहा, आंखों में वो भूख जो दिनों से दबी थी। और फिर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।

सोमी ने भी देर न की – वो भी तो तड़प रही थी मायके में, रातें कट रही थीं उसके बिना। उसकी आंखों में वो जंगली भूख झलक रही थी, जैसे कह रही हो – हां, मुझे भी यही चाहिए, बस तेरा स्पर्श। उसने अमीर के मुंह में अपनी जीभ डाल दी, और दोनों एक-दूसरे का थूक चाटने लगे। उफ्फ, वो किस कितना गर्म था!

सोमी की सांसें तेज हो गईं, उसके हाथ अमीर की कमर पर सरक गए, नाखून हल्के से गाड़ दिए, जैसे पूछ रही हो – और कर ना, मुझे अच्छा लग रहा है, मुझे और चाहिए। अमीर ने महसूस किया उसकी सहमति – उसकी उत्तेजना में, उसके शरीर की वो हलचल में जो कह रही थी – हां, मुझे छू, मुझे अपना बना ले, मुझे तुझमें खो दे।

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अमीर के हाथ सोमी के जिस्म पर फिरने लगे। पहले कमर पर, फिर गांड को जोर से दबाया – उफ्फ, कितनी नरम और गोल! सोमी सिहर उठी, लेकिन मुस्कुराई। अमीर ने उसके मम्मों को पकड़ लिया, कमीज के ऊपर से मसलने लगा। सोमी की कमीज के बटन पहले से खुले थे, लेकिन अमीर ने बाकी को भी खींच-खींचकर खोल दिया।

ब्रा के अंदर से उसके मम्मे बाहर झांकने लगे – गोरे, चिकने, दूध से भरे हुए, जैसे दो रसीले फल। “आह अमीर… हल्के से,” सोमी ने हांफते हुए कहा, लेकिन उसकी आंखें बंद थीं, होंठ काट रही थी – जैसे कह रही हो, और जोर से करो, मुझे मज़ा आ रहा है, मुझे दर्द भरा सुख दो।

अमीर ने पहले उसके मुंह को फिर चूसा, जीभों का खेल खेला, फिर गर्दन पर थूक चाटने लगा। सोमी की सांसें और तेज हो गईं, वो सरक रही थी दीवार पर। उसके हाथ नीचे सरक गए, अमीर की पैंट खोल दी। अंडरवियर के ऊपर से लंड पकड़ लिया – उफ्फ, कितना सख्त हो चुका था! “कम इन… इसे चूसूं?” उसने शरारत से पूछा, हाथ से धीरे-धीरे मuth मारते हुए, जैसे ललकार रही हो।

अमीर ने सिर हिलाया, आवाज में बेचैनी, “हां बीहनचोद, चूस इसे… तेरी मां की तरह चूस, गले तक ले जा।” सोमी ने सेक्सी स्माइल दी, आंखों में चमक, जैसे कह रही हो – ठीक है, तेरी खुशी के लिए, लेकिन बाद में तू भी मेरी चूत का ख्याल रखना।

अमीर गर्दन चाटते हुए नीचे आया। सोमी की कमीज पूरी खींचकर फाड़ दी – टुकड़े हो गए, लेकिन सोमी को फर्क न पड़ा। उसके मम्मों के बीच चाटा – उफ्फ, क्या मस्त मम्मे थे! दूधवाली साली मेरी बीवी… निप्पल्स सख्त हो चुके थे, अमीर ने उन्हें जीभ से घुमाया, दांतों से काटा हल्के से।

सोमी चीखी, “आह्ह्ह… अमीर, मार डालेगा तू!” लेकिन उसके हाथ अमीर के सिर पर दबा रहे थे। सोमी ने भी अमीर की शर्ट फाड़ दी, चाबुकों से निशान बना दिए। पैंट उतार दी। अब सोमी ब्रा और पैंटी में थी, अमीर खड़ा लंड वाला नंगा कुत्ता। सोमी झुकी, लंड मुंह में लिया और गले तक ले गई। थूक से सना दिया, लार टपक रही थी। तत्ते दबा-दबाकर चूसने लगी – उसे ये कला अच्छे से आती थी, जीभ से चक्कर लगाती, होंठों से दबाती।

अमीर पागल हो रहा था, कमर हिल रही थी। “आह्ह्ह… और चूस रंडी, तेरी मां से भी चूसवाऊं साली। थरकी हूं तेरा, अपने थूक का लंड चूस कमिनी… चूस रंडी चिनाल… आह फक!” अमीर चिल्ला रहा था, हाथ सोमी के बालों में उलझे। लेकिन सोमी ने रुका नहीं। उसके मुंह से लंड निकालकर बोली, लार से चिपचिपा मुंह चाटते हुए, “हरामी भरवे, मेरी चूत तेरे भाई से चटवा लूं क्या? चाट मेरा भोसड़ा… मुझे तेरा मुंह चाहिए वहां।” उसकी आवाज में वो बुलावा था, वो इच्छा जो कह रही थी – हां, मुझे चाहिए तेरा स्पर्श, तेरी जीभ, तेरा सब कुछ।

अमीर ने सोमी को सोफे पर बिठाया। टांगें खोलकर उसकी चूत खाने लगा। पहले पैंटी के ऊपर से सूंघा – उफ्फ, वो खुशबू, वो गर्माहट! फिर पैंटी साइड की, चूत का दाना चाटने लगा। अंदर दो उंगलियां चला रहा था, घुमाता हुआ।

सोमी ने अमीर का सिर अपनी फुद्दी पर दबा दिया, कमर ऊपर उठा ली। “भोसड़ी वाली कुत्ते, चाट मेरी चिकनी फुद्दी… मेरे थूक चुड़ास चूतिया, खा जा मेरी फुद्दी। जवानी उतार मेरी, इज्जत लूट ले साले… नंगी हूं तेरी कुतिया हूं!” सोमी चिल्ला रही थी, लेकिन उसके शरीर की हर हलचल कह रही थी – जारी रखो, मुझे ये पसंद है, मुझे ये सुख देता है।

अमीर ने महसूस किया उसकी उत्तेजना, उसकी कमर की कम्पनी, जो बता रही थी – हां, मुझे और चाहिए, मुझे चरम तक ले जा। वो जीभ अंदर डालता, चूसता, उंगलियां तेज चलाता। सोमी का रस बहने लगा, सोफा गीला हो गया।

तभी अमीर को ख्याल आया – किचन में आम का जूस था, ठंडा-ठंडा, फ्रिज में रखा। वो बोतल उठा लाया।

सोमी ने आंखें खोलीं, सांसें हांफते हुए मुस्कुराई – “क्या करने वाला है तू, हरामी?” अमीर ने शरारत से कहा, “देख, तेरे जिस्म को और गर्म कर दूंगा। तुझे सिहरा दूंगा।” सोमी ने सिर हिलाया, आंखों में उत्सुकता, जैसे कह रही हो – हां, ट्राई कर ना, मुझे नया सुख दे। अमीर ने जूस की बोतल खोली और सोमी की गर्दन पर उंडेलना शुरू किया। ठंडा जूस उसके गले से बहा, ब्रा में से निकला, चिकने जिस्म पर फैल गया। गोरे पांवों पर से होकर चूत तक टपकने लगा।

सोमी सिहर उठी, शरीर में करंट दौड़ा – “आह… ठंडा लग रहा है, लेकिन मज़ा आ रहा है हरामी! और डाल, मुझे भिगो दे!” अमीर ने जूस को चाटना शुरू किया – गर्दन से, नमक-मीठे स्वाद में, फिर मम्मों तक। ब्रा खींचकर निप्पल्स पर डाला, चाटा। नाभि में जमा हुआ जूस चूसा। और फिर चूत पर – जूस मिक्स हो गया उसके रस से, चाटते हुए अमीर बोला, “तेरी चूत कितनी स्वादिष्ट हो गई… आम का फ्लेवर, उफ्फ!” सोमी हंस पड़ी, लेकिन फिर सिहरने लगी। उसके हाथ अमीर के बालों में उलझ गए, कमर उठी – जैसे कह रही हो, और करो, मुझे ये भा रहा है, मुझे पागल बना रहा है।

अमीर ने जूस से भीगी चूत को फिर चाटा, उंगलियां अंदर डालीं, घुमाईं। सोमी की चीखें गूंजने लगीं, “आह्ह्ह… अमीर, मार डालोगे तू… हां, बस ऐसे ही!”

अब अमीर और बर्दाश्त न कर सका। सोमी को सोफे पर लिटाया, उसकी पैंटी खींच ली – गीली थी, चिपचिपी। ब्रा भी फाड़ दी। नंगा जिस्म चमक रहा था जूस से भीगा हुआ, हर कर्व पर बूंदें लटक रही थीं। अमीर का लंड सीधा खड़ा, रगड़ रहा था चूत पर। “डाल ना अमीर… मुझे चाहिए तेरा, भर दे मुझे,” सोमी ने फुसफुसाया, टांगें फैला लीं, आंखों में विनती। अमीर ने धीरे से अंदर धकेला – उफ्फ, कितनी टाइट और गर्म! जैसे चूत ने लंड को गले लगा लिया।

सोमी की चीख निकली, “आह्ह्ह… हां, भर दे मुझे, धीरे से शुरू कर!” अमीर ने जोर-जोर से ठोकना शुरू किया। सोमी के मम्मे उछल रहे थे, जूस की बूंदें उड़ रही थीं, कमरा चपचाप की आवाजों से गूंज रहा। “चोद मुझे कुत्ते… तेरी बीवी हूं, अपनी रंडी बना ले! और जोर से, फाड़ दे मेरी चूत!” सोमी चिल्ला रही थी, नाखून अमीर की पीठ पर गाड़ रही थी, खरोंचें पड़ गईं।

अमीर ने गति बढ़ाई, पसीना टपक रहा था, “हां साली, तेरी चूत मेरी है… उफ्फ, कितनी गर्म, कितनी चिकनी!” कमरा गंधा गया उनके पसीने, जूस की, और रस की मिश्रित खुशबू से। सोमी की सांसें तेज, शरीर कांप रहा – वो चरम पर पहुंच गई। कमर ऊपर उठी, चूत सिकुड़ गई, “आह अमीर… आ गया मेरा… हां, बस!” रस बह निकला, गर्म लहर। अमीर भी रुका न सका – जोर का धक्का मारा, लंड फड़क उठा, और अंदर ही झड़ गया। “तेरी चूत में ही डाल दिया साली… भर दिया तुझे अपना रस!”

दोनों हांफते हुए लेटे रहे, सोफे पर गीले। अमीर ने सोमी को गले लगा लिया, उसके मम्मों पर हाथ फेरा। “प्यार करता हूं तुझसे, सोमी… तू मेरी जिंदगी है,” अमीर ने कहा, आवाज में संतुष्टि। सोमी ने सिर उसके सीने पर रखा, उंगली से उसके सीने पर घुमाई, “मैं भी… तू बिना तो अधूरा लगता हूं। अगली बार मायके मत जाने दूंगा तुझे, या खुद चला जाऊंगा साथ।” दोनों हंस पड़े, थके लेकिन खुश।

बाहर बारिश शुरू हो गई थी, बूंदें खिड़की पर टपक रही थीं, लेकिन अंदर की गर्मी अभी भी बाकी थी। जवान जिस्म की ये आग, कभी न बुझने वाली – वो प्यार, वो वासना, वो बंधन जो उन्हें एक-दूसरे से जोड़े रखता था। रात भर वो ऐसे ही लिपटे रहे, कभी हल्के किस, कभी फुसफुसाहटें, और सुबह फिर नई शुरुआत।

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