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दीदी की साड़ी उतारी और रात भर चुदाई की

Didi Ki Saree Utari Aur Raat Bhar Chudai Ki

गर्मागर्म चुदाई, चूत में लंड, सिसकारियां और झड़ना – पूरी हिंदी सेक्स कहानी पढ़ें। विक्की की बड़ी दीदी वर्षा बेहद खूबसूरत और सेक्सी हैं। जब जीजू बाहर गए तो दीदी का अफेयर बॉस विकास के साथ शुरू हो गया। लेकिन विक्की ने सब देख लिया और फिर दीदी खुद विक्की के साथ चुदाई करने लगीं।

हैलो दोस्तों, मेरा नाम विक्की है और मैं हरिद्वार का रहने वाला हूँ। ये बात आज से करीब दस साल पुरानी है, जब मैं सिर्फ़ 20 साल का था—युवा, जोशीला, और कॉलेज की ज़िंदगी में मस्ती के रंग में डूबा हुआ। मेरी बड़ी दीदी वर्षा उस वक़्त 25 साल की थीं। वो देहरादून में एक बड़ी कंपनी में HR की जॉब करती थीं। उनकी शादी को अभी दो साल ही हुए थे, और जीजू एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर थे। लेकिन किस्मत से जीजू को बॉम्बे ट्रांसफर होना पड़ा—दो महीने की लंबी ट्रेनिंग।

घर पर अकेले रहने की चिंता में जीजू ने पापा-मम्मी से बात की कि मैं दीदी के पास देहरादून शिफ्ट हो जाऊँ। मेरा कॉलेज भी वहीं था, तो आने-जाने में आसानी रहती। दीदी-जीजू का घर वसंत विहार में था—एक खूबसूरत दो मंजिला घर, बड़ा गार्डन, और पूरी प्राइवेसी। मैं अपना सामान पैक किया और वहाँ पहुँच गया।

दीदी वाकई में किसी सपने की परी थीं। 5 फुट 6 इंच की हाइट, गोरी-चिट्टी त्वचा जो धूप में भी चमकती थी, गोल-गोल चेहरा, और दिव्या भारती जैसी कातिल मुस्कान। उनके लंबे काले घने बाल कमर तक लहराते थे। फिगर तो ऐसा कि देखते ही दिल धड़क जाए—38-36-40। साड़ी में तो वो किसी बॉलीवुड हीरोइन से कम नहीं लगती थीं। पल्लू का आंचल कभी सरकता तो गहरी नाभि और भरे हुए कर्व्स नज़र आते। लेकिन मेरे आने के बाद दीदी का मूड थोड़ा बदल गया। वो पहले जितनी हँसमुख नहीं रहती थीं।

सुबह जल्दी ऑफिस निकल जातीं और शाम को देर से लौटतीं। उनका बॉस, विकास सर—एक विधुर, 5 फुट 11 इंच का लंबा-चौड़ा मर्द, करीब 40 साल की उम्र—हर दिन कार से उन्हें पिक और ड्रॉप करता। वो कभी घर के अंदर नहीं आता था, बस गेट पर हॉर्न बजाता और चला जाता।

एक दिन मेरे दोस्त की शादी में मुझे नरेंद्र नगर जाना पड़ा। प्लान था कि रात रुककर अगले दिन लौटूँगा। लेकिन दोस्तों ने बीयर पी और मस्ती में शर्त लगा ली कि रात को ही देहरादून वापस चलेंगे। रात के बारह बज रहे थे जब मैं बाइक लेकर घर के पास पहुँचा। सिगरेट पीने के लिए मैंने बाइक एक अंधेरे कोने में रोकी। तभी देखा—कोई गेट खोलकर चुपके से घर के पीछे की तरफ़ जा रहा है। मुझे लगा चोर है। दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। मैं चुपके से दीवार फाँदकर छत पर चढ़ गया और टूटे हुए रोशनदान के शीशे से अंदर झाँका।

अंदर दीदी के बेडरूम से हल्की हँसी और बातें आ रही थीं। रोशनदान से झाँकते ही मेरा दिमाग सुन्न पड़ गया। दीदी आईने के सामने खड़ी होकर मेकअप कर रही थीं—लाल चमकदार बनारसी साड़ी, भारी गहने, मंगलसूत्र, नथ, झुमके, कंगन, पायल, कमरबंद—पूरी नई दुल्हन बनी हुई थीं। और बेड पर जीजू का कुर्ता-लुंगी पहने विकास सर आराम से बैठे थे।

विकास सर ने गहरी आवाज़ में कहा, “वर्षा डार्लिंग, आज तो तुम दुल्हन बनकर किसी हूर से कम नहीं लग रही हो। कितनी हॉट लग रही हो… जल्दी आओ ना मेरे पास।”

दीदी शरमाते हुए मुस्कुराईं, “बस थोड़ा इंतज़ार करो ना… आज तुम्हारी दुल्हन पूरी तरह सज-धज कर तुम्हारे हवाले होगी।”

विकास सर ने बताया कि मेरे आने की वजह से पिछले पंद्रह दिन से वो मिल नहीं पाए थे। आज आख़िरकार मौका मिला। दीदी हँसकर बोलीं, “हाँ, विक्की तो कल आएगा… आज पूरी रात हमारी है।”

फिर दोनों नज़दीक आए। विकास सर ने दीदी को गोद में उठा लिया और बेड पर लिटा दिया। दीदी ने शरारत भरी आवाज़ में कहा, “अरे, दुल्हन हूँ… मुंहदिखाई का रस्म तो निभाओ।”

विकास सर मुस्कुराए, लुंगी का नाड़ा ढीला किया और अपना मोटा, लंबा लंड बाहर निकाल लिया। वो इतना बड़ा और मोटा था कि दीदी ने पहले तो आँखें बंद कर लीं। फिर धीरे-धीरे होंठों से छुआ। दोनों की साँसें तेज़ हो गईं। विकास सर ने बहुत प्यार से दीदी के बालों में हाथ फेरते हुए उन्हें गाइड किया। दीदी भी अब पूरी तरह मूड में आ चुकी थीं। वो जीभ से चाटने लगीं, होंठों से चूमने लगीं, और पूरी तरह उसे मुँह में ले लिया। कमरे में सिर्फ़ चूसने की आवाज़ें और दोनों की तेज़ साँसें गूंज रही थीं।

फिर विकास सर ने दीदी की साड़ी धीरे-धीरे खोली—पल्लू सरकाया, प्लेट्स खोलीं, पेटीकोट का नाड़ा ढीला किया। ब्लाउज़ के हुक खोले, ब्रा उतारी। दीदी अब पूरी तरह नंगी थीं—सिर्फ़ गहनों में। नथ हिल रही थी, झुमके झूल रहे थे, पायल की छन-छन सुनाई दे रही थी। वो स्वर्ग की अप्सरा लग रही थीं। विकास सर ने उनके पूरे बदन को किस किया—गर्दन, कंधे, ब्रेस्ट्स, पेट, जाँघें। निप्पल्स को मुँह में लेकर चूसा। दीदी की साँसें तेज़ होती गईं, वो सिसकारियाँ भरने लगीं—“आह… विकास… धीरे…”

दीदी ने भी उनका लंड हाथ में लिया और सहलाने लगीं। दोनों एक-दूसरे को पागल कर रहे थे। आख़िरकार विकास सर ने दीदी की टाँगें चौड़ी कीं और अपना मोटा लंड दीदी की गीली चूत पर रगड़ा। दीदी ने कमर ऊपर उठाई और खुद ही उसे अंदर ले लिया। “आह… कितना मोटा है…” दीदी की मादक सिसकारी कमरे में गूंजी।

दोनों ने खूब प्यार किया—कभी धीरे-धीरे, कभी तेज़ धक्कों से। दीदी कई बार झड़ चुकी थीं, उनका बदन पसीने से तर था। आख़िर में विकास सर भी दीदी के अंदर ही झड़ गए। दोनों एक-दूसरे से लिपटकर लेटे रहे, प्यार भरी बातें करते। पूरी रात में चार बार प्यार किया। सुबह होने से पहले विकास सर चले गए। मैंने अपना फोन निकाला और पूरी रात का सब कुछ रिकॉर्ड कर लिया था।

उस रात के बाद दीदी मेरी नज़रों में सिर्फ़ दीदी नहीं रहीं—एक बेहद सेक्सी, कामुक औरत लगने लगीं। मैंने पहले भी सेक्स किया था, लेकिन अपनी दीदी के बारे में कभी ऐसा नहीं सोचा था।

अगले दिन मैं सुबह छह बजे घर पहुँचा। दीदी ने दरवाज़ा खोला तो घबरा गईं। उनकी चाल थोड़ी अजीब थी, गर्दन और छाती पर लाल-लाल किस के निशान साफ़ दिख रहे थे। वो शर्मा कर कमरे में चली गईं। मैं मन ही मन मुस्कुराया—रात भर की मस्ती के निशान थे।

शाम को मैंने मज़ाक में कहा, “दीदी, मैं तो रात बारह बजे ही आ गया था।” दीदी का चेहरा सफ़ेद पड़ गया। लेकिन मैंने तुरंत कहा, “अरे मज़ाक कर रहा हूँ, बीयर ज्यादा पी ली थी, दोस्त के यहाँ रुक गया।” दीदी को राहत की साँस आई।

कुछ दिन बाद दीदी ने कहा, “विक्की, विकास सर के घर रेनोवेशन चल रहा है, वो आज रात हमारे यहाँ रुकना चाहते हैं।” मैंने पहले मना किया, लेकिन दीदी ने इतने प्यार से, आँखों में आँसू भरकर कहा कि मैं मान गया। दीदी बहुत खुश हो गईं। रात को प्लान बना कि मैं बाहर वाले कमरे में सोऊँगा और दीदी अंदर। दीदी ने मुझे दूध का ग्लास दिया। विकास सर ने उसमें कुछ मिलाया था—नींद की गोली शायद—लेकिन मैंने दूध नहीं पिया। बिल्ली ने ग्लास गिरा दिया।

रात को दीदी ने चुपके से चेक किया कि मैं सो गया हूँ। फिर विकास सर को अंदर बुलाया। दोनों दीदी के कमरे में चले गए। मैं फिर रोशनदान से झाँकने लगा।

इस बार दीदी ने बहुत सेक्सी लाल साड़ी पहनी थी—लो-कट ब्लाउज़, नाभि पूरी दिख रही थी। विकास सर ने दीदी को गोद में उठाया, दीवार से सटाकर खड़े-खड़े किस करना शुरू किया। साड़ी धीरे-धीरे खोली, ब्लाउज़ उतारा। दीदी के भरे हुए ब्रेस्ट्स आज और भी भारी लग रहे थे। जब विकास सर ने निप्पल्स दबाए तो उनमें से हल्का-सा दूध निकला। दीदी शर्मा गईं और बोलीं, “बाद में बताऊँगी…”

दोनों ने खूब मस्ती की। विकास सर ने दीदी को बेड पर लिटाया, उनकी चूत को जीभ से चाटा, दीदी की सिसकारियाँ कमरे में गूंज रही थीं। फिर दीदी ऊपर आ गईं—विकास सर के मोटे लंड पर सवार होकर उछलने लगीं। दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे में पूरी तरह डूबे हुए। दीदी कई बार झड़ीं, आख़िर में विकास सर भी दीदी के अंदर झड़ गए। दोनों थककर लिपट गए।

अचानक दीदी की नज़र रोशनदान पर पड़ी। वो मुझे देखकर घबरा गईं। विकास सर गहरी नींद में सो चुके थे। दीदी चुपके से सिर्फ़ चादर लपेटे बाहर आईं। मुझे देखते ही रोने लगीं और मेरे गले लग गईं। उनका गर्म बदन मेरे जिस्म से सटा हुआ था। “विक्की… मुझे माफ़ कर दो… मैं कमज़ोर पड़ गई थी… लोनली थी…”

मैंने उन्हें सांत्वना दी, उनके बालों में हाथ फेरा। दीदी ने मेरी आँखों में देखा और धीरे से मेरे होंठ चूम लिए। मैं हैरान रह गया, लेकिन मेरे अंदर का जज़्बा भी जाग उठा। मैंने भी जवाब में उन्हें किस किया—गहरा, लंबा किस।

दीदी फुसफुसाईं, “विक्की… अब मुझे सिर्फ़ तुम्हारा प्यार चाहिए। विकास को मैं हमेशा के लिए खत्म कर दूँगी।”

हम चुपके से कमरे में गए। मैंने दीदी को बेड पर लिटाया। बहुत प्यार से उनके बदन को छुआ—गर्दन, ब्रेस्ट्स, पेट, जाँघें। निप्पल्स चूसे तो हल्का मीठा दूध का स्वाद आया। दीदी की साँसें फिर तेज़ हो गईं। दीदी ने मेरे कपड़े उतारे, मेरे 7 इंच के लंड को हाथ में लिया और प्यार से सहलाने लगीं। मैंने अपना लंड उनकी गीली चूत पर रगड़ा। दीदी ने खुद कमर ऊपर उठाकर मुझे अंदर ले लिया।

हमने बहुत देर तक प्यार किया—कभी मैं ऊपर, कभी दीदी। दीदी की मादक सिसकारियाँ, उनका गर्म बदन, चूत की टाइट गर्माहट—सब कुछ स्वर्ग से भी बेहतर था। दीदी कई बार झड़ीं, मैं भी आख़िर में दीदी के अंदर ही झड़ गया। हम लिपटकर सो गए।

अगले दिन दीदी ने विकास सर को साफ़ मना कर दिया। हम दोनों के बीच एक नया रिश्ता शुरू हो गया—गहरा प्यार और बेइंतहा सेक्स का। दीदी अक्सर कहतीं, “विक्की, तुम्हारा प्यार ही असली है… बाकी सब झूठ था।”

बस यही थी मेरी और दीदी की वो ख़ास कहानी—बदले की नहीं, सच्चे प्यार की जीत।

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