चाची की गर्म मालिश से चुदाई तक- भतीजे ने चाची को घोड़ी बनाया
Chachi Ki Garam Massage Se Chudai Tak – Bhatije Ne Chachi Ko Ghodi Banaya
जॉइंट फैमिली में चाची की खूबसूरती पर फिदा 19 साल का रिकी चुपके से उन्हें निहारता है। एक रात मसाज से शुरू हुई वो आग, जो चाची के रूम में जाकर भड़क उठी। बॉब्स, चूत, गांड – हर पल का जादू! पढ़ें ये रियल हिंदी इरोटिक स्टोरी और मुठ मारें।
नमस्ते दोस्तों, मैं रिकी हूँ। मेरी उम्र अभी २२ साल है और मैं एक बी.टेक का स्टूडेंट हूँ। ये मेरी पहली और बिल्कुल रियल स्टोरी है, जो आज से ठीक तीन साल पहले की है। अगर ये कहानी आपको पसंद आए, तो जरूर मेल करना। मैं आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार करूँगा, खासकर अगर कोई लेडी या गर्ल मुझसे कनेक्ट होना चाहे।
दोस्तों, वो दौर था जब मैं १९ साल का था – कॉलेज की शुरुआत, हॉरमोनल उथल-पुथल, और घर की जॉइंट फैमिली में वो राज जो कभी खुलने वाला नहीं था। हमारा घर बड़ा था, लेकिन दिल छोटा – चाचा का बिजनेस दिल्ली में था, तो वो महीनों घर से दूर रहते। जब भी आते, चाची के साथ उनका रिश्ता ठंडा सा रहता। झगड़े, तकरारें, और रातें अलग-अलग बिताना।
चाची, जिनकी उम्र ३० के आसपास थी, वो घर की रानी सी लगतीं। लंबी हाइट, गोरी रंगत, काले लहराते बाल जो कमर तक लहराते। उनकी आँखें बड़ी-बड़ी, होंठ गुलाबी, और बॉडी… उफ्फ, वो तो परफेक्ट कर्व्स वाली – ३६-२८-३८ का फिगर, जो साड़ी में भी हर मर्द को दीवाना बना दे। उनकी एक छोटी बेटी थी, बस ४ साल की, जो चाची की गोद में खेलती रहती। लेकिन चाची की उदासी, वो अकेलापन, मुझे हमेशा खींचता।
मैं बचपन से ही चाची का फैन था। स्कूल के दिनों में भी, जब वो साड़ी पहनकर रसोई में काम करतीं, मैं चुपके से उनकी कमर की लचक, चूड़ियों की खनक को निहारता। लेकिन बड़े होने पर ये नजरें और गहरी हो गईं। हमारा बाथरूम नीचे था, और चाची नहाने जातीं तो मैं दरवाजे के पास खड़ा हो जाता। वो जानबूझकर धीरे-धीरे नहातीं, जैसे जानती हों कि कोई उन्हें देख रहा है। पानी की धार उनके नंगे बदन पर सरकती, वो गीले बाल पीठ पर चिपके, ब्रेस्ट्स की गोलाई पानी से चमकती।
मैं छिपकर देखता, दिल की धड़कनें तेज, लंड कड़क हो जाता। चाची को पता था – कभी-कभी वो मुस्कुरा देतीं, लेकिन कभी कुछ कहतीं नहीं। ये सिलसिला चलता रहा, मेरी रातें मुठ मारने में बीततीं, चाची के नाम लेते हुए।
एक रात, बात तीन साल पहले की है। गर्मी का मौसम था, बिजली चली हुई थी। चाची अपनी बेटी के साथ सो रही थीं, उनका रूम मेरे रूम के बिल्कुल बगल में। बेटी सो चुकी थी, चाची की साँसें धीमी। मैं नींद न आने की बहाना बनाकर उनके रूम में घुस गया। दरवाजा खुला था, चाँदनी रात की रोशनी कमरे में बिखरी। चाची उलटी लेटी थीं, साड़ी की चोली ढीली, ब्रेस्ट्स ऊपर-नीचे हो रहे।
मैं बिस्तर के पास खड़ा हो गया, बस निहारने लगा। उनकी स्किन चाँदनी में चमक रही, निप्पल्स चोली के ऊपर से उभरे हुए। मेरा हाथ अपने आप लंड पर चला गया, लेकिन तभी… चाची की आँखें खुलीं। वो सीधे उठ बैठीं, और धीमी आवाज में बोलीं, “रीकी, यहाँ क्या कर रहे हो? इतनी रात को?”
मैं घबरा गया, चेहरा लाल, दिल धक-धक। “क…कुछ नहीं चाची, बस पानी पीने आया था,” झूठा बहाना बनाया और भाग आया अपने रूम में। दरवाजा बंद किया, लेट गया, लेकिन नींद कहाँ? चाची का चेहरा, वो ब्रेस्ट्स, सब आँखों में घूम रहे। आखिरकार, हाथ लंड पर गया, कल्पना में चाची को छुआ, और मुठ मारकर सो गया। गर्मी का पसीना, थकान, और वो अपराधबोध – सब मिलकर रात कट गई।
अगले दिन सुबह से ही माहौल अजीब था। चाची मुझे देखकर मुस्कुरातीं, लेकिन आँखों में कुछ छिपा सा। घर में सब व्यस्त – मम्मी-पापा बाजार गए, चाचा दिल्ली में। दोपहर हुई, चाची ऊपरी कमरे में कपड़े प्रेस कर रही थीं। वो पुराना कमरा, धूल भरा, लेकिन अकेलेपन का आश्रय। मैं भी ऊपर चला गया, बहाने से। चाची ने देखा, लेकिन कुछ न कहा।
मैं उनके पास बैठ गया, कुर्सी पर। हवा में सिलाई मशीन की आवाज, चाची की साड़ी की खुशबू – चंदन वाली। थोड़ी देर सन्नाटा रहा। फिर चाची ने प्रेस बंद किया, पीठ सीधी की, और बोलीं, “रीकी, मेरी कमर में बहुत दर्द हो रहा है। कल रात सोते वक्त मुड़ गई लगता है। नीचे से वो तेल की शीशी ला दे ना, प्लीज।”
मैंने हामी भरी, दिल में धड़कनें तेज। नीचे जाकर शीशी लाई – सरसों का तेल, गर्म करने वाला। चाची बेड पर उलटी लेट गईं, साड़ी की चोली ऊपर सरका ली। पीठ नंगी, चिकनी, गोरी। “रीकी, प्लीज ये तेल लगा दे। मेरा हाथ पीछे नहीं मुड़ता,” उनकी आवाज नरम, जैसे कोई न्योता।
मैंने शीशी खोली, तेल उंगलियों पर लिया, और धीरे-धीरे उनकी पीठ पर लगाने लगा। स्किन इतनी मुलायम, गर्माहट ऐसी कि मेरे हाथ काँपने लगे। चाची ने चोली और ऊपर सरकाई, ब्रा की पट्टी दिखी। मैंने हिम्मत जुटाई, बोला, “चाची, ब्रा का हुक गंदा हो जाएगा तेल से।” वो हल्के से हँसीं, “तो खोल दे ना, बेटा। कौन देख रहा है?”
मेरा दिल बैठा गया। उंगलियाँ काँपती हुईं, हुक खोला। ब्रा ढीली हो गई, पीठ पूरी नंगी। अब मैंने खुलकर मालिश की – कंधों से कमर तक, गोल-गोल हाथ फेरा। चाची की साँसें गहरी हो रही थीं, बॉडी रिलैक्स। लेकिन मेरा लंड पैंट में तन गया, दर्द करने लगा।
तभी चाची बोलीं, “बस कर रिकी, अब ठीक है।” वो उठ बैठीं, ब्रा अभी भी ढीली। ब्रेस्ट्स चोली में उभरे, परफेक्ट गोल, भरे-भरे। मैं घूरने लगा, नजर हट न सकी। चाची ने मेरी नजर पकड़ी, आँखों में शरारत। धीरे से बोलीं, “क्या देख रहे हो इन्हें इतना? छूकर देखना चाहते हो क्या?”
मेरा चेहरा जल गया, लेकिन हिम्मत हुई। “हाँ चाची… बहुत दिनों से मन में था।” वो करीब सरकीं, मेरा हाथ पकड़ा, और सीधे अपने ब्रेस्ट पर रख दिया। “धीरे-धीरे, राजा। दर्द न हो,” फुसफुसाईं। मैंने निप्पल्स को उँगलियों से सहलाया, मसला। वो इतने सॉफ्ट, जूसी – जैसे रसीले फल।
चाची की सिसकारियाँ शुरू हो गईं, “आह… रिकी… हल्के से…” उनकी साँसें तेज, बॉडी सिहर रही। मैंने दूसरा हाथ भी लगाया, दोनों ब्रेस्ट्स को दबाया, चूसा। पाँच-दस मिनट ये जादू चला – चाची की आँखें बंद, होंठ काटे।
तभी नीचे से मम्मी की आवाज आई, “रीकी! कहाँ हो बेटा?” हम दोनों चौंके।
चाची ने जल्दी चोली संभाली, ब्रा हुक की। मैं उदास, नीचे भागा। लेकिन चाची ने मेरी ओर देखा, मुस्कुराईं – वो मुस्कान जो वादा थी। “मेरा राजा, मूड खराब मत कर। आज रात, जब सब सो जाएँ, ठीक १२ बजे मेरे रूम में आ जाना। दरवाजा खुला रहेगा।” मेरी तो जान में जान आ गई। मैं नीचे आया, लेकिन दिमाग में सिर्फ चाची।
शाम ढली, रात हुई। खाना खाया सबने, बातें कीं। चाची सामान्य लग रही थीं, लेकिन उनकी नजरें मुझ पर ठहरतीं। रात ११ बजे सब सो गए। मैं अपने रूम में लेटा, घड़ी देखता – ११:३०, ११:४५… मेरा लंड ७ इंच का कड़क, गर्म, पैंट फाड़ने को। कल्पना में चाची की बॉडी घूम रही। ठीक १२ बजे, मैं चुपचाप बाहर निकला। हॉल में सन्नाटा, सिर्फ क्रिकेट की टिड्डियाँ। चाची का दरवाजा खुला, अंदर रेड लाइट की हल्की चमक। वो बेड पर लेटी थीं, रेड सिल्क का नाइट गाउन पहना – वो मटेरियल बॉडी से चिपका, ब्रेस्ट्स की शेप साफ, कूल्हों की गोलाई हाईलाइट।
चाची सोने का नाटक कर रही थीं, लेकिन साँसें बतातीं – बेचैनी, उत्साह।
मैं बिस्तर पर चुपचाप लेट गया, उनका बगल। हाथ धीरे से उनके ब्रेस्ट पर रखा। चाची सिहरीं, लेकिन आँखें बंद। मैंने गाउन खोला – अंदर कुछ नहीं, नंगी स्किन। एक ब्रेस्ट पकड़ा, मुंह लगाया, चूसा। निप्पल कठोर, स्वाद नमकीन-मीठा। “आह… रिकी…” चाची की सिसकारी। दूसरा हाथ नीचे सरका, पैंटी के अंदर। चूत गीली, स्लिपरी, गर्म। उंगली अंदर की, बाहर – चाची पागल, कमर मरोड़ने लगीं। “और… तेज… मेरा राजा…” उन्होंने मेरे कपड़े उतारे, शर्ट, पैंट। मेरा लंड बाहर आया, वो उसे देख मुस्कुराईं। “कितना बड़ा… परफेक्ट।”
मैंने उनकी पैंटी उतारी – चूत साफ, गुलाबी, रस टपकता। मैं झुका, जीभ लगाई। हर फोल्ड को चाटा, क्लिट को चूसा। चाची चीखीं, “आह्ह… स्वर्ग… मत रुक…” उनकी उंगलियाँ मेरे बालों में। वो इतनी वाइल्ड हो गईं कि मुझे धक्का देकर लिटा दिया। मेरा अंडरवियर निकाला, लंड मुंह में लिया। उनका मुंह गर्म, जीभ घुमाती, चूसती – जैसे आइसक्रीम। मुझे लगा, कंट्रोल खो दूँगा। “चाची… बस…” लेकिन वो न रुकीं।
फिर मैंने चाची को लिटाया। लंड उनकी चूत पर रगड़ा – गीलापन महसूस हुआ। “रीकी, धीरे… हर इंच फील करना है,” वो बोलीं। “टाँगें खोलो चाची,” मैंने कहा। उन्होंने फैला दीं – वो दृश्य, नंगी टाँगें, गीली चूत। एक धक्का – आधा अंदर। चाची सिहरीं, नाखून मेरी पीठ पर। “दर्द… लेकिन अच्छा…” फिर धीरे-धीरे पूरा। अंदर की टाइटनेस, गर्माहट – स्वर्ग। मैंने पिस्टन की तरह अंदर-बाहर किया।
चाची नीचे से धक्के देतीं, “हाँ… जोर से… फाड़ दे…” उनकी चीखें दबीं, लेकिन तेज। ब्रेस्ट्स उछलते, पसीना चमकता। १०-१५ मिनट चला ये – मैं थक गया, सीधा लेटा।
चाची ऊपर आईं। मेरा लंड अभी भी कड़क। वो उस पर बैठीं, धीरे-धीरे नीचे सरकीं। “आह… भरा हुआ…” ऊपर-नीचे होने लगीं – बॉडी लहराती, ब्रेस्ट्स कूदते। उनकी सिसकारियाँ तेज, “रीकी… कमाल… तेरा लंड जादू है…” उनका ऑर्गेज्म आया – बॉडी काँपी, चूत सिकुड़ी, रस बहा। वो गिर पड़ीं मेरे ऊपर, साँसें तेज। “अब तू ऊपर… मुझे और चोद…”
मैंने कहा, “चल मेरी जान, घोड़ी बन।” चाची मुस्कुराईं, घुटनों पर आईं – गांड ऊपर, चूत गीली चमकती। मैंने पीछे से लंड डाला, जोरदार धक्के। प्लाप-प्लाप की आवाज। उनकी गांड की गोलाई, कमर की लचक। फिर मैंने गीला लंड निकाला, गांड पर रगड़ा। “चाची… अंदर?” वो पीछे मुड़ीं, आँखों में आग। “हाँ… पूरा… लेकिन धीरे।”
मैंने धकेला – टाइट, दर्दभरी गर्मी। चाची चीखीं, “आह… फट रही… लेकिन जारी रख…” हर धक्के में प्लेजर, उनकी चीखें मिक्स – दर्द और मजा। मेरा क्लाइमैक्स नजदीक। “चाची… आने वाला…” जल्दी निकाला, गांड पर झाड़ा – गर्म स्पर्म, चिपचिपा, बहता।
हम दोनों नंगे लेटे रहे, बॉडीज चिपकीं, पसीना सुखता। चाची ने सिर मेरे कंधे पर रखा, फुसफुसाया, “ये हमारा राज है राजा… कभी किसी को न बताना। फिर मिलेंगे, और ज्यादा जंगली।” मैं चुपचाप लौटा अपने रूम। वो रात आज तक याद है – हर डिटेल, हर सिसकारी। दोस्तों, स्टोरी कैसी लगी? ईमेल जरूर करना। अगर कोई लेडी या गर्ल मुझसे चुदवाना चाहे, तो बेझिझक लिखो। प्राइवेसी गारंटीड।
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