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मौसेरी बहन आलिया के साथ पहली चुदाई

19 साल के सुधाकर ने अपनी 18 साल की गोरी मौसेरी बहन आलिया को स्लीपिंग पिल्स पिलाकर रात भर चोदा और अपनी पहली चुदाई की। कुंवारी चूत फाड़ी, रस निकला, फिर आलिया नींद में भी कमर हिलाकर पूरी रंडी बन गई। गांव से लखनऊ तक की सबसे गंदी देसी भाई-बहन सेक्स स्टोरी हिंदी में पढ़ें।

हाय, मेरा नाम सुधाकर है। मैं 19 साल का एक हॉट-ब्लडेड लड़का हूँ, मुंबई का रहने वाला। सेक्स मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा शौक है – हर रात पोर्न वीडियोज देखकर या इरोटिक स्टोरीज पढ़कर अपना 7 इंच का मोटा लंड हिलाता रहता था। कभी कोई गर्लफ्रेंड नहीं बनी, बस सपनों में लड़कियों की चूत और बूब्स की कल्पना करता।

गर्मियों की छुट्टियाँ आईं तो पूरा परिवार गांव चला गया। वहाँ जॉइंट फैमिली थी, सब रिश्तेदार इकट्ठे हो गए। मेरी फूफी (पापा की छोटी बहन) भी अपनी इकलौती बेटी आलिया के साथ आई हुई थी। आलिया मेरी मौसेरी बहन, मुझसे एक साल छोटी – सिर्फ 18 की – लेकिन उसकी बॉडी देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए। गोरी-गोरी चिकनी त्वचा, स्लिम कमर, छोटे-छोटे संतरे जैसे रसीले बूब्स जो टाइट टॉप में उछलते थे, गोल-गोल चूतड़ और वो कातिल बड़ी-बड़ी आँखें जो जैसे मुझे निगल जाना चाहती हों। उसकी मुस्कान में कुछ ऐसा था जो मेरे अंदर की आग को और भड़का देती।

एक दोपहर हम सब बच्चे लुका-छिपी खेल रहे थे। धूप तेज थी, सब पसीने से तर। मैं और आलिया एक पुराने, धूल भरे कमरे में छिप गए – वहाँ पुराने बक्से और मोटी दीवारें थीं। अचानक बाहर कदमों की आहट हुई। मैंने दरवाजे से झाँका तो देखा चाचा का लड़का (जो ढूंढ रहा था) आ रहा था। जल्दी से मैंने आलिया को दीवार से सटा दिया और खुद भी चिपक गया। हमारी साँसें मिल रही थीं, उसकी गर्मी मेरे शरीर से टकरा रही थी।

मेरा हाथ गलती से उसके सीने पर पड़ गया – सीधा उसके नरम, गर्म बूब्स पर। उफ्फ… वो मुलायमियत! पहली बार किसी लड़की के बूब्स छुए थे – वो इतने सॉफ्ट और गर्म थे कि मेरा लंड तुरंत टाइट हो गया। आलिया ने कुछ नहीं कहा, बस आँखें बंद कर लीं और हल्का सा सिहर उठी। उसकी साँसें तेज हो गईं। जब वो लड़का चला गया, तो उसने फुसफुसाते हुए कहा, “भाई… हाथ हटा लो ना…” मैंने नीचे देखा तो शर्मा गया, लेकिन हाथ हटाते वक्त जानबूझकर जोर से दबा दिया। उसके निप्पल्स मेरी हथेली में सख्त हो गए।

वो बस मुस्कुराई, कुछ नहीं बोली – बस उसकी आँखों में एक शरारती चमक थी, जैसे कह रही हो कि ये खेल अच्छा लग रहा है।

उसके बाद तो जैसे मेरे अंदर का जानवर जाग गया। जब भी खेलते, मैं मौका देखकर उसके बूब्स पर हाथ फेर देता – कभी पीठ पीछे से, कभी भीड़ में। वो कभी मना नहीं करती, बस शरमाकर लाल हो जाती और हल्का सा “उम्म्म…” करके कराह लेती। उसकी वो कराहट मेरे लंड को पागल कर देती।

एक दिन दोपहर में सब बाग में आम के पेड़ों तले बैठे थे, मुझे पेशाब लगी तो मैं घर के अंदर चला गया। बाथरूम से पानी की फुहारों की आवाज आ रही थी। ऊपर वाले छोटे रोशनदान से झाँका तो दिल की धड़कन रुक गई – आलिया नहा रही थी, बिल्कुल नंगी! उसकी गोरी बॉडी पर पानी की बूंदें लुढ़क रही थीं।

छोटे-छोटे बूब्स पर गुलाबी निप्पल्स तने हुए, पतली कमर, और नीचे… उसकी गुलाबी, एकदम क्लीन शेव्ड चूत! चूत की फांकें हल्की गुलाबी, जैसे अभी-अभी फूल खिले हों। मैं वहीं खड़े-खड़े अपना लंड पैंट से निकालकर जोर-जोर से हिलाने लगा। उसकी चूत देखकर झड़ गया, वीर्य दीवार पर गिरा।

फिर छुट्टियाँ खत्म हुईं, सब लखनऊ वापस चले गए, लेकिन मैं गांव में रुक गया। एक हफ्ते बाद बर्दाश्त नहीं हुआ – आलिया की वो बॉडी, वो कराहटें दिमाग में घूम रही थीं। मैंने दादी से कहा कि मुझे भी लखनऊ जाना है। बस पकड़ी और पहुँच गया।

आलिया झाड़ू लगा रही थी, मुझे देखते ही उसकी आँखें चमक उठीं। “भाई आप आ गए!” वो दौड़कर आई, मुझे गले लगाया – उसके बूब्स मेरे सीने से दबे तो मेरा लंड खड़ा हो गया। फूफी अंदर थीं। उसने मुझे पानी पिलाया, फिर बोली, “आप अपने कमरे में आराम करो, मैं अभी आती हूँ।” मैं लेट गया तो वो चुपके से आ गई, बेड के किनारे बैठ गई। उसकी खुशबू से कमरा महक उठा।

“अचानक कैसे आए?” उसने शरारत से पूछा।
“एक लड़की की गोद में बैठकर…” मैंने मज़ाक में कहा।
वो हँस पड़ी, “भाभी की गोद में?”
“कौन भाभी?”
“तुम्हारी गर्लफ्रेंड…” उसने होंठ चबाते हुए कहा और अपना दुपट्टा सरकाया – ब्रा की पतली स्ट्रैप दिखाई दी। मेरी तो हालत खराब, लंड पैंट फाड़ने को हो रहा था।
“यार मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।”
“सच में?” उसने मेरी आँखों में गहराई से देखा, फिर फुसफुसाई, “मुझे तो लगा था तुम बहुत शरीफ हो… लेकिन गांव में जो तुम मेरे बूब्स दबाते थे ना…” और हँस दी।

रात को मैं पेशाब करने उठा तो सीधा उसके कमरे में चला गया। वो सो रही थी, चाँदनी में उसका चेहरा किसी अप्सरा सा लग रहा था। मैं पास बैठा, धीरे से उसका बूब्स दबाया। वो हल्का सा सिहर उठी लेकिन आँखें नहीं खोलीं। मैंने जंपर के अंदर हाथ डाला, ब्रा के ऊपर से उसके सख्त निप्पल्स सहलाने लगा। वो कराह रही थी, “उम्म्म्म… आह…” मेरे लंड में आग लग गई। मैं बाथरूम में जाकर झड़ गया, लेकिन अब बस एक ही ख्याल था – इसे पूरा चोदना है।

अगले दिन मैंने प्लान बनाया। मार्केट से स्ट्रॉंग स्लीपिंग पिल्स और एक लीटर कोल्ड ड्रिंक ली। डिनर के बाद सबको पिलाई – फूफी, आलिया, सब। खुद नहीं पी। आधे घंटे में पूरा घर गहरी नींद में। रात 11 बजे मैं आलिया के कमरे में घुसा, दरवाज़ा अंदर से लॉक किया, धीमी लाइट जलाई। वो गहरी नींद में थी। मैंने उसके गाल पर किस किया – कोई रिएक्शन नहीं। फिर उसके गुलाबी होंठ चूसे… वो नींद में भी हल्का सा मुँह खोलकर साथ देने लगी, जैसे सपने में भी मेरे लंड की चाहत हो।

मैंने धीरे से उसका सलवार का नाड़ा खोला, सलवार नीचे सरकाई। उसकी पिंक पैंटी पूरी गीली थी – चूत रस से तर। जंपर ऊपर किया तो उसके नंगे बूब्स बाहर आ गए – छोटे, परफेक्ट, गुलाबी निप्पल्स पत्थर जैसे तने हुए। मैं पागल हो गया। पहले एक बूब्स मुँह में लिया, जोर-जोर से चूसा, निप्पल्स को दाँतों से काटा।

वो नींद में भी सिहर रही थी, “भाई… आह… मजा आ रहा है…” मैं नीचे गया, पैंटी उतारी – उसकी चूत से मदहोश करने वाली खुशबू आ रही थी। मैंने नाक रगड़ी, जीभ अंदर डाली – उसका रस मीठा और गाढ़ा। वो कमर उठाकर “उम्म्म्म्म… भाई… और…” करने लगी।

मैं पूरी तरह नंगा हो गया। मेरा 7 इंच का मोटा, नसों वाला लंड लोहे जैसा खड़ा था। पहले उसकी चूत पर लंड रगड़ा – वो फिसल रहा था उसके रस में। फिर धीरे से सुपारा अंदर किया। बहुत टाइट थी – कुंवारी चूत जो थी। मैंने कोकोनट ऑयल लगाया और एक जोर का धक्का मारा – आधा लंड अंदर, उसकी सील टूटी, हल्का सा रस।

वो नींद में भी चीखी, “आह… भाई… दर्द… धीरे…” लेकिन मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर ठूँस दिया। उसकी चूत ने मेरा लंड इतना कसके पकड़ा कि मजा दोगुना हो गया। मैंने स्पीड बढ़ाई – जोर-जोर से ठोकने लगा। 20 मिनट में उसके अंदर झड़ गया, गर्म वीर्य उसकी कोख में भर दिया।

फिर दूसरी बार… इस बार वो नींद में भी पूरा साथ दे रही थी – खुद कमर हिला रही थी, “भाई… और जोर से… चोदो मुझे…” मैंने उसके बूब्स दबाते हुए, चूत में उंगली डालकर उसका क्लिटोरिस सहलाया तो वो झड़ने लगी – चूत ने मेरा लंड निचोड़ा। मैं 35 मिनट तक लगातार चोदता रहा, हर धक्के में उसकी चूत चप-चप कर रही थी।

सुबह तक मैंने उसे चार बार चोदा। हर बार वो नींद में भी पूरी रंडी बन गई – कराहती रही, कमर हिलाती रही, “भाई… मजा आ रहा है… और करो…” जाते वक्त सुबह उसने आँखें खोलीं, मुझे देखकर शरमाई और फिर मुस्कुराकर बोली, “भाई… कल रात तुमने मुझे जन्नत दिखा दी… फिर कब?” मैंने उसके होंठ चूम लिए और कहा, “हर रात, मेरी जान।”

अब जब भी मौका मिलता है – फूफी के बाहर जाने पर, रात को चुपके से – हम दोनों एक-दूसरे को जन्नत की सैर कराते हैं। कभी मैं उसकी चूत चाटता हूँ तो कभी वो मेरा लंड मुँह में लेकर चूसती है। वो मेरी अपनी… मेरी जन्नत… मेरी रंडी बहन।

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