माँ को दुल्हन बनाकर चोदा – असली सुहागरात की हॉट कहानी
Mom Ko Dulhan Banakar Choda – Asli Suhagraat Ki Hot Kahani
मिहिर और उसकी 45 साल की सेक्सी मॉम की असली सुहागरात की हॉट देसी कहानी। लाल साड़ी, घूंघट, चुदाई की रात और भरपूर वीर्य से भरी माँ की चूत – पूरी इंसेस्ट सेक्स स्टोरी हिंदी में पढ़ें।
हाय, मेरा नाम मिहिर है। मैं पुणे में रहता हूँ। मम्मी और मेरे बीच अब कोई परदा, कोई शर्म, कोई सीमा नहीं बची थी। हमारा रिश्ता माँ-बेटे से कहीं आगे बढ़ चुका था – हर रात हम एक-दूसरे के होकर सोते, जैसे नवविवाहित पति-पत्नी। उनकी गर्म साँसें, उनकी नरम त्वचा, उनकी वो मीठी सिसकियाँ… सब कुछ मेरे लिए आदत बन चुका था। मम्मी की उम्र 45 के पार थी, लेकिन उनका जिस्म अभी भी जवान लड़की जैसा था – गोरा, मुलायम, और इतना रसीला कि मैं उन्हें देखते ही पागल हो जाता।
एक रात करीब 10:30 बजे मैं मम्मी के कमरे में गया। कमरे में हल्की सी खुशबू थी – उनकी बॉडी लोशन की। मम्मी बैंगनी रंग की सिल्की नाइट गाउन में बेड पर लेटी थीं। गाउन उनका बदन इतनी खूबसूरती से लिपटा हुआ था कि उनकी भरी हुई छातियाँ और गोल-गोल कूल्हे साफ़ झलक रहे थे। मैं बिना कुछ बोले उनके पास गया, करवट लेकर उनके पीछे चिपट गया। मेरा लंड पहले से ही तना हुआ था, और जैसे ही वो उनकी मुलायम गांड से टकराया, मम्मी ने गहरी आह भरी।
उन्होंने मुस्कुराते हुए, लेकिन थोड़ा नखरा दिखाते हुए कहा, “क्या है रे बेटा… आज नहीं… रोज-रोज की आदत डाल दी है तूने मुझे। मैं तेरी माँ हूँ, बीवी नहीं।”
मैंने उनकी गर्दन पर हल्के-हल्के किस करना शुरू कर दिया। गीले होंठ उनकी नरम त्वचा पर फेरते हुए मैंने कान में फुसफुसाया, “मॉम… मेरा लंड तो बस तुम्हें देखकर ही खड़ा हो जाता है। तुम्हारी ये मुलायम गांड… ये खुशबू… आज कर लो ना प्लीज़… वैसे भी कल पापा आ रहे हैं, दो दिन तुम उनकी हो जाओगी। मुझे तो बस ये दो रातें मिलती हैं।”
मम्मी ने हल्का सा विरोध किया, लेकिन उनकी साँसें तेज़ हो रही थीं। मैंने अपना हाथ उनकी पतली कमर पर फिराया, फिर धीरे-धीरे जाँघों तक ले गया। सिल्की गाउन को ऊपर सरकाते हुए मैंने उनकी गोरी जांघें छुईं। नीचे काली लेस वाली पैंटी थी – वो काली लेस उनकी गोरी त्वचा पर इतनी सेक्सी लग रही थी कि मेरा दिमाग़ घूम गया।
मम्मी ने शरमाते हुए कहा, “क्या देख रहा है इतना ध्यान से? जैसे पहली बार देख रहा हो… कितनी बार नंगी कर चुका है अपनी माँ को!”
मैंने उनकी आँखों में देखकर कहा, “मॉम, तुम हर बार नई लगती हो… तुम इतनी सेक्सी हो कि मन कभी नहीं भरता।”
मम्मी मुस्कुराईं, उनकी आँखों में शरम और चाहत दोनों थीं, “तू तो अपनी माँ का पूरा दीवाना हो गया है…”
मैं गाउन के अंदर घुस गया, सिर बाहर निकालकर उनकी गांड पर हाथ फेरते हुए किस करने लगा। उनकी सिसकियाँ आने लगीं। “उफ्फ़… तू बड़ा नॉटी हो गया है बेटा… रोज़ नया-नया तरीका ढूंढता है… तेरे पापा ने भी कभी ऐसे नहीं किया।”
मैंने गाउन पूरी उतार दी। अब मम्मी सिर्फ़ काली पैंटी और सफ़ेद ब्रा में थीं। उनकी गोरी कमर, भरी हुई छातियाँ, और वो गोल-गोल कूल्हे… मैंने उन्हें कसकर बाहों में लिया, होंठों पर गहरा, लंबा किस किया। जीभ अंदर डालकर उनकी जीभ से खेलने लगा। साथ ही पैंटी के ऊपर से उनकी गांड को मसलने लगा। मम्मी की साँसें इतनी तेज़ हो गईं कि उनकी छातियाँ मेरे सीने से टकरा रही थीं।
“आह… कितना प्यार कर रहा है मेरा बेटा… सुहागरात में भी इतना नहीं हुआ था…” उनकी आवाज़ काँप रही थी।
मैंने उन्हें पलटा, पीछे से ब्रा का हुक खोल दिया। उनके भरे-पूरे स्तन आज़ाद हो गए। मैंने उन्हें दबाया, निप्पल्स को उंगलियों से मरोड़ा। फिर पैंटी नीचे सरका दी। मम्मी अब पूरी तरह नंगी थीं – उनकी गुलाबी चूत पर हल्के बाल, और उसमें से चमकती हुई गीलाहट। मैंने उन्हें बेड पर लिटाया, उनके पैर फैलाए और चूत पर मुँह रख दिया।
धीरे-धीरे जीभ से चाटने लगा। पहले बाहर की लिप्स, फिर अंदर तक। मम्मी की चूत एकदम गीली हो गई, उनका रस मेरे मुँह में आ रहा था। “उफ्फ़ मिहिर… बस… मेरी जान निकाल देगा तू… आह्ह्ह…” उनकी कमर ऊपर उठने लगी।
फिर मैंने अपना लंड उनकी चूत पर रखा। मम्मी ने खुद अपनी चूत फैला दी और आँखों ही आँखों में इशारा किया। मैंने धीरे से अंदर सरकाया। एकदम गर्म, नरम, मखमली एहसास। मैंने उन्हें कसकर जकड़ लिया और धीरे-धीरे झटके देने लगा। हर झटके के साथ उनकी सिसकियाँ कमरे में गूँज रही थीं – “आह्ह… हाँ… और ज़ोर से… मेरा राजा बेटा… चोद मुझे…”
25 मिनट तक मैंने उन्हें अलग-अलग पोज़िशन में चोदा – कभी मिशनरी, कभी डॉगी, कभी साइड से। आखिर में मैंने सारा माल उनकी चूत के अंदर छोड़ दिया। गर्म वीर्य उनकी गर्माहट में मिल गया। हम नंगे ही लिपटकर सो गए, मेरी उंगलियाँ उनकी चूत में और उनका हाथ मेरे लंड पर।
सुबह 5:30 बजे मम्मी ने मुझे जगाया, “उठ बेटा, पापा की ट्रेन है।”
मैंने नींद में ही उन्हें खींचकर अपने ऊपर गिरा लिया। उनका गाउन ऊपर किया और सुबह-सुबह फिर लंड अंदर पेल दिया। मम्मी हाँफते हुए बोलीं, “जल्दी कर पागल… सुबह का शॉट तो तेरा देर तक चलता है…”
20 मिनट की जोरदार चुदाई – मैंने उन्हें पीठ के बल लिटाया, उनके पैर अपने कंधों पर रखे और तेज़-तेज़ ठोका। आखिर में फिर उनकी चूत में झड़ गया। मम्मी की आँखें बंद थीं, चेहरे पर संतुष्टि की चमक।
पापा आए। दो दिन हमने बिल्कुल नॉर्मल बिहेव किया – सामने माँ-बेटे, पीछे चाहत की आग। तीसरे दिन जैसे ही पापा बिज़नेस के लिए बाहर गए, मैं घर लौटा तो मम्मी शाइनिंग ब्लू नाइटी में तैयार बैठी थीं। नाइटी इतनी पतली थी कि अंदर कुछ नहीं पहना था, निप्पल्स साफ़ दिख रहे थे।
मैंने उन्हें गोद में उठाया, बेड पर पटका और दो दिन की भूख मिटाई। पहले राउंड में मैंने उन्हें दीवार से सटा कर खड़ा-खड़ा चोदा। दूसरा राउंड बेड पर – बैक-टू-बैक दो शॉट। लिपटे हुए मम्मी बोलीं, “दो दिन में इतना… तू तो मेरे ऊपर टूट पड़ा था। मेरी चूत आज दर्द कर रही है।”
मैंने उनकी गांड पर हल्का सा थप्पड़ मारा, “तुम्हारे बिना पागल हो जाता हूँ मॉम… तुम मेरी हो, सिर्फ़ मेरी।”
फिर हमने गले लगकर बातें की। मम्मी ने हँसते हुए कहा, “45 के बाद औरत की ज़रूरतें कोई पति नहीं समझता… अपना बेटा ही बेस्ट ऑप्शन होता है। तू मेरा सुहाग है अब।”
रात भर चुदाई चलती रही – कभी 69, कभी मैं ऊपर, कभी वो ऊपर।
अगले दिन मैंने मम्मी से कहा, “आज तुम मेरी दुल्हन बनोगी। लाल साड़ी, पूरा श्रृंगार… असली सुहागरात मनाएँगे।”
मम्मी पहले तो शरमाईं, “पागल है तू… अपनी माँ के साथ सुहागरात?”
पर मेरी जिद के आगे हार गईं। शाम को हम मार्केट गए – लाल बनारसी साड़ी, मैचिंग ब्लाउज़, मारून शिमरी ब्रा-पैंटी, मेकअप किट, चूड़ियाँ, बिंदी, सब लिया। रात 8:30 बजे डिनर किया। मम्मी बोलीं, “जब तक मैं आवाज़ न दूँ, हॉल में ही रहना।”
9:20… 10:20… 11 बजे तक इंतज़ार। मैं तड़प रहा था, लंड बार-बार खड़ा हो रहा था। आख़िर 11:45 पर मम्मी की मीठी आवाज़ आई, “मिहिर… दरवाज़ा खुला है।”
मैं अंदर गया। कमरे में सिर्फ़ लाल बल्ब की हल्की रोशनी। मम्मी मारून हैवी वर्क वाली साड़ी में घूँघट डाले बेड पर बैठी थीं – बिल्कुल नई-नवेली दुल्हन। मैंने घबराते हुए घूँघट उठाया। मम्मी ने शरमाकर आँखें नीची कर लीं। लाल लिपस्टिक, काजल, बिंदी, मंगलसूत्र – वो किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थीं।
मैंने उन्हें खड़ा किया, पूरी लाइट जलाई। मम्मी दुल्हन के लिबास में परी लग रही थीं। मैंने एक-एक करके चूड़ियाँ उतारीं, नेकलेस, झुमके, मंगलसूत्र… फिर साड़ी का पल्लू धीरे से गिराया। साड़ी को धीरे-धीरे खोलता गया। नीचे मारून पेटीकोट और ब्लाउज़। ब्लाउज़ के हुक खोलते हुए मैंने उनकी गर्दन चूमी, काटा। फिर पेटीकोट का नाड़ा खींचा। अब मम्मी सिर्फ़ मारून शिमरी ब्रा-पैंटी में। उनकी गोरी जाँघों के बीच वो चमकती हुई पैंटी… मैं पागल हो गया।
मैंने उन्हें कसकर गले लगाया, होंठ चूसे, जीभ अंदर तक डाली। उनकी गांड को मसलते हुए मैंने ब्रा-पैंटी उतार दी। मम्मी पूरी नंगी। मैंने उन्हें बेड पर लिटाया, पैर कंधों पर रखे और उनकी चूत को जीभ से चाटने लगा। पहले धीरे, फिर तेज़। मम्मी की सिसकियाँ… “आह्ह… मिहिर… मेरी जान… आज तो तू मुझे मार डालेगा…”
मम्मी ने मेरे सिर को कसकर पकड़ा, जाँघों से दबाया और मेरे मुँह में झड़ गईं – उनका रस मेरे चेहरे पर।
फिर मैंने लंड उनके मुँह के पास किया। मम्मी ने प्यार से चूसना शुरू किया – पहले टिप, फिर पूरा अंदर। 5 मिनट बाद मैं बोला, “मॉम… आने वाला है…”
मम्मी ने मना किया, पर मैंने मनाया। आख़िर वो मान गईं – पहले चूत में डालो, आने के वक़्त मुँह में।
मैंने एक जोरदार झटका मारा, पूरा लंड अंदर। मम्मी चीखीं, “हाँ… और गहराई तक… आज मुझे फाड़ दे बेटा…”
30 मिनट की ज़बरदस्त चुदाई – कभी धीमे लंबे स्ट्रोक, कभी तेज़-तेज़ धक्के। मैं बोला, “मॉम… अब…”
मम्मी ने मुझे कसकर जकड़ा, “अंदर ही झाड़ दे… मुझे तेरे गर्म माल से भर दे… आज अपनी माँ को अपनी बीवी बना ले…”
मैंने सारा रस उनकी चूत में उड़ेल दिया। फिर रात भर दो और लंबे राउंड – एक में वो ऊपर थीं, मेरे लंड पर उछलती रहीं, दूसरा राउंड मैंने उन्हें घोड़ी बनाकर पेला। सुहागरात सच में पूरी हो गई।
सुबह हम नंगे ही उठे। मम्मी बाथरूम गईं, मैं पीछे-पीछे। शावर के नीचे एक और राउंड – मैंने उन्हें दीवार से सटाकर पीछे से चोदा, पानी और वीर्य साथ बहते रहे।
बस इतना ही। मॉम का स्पेशल गिफ्ट – उनकी पूरी जवानी, उनकी सारी कामुकता, सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरे लिए।
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